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ओटीटी पर कानून बनाने को लेकर सरकार ने निर्णय नहीं लिया, सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ा

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नवंबर 2020 में माननीय राष्ट्रपति ने भारत सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्री को ओटीटी पर कानून बनाने के लिए आवश्यक शक्तियां सौंप दी थी। शक्तियां सौंपे जाने को तीन माह होने आ गए लेकिन कोई कानून नहीं बन सका। इस बीच दो बार मंत्री जी ने याद दिलाया कि उनकी तथाकथित समिति इस पर कार्य कर रही है। मंत्री जी और समिति के रहते बॉलीवुड ने ऐसी कई फ़िल्में बनाकर प्रदर्शित कर दी, जिनके कारण देश के सम्मान और हिन्दू आस्था को ठेस पहुंची।

 इसके बाद फरवरी माह शुरु होते ही मंत्री जी ने कहा कि वे ओटीटी के लिए गाइडलाइंस बनाने जा रहे हैं। स्पष्ट है कि भारत सरकार के ये मंत्री कानून बनाने से लगातार बच रहे हैं। आश्चर्यजनक ये भी है कि इस ओर माननीय प्रधानमंत्री का कोई ध्यान नहीं है, जबकि ये मुद्दा भारत की लोक संस्कृति से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

प्रकाश जावड़ेकर की बहानेबाज़ी से परेशान होकर सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने इस पर सुनवाई करते हुए भारत सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को नोटिस जारी किया है।

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न का कोई ठोस उत्तर नहीं दे सके। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उम्मीद है आप मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज का जवाब सुनने के बाद देश की जनता को ये आशा छोड़ देनी चाहिए कि सरकार कोई कड़ा कानून बनाने जा रही है।

केएम नटराज ने कहा ‘हम (केंद्र) किस सीमा तक नियमन कर सकते हैं, इस पर अभी भी विचार चल रहा है। इसके लिए क्या कानून जरूरी है, इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है।’ जनता को जानना चाहिए कि वे क्या कहना चाह रहे हैं। सरकार अब तक इसी सोच-विचार में लगी है कि वह किस सीमा तक नियम बना सकती है।

नटराज की दलील सुनने के बाद ये भी पता चला कि ओटीटी पर कानून बनाना सरकार आवश्यक नहीं समझ रही है। सर्वोच्च न्यायालय को जो टका सा जवाब दिया गया है, उससे स्पष्ट हो रहा है कि भारत सरकार ओटीटी पर कानून बनाने से लगातार बच रही है। केंद्र सरकार की ये मंशा जानकर बॉलीवुड में तो प्रसन्नता की लहर दौड़ गई होगी।

यदि सरकार कानून नहीं बनाती तो एकता कपूर को नीली फ़िल्में बनाने में कोई अड़चन नहीं होने वाली है। दीपिका पादुकोण जैसे बदनाम हस्ती को लेकर रामायण बनाने में भी बॉलीवुड को कोई समस्या नहीं आने वाली है। अनुराग कश्यप और अनिल कपूर वायुसेना का अपमान करने के बाद अब थल सेना को सुलभता से निशाना बना सकेंगे।

अनुष्का कपूर अपनी फिल्म में ब्राम्हण पात्र को जनेऊ कान पर लपेटकर बलात्कार के दृश्य दिखाने के बाद संभव है कि मंदिर प्रांगण में ही बलात्कार का दृश्य फिल्मा सकेगी। हम तो समझे थे कि इस शक्तिशाली सरकार के होते बॉलीवुड देश के सम्मान और हिन्दू आस्थाओं पर प्रहार करने से डरेगा। लेकिन हम तो देख रहे हैं कि शक्तिशाली सरकार के राज में बॉलीवुड के आक्रमण और अधिक बढ़ गए हैं।

पाकिस्तान में बैठा दाऊद अपना एजेंडा बॉलीवुड के माध्यम से आसानी से चला रहा है। दाऊद इब्राहिम सर्व व्यापक और सर्व शक्तिमान है। यही कारण है कि केंद्र सरकार की तीन एजेंसिया आठ माह से मुंबई में बैठी हैं लेकिन सफलता के नाम पर उनके पास एक भी महत्वपूर्ण गिरफ्तारी या लीड नहीं है। क्या प्रधानमंत्री महोदय अब इस बारे में सोचेंगे या अभी हमें ये विषपान और करना होगा।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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