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गौरव प्रधान पर दर्ज है यौन उत्पीड़न की एफआईआर और मामला विचाराधीन है

खुद को डेटा की दुनिया का मास्टर माइंड कहने वाले डेटा साइंटिस्ट गौरव सक्सेना उर्फ़ गौरव प्रधान पर वर्ष 2017 में आईपीसी की धारा 354डी अर्थात पीछा करना, धारा 504 अर्थात जानबूझकर अपमान करना, धारा 506 अर्थात आपराधिक धमकी, और धारा 66ए अर्थात ओफेंसिव सन्देश भेजने के अंतर्गत एफआईआर दर्ज हुई थी।

यह एफआईआर दिनांक 19 मई 2017 को शाम को शाम 4 बजे दर्ज की गयी थी। और यह गाज़ियाबाद में विजय नगर थाना क्षेत्र में दर्ज की गयी थी। इस एफआईआर में आरोपी का नाम दिया गया है, गौरव प्रधान, पिता का नाम है श्री ओ.पी. सक्सेना। इस एफआईआर ने प्रविष्टि संख्या दर्ज है 035। 

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गौरव सक्सेना अर्थात गौरव प्रधान को एक महिला भाजपा सदस्य के यौन उत्पीडन के लिए आरोपी बनाया गया था और उन्हें निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत बुक किया गया है।

धारा 354डी अर्थात पीछा करना, यह तब लगाई जाती है जब

(1) ऐसा कोई पुरुष, जो –

(i) किसी स्त्री का उससे व्यक्तिगत अन्योन्यक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, उस स्त्री द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा उपदर्शित किए जाने के बावजूद, बारंबार पीछा करता है और संपर्क करता है या संपर्क करने का प्रयत्न करता है; अथवा

(ii) जो कोई किसी स्त्री द्वारा इंटरनेट, ई-मेल या किसी अन्य प्ररूप की इलैक्ट्रानिक संसूचना का प्रयोग किए जाने को मानीटर करता है,

धारा 504 अर्थात जानबूझकर अपमान करना, अर्थात जो कोई भी किसी व्यक्ति को उकसाने के इरादे से जानबूझकर उसका अपमान करे, इरादतन या यह जानते हुए कि इस प्रकार की उकसाहट उस व्यक्ति को लोकशांति भंग करने, या अन्य अपराध का कारण हो सकती है

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धारा 506 अर्थात आपराधिक धमकी अर्थात जो कोई भी आपराधिक धमकी का अपराध करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।

यदि धमकी मृत्यु या गंभीर चोट, आदि के लिए है – और यदि धमकी मौत या गंभीर चोट पहुंचाने, या आग से किसी संपत्ति का विनाश कारित करने के लिए, या मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या सात वर्ष तक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या किसी महिला पर अपवित्रता का आरोप लगाने के लिए हो और धारा 66ए अर्थात आपत्तिजनक मेसेज भेजना।

गौरव प्रधान इस अपराध के मामले में अभी भी एक अभियुक्त है। उस पर दर्ज मामले अभी विचाराधीन है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही है।

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