NRC के खिलाफ लिबरल ब्रिगेड की फेक न्यूज फैक्टरी से निकलने लगा झूठ!

असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) ड्राफ्ट को बदनाम करने का नाटक शुरू हो चुका है। इस नाटक में लिबरल ब्रिगेड की फेक न्यूज फैक्ट्री ने अपना षड़यंत्र रचना शुरू कर दिया है। तभी तो 70 वर्षीय एक वृद्ध की आत्महत्या को एनआरसी से जोड़कर प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है। दरअसल भारत-बांग्लादेश सीमा के पास धूबरी जिला के गोकलगंज इलाके में 70 वर्षीय देबेन बर्मन ने आत्महत्या कर ली। लेकिन लिबरल ब्रिगेड द्वारा संचालित स्थानीय मीडिया ने इस आत्महत्या की घटना को एनआरसी से जोड़कर फेक न्यूज बना डाला है।

स्थानीय मीडिया की देखादेखी राष्ट्रीय मीडिया ने उसी लाइन पर चलना शुरू कर दिया है। मीडिया के फेकन्यूज के मुताबिक एनआरसी में नाम नहीं आने की वजह से देबेन ने आत्महत्या की है। जबकि पुलिस का कहना है कि ये सारे आरोप गलत हैं। क्योंकि देबेन बर्मन की ही नहीं बल्कि उनकी पत्नी और बहू का नाम भी एनआरसी में मौजूद है।

मुख्य बिंदु

* आत्महत्या जैसी घटना को लिबरल ब्रिगेड ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से जोड़कर फैलाने लगा झूठ

* एनआरसी के खिलाफ नकारात्मक विमर्श स्थापित करने के लिए असम को बनाया फेक न्यूज फैक्टरी का प्रयोगशाला

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को बदनाम करने तथा इसके खिलाफ एक नकारात्मक विमर्श स्थापित करने कि लए लिबरल ब्रिगेड ने अपनी कमर कस ली है। इसके लिए उसने असम को फेक न्यूज फैक्ट्री की प्रयोगशाला बना दिया है। इससे पहली फेक न्यूज 70 वर्षीय देबेन बर्मन की आत्महत्या के रूप में निकली है। जबकि सच्चाई ये है कि देबेन बर्मन के पास से न कोई सुसाइड नोट मिला है न ही उसने एनआरसी में नाम न आने की कहीं शिकायत की है।

प्रारंभिक जांच के मुताबिक पुलिस ने कहा है कि इस प्रकार का फेक न्यूज फैलाना किसी असामाजिक तत्व का काम हो सकता है। क्योंकि फेक न्यूज में जितने भी आरोप लगाए गए हैं सारे के सारे निराधार हैं। पुलिस का कहना है कि जहां तक एनआरसी में नाम की बात है तो मृतक के साथ उनकी पत्नी और बहू का भी नाम एनआरसी में मौजूद है। हां ये बात अलग है कि उनके बेटे और पोते का नाम एनआरसी में नहीं है। लेकिन इसे तो अभी ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाया जा सकता है!

पुलिस का ही कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व असम में एनआरसी को किसी भी सूरत में बदनाम करना चाहता है। जिसका साथ मीडिया का एक तबका और लिबरल ब्रिगेड दे रहा है। ये लोग एनआरसी के खिलाफ नकारात्मक विमर्श स्थापित करने में जुटे हुए हैं।

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