पाकिस्तान से छूटकर आया हामिद एक अपराधी था, फिर उसका महिमामंडन क्यों?

सन 2014 के बाद से भारत में एक बात अच्छी हुई है। देश की जनता को भारतीय मीडिया का डीएनए साफ़-साफ़ नज़र आने लगा है। भारतीय मीडिया का एक धड़ा या पौना कह लें, पाकिस्तान से बहुत प्रेम करता है। उसे कश्मीर में पत्थरबाज़ों पर सेना की कार्रवाई से एतराज होता है। उसे भारतीय गायकों का काम छीनते पाकिस्तानी गायकों का इंटरव्यू दिखाना अच्छा लगता है। उसे प्रदूषण के बहाने पटाखे चलाने पर एतराज होता है लेकिन बकरीद पर मूक पशुओं का रक्त बहाना पर्व का अभिन्न हिस्सा हो जाता है। आज भारतीय मीडिया ने पाकिस्तान में जेल काटकर आए एक भारतीय युवा का ऐसा स्वागत किया है मानो वह भारत के लिए कोई महान कार्य कर लौट आया है।

भारतीय मीडिया की हामिद में दिलचस्पी का पता वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम के एक ट्वीट से भी होता है। अंजुम के ट्वीट के मुताबिक राजदीप सरदेसाई ने हामिद के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बात की थी। वहीं राजदीप सरदेसाई ने हामिद की रिहाई के लिए असली हीरो पाकिस्तानी वकीलों बताया है। इससे पता चलता है कि भारतीय मीडिया हामिद की स्टोरी में उसके गैर-कानूनी तरीके से पाकिस्तान जाने की अनदेखी कर उसे हीरो बनाने की कोशिश आज से नहीं, बल्कि उसके पाकिस्तानी जेल में होने के समय दिलचस्पी ले रहा है।

सन 2012 में फेसबुक के जरिये हामिद अंसारी की दोस्ती एक पाकिस्तानी लड़की से होती है। दोस्ती मोहब्बत में बदलती है और हामिद अवैध रूप से पाकिस्तान जा पहुँचता है। लड़की से मिलने से पहले ही हामिद एक लॉज से गिरफ्तार कर लिया जाता है। मामला एकदम साफ़ है। हामिद ने अपराध किया और उसे तीन साल की सज़ा सुनाई गई। पाकिस्तान में हामिद को जासूसी और बिना कागज वहां घुसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

खबर मिलते ही परिजनों ने उसे लाने के प्रयास शुरू कर दिए। पाकिस्तान में दो वकीलों ने हामिद का केस लड़ने में मदद की। इनके अलावा दो व्यक्ति और थे जिनकी सक्रियता के बाद इसे भारत लाया जा सका। एक थे पत्रकार जतिन देसाई और दूसरी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। तीन साल पाकिस्तानी जेल में रहकर जब हामिद वापस आता है तो इंटरव्यू में देसाई का नाम ही नहीं लेता। देसाई को छोड़ वह पाकिस्तानी वकीलों को अपनी रिहाई का श्रेय देने लगता है। क्या इस व्यक्ति को मीडिया द्वारा ऐसा प्रचार देना तर्कसंगत था। जवाब है कतई नहीं। मीडिया को ये खबर ऐसे खा जानी थी, जैसे कि वह राम जन्मभूमि से संबंधित खबरे खा जाया करता है और डकार भी नहीं लेता।

हामिद वाघा बॉर्डर पार करके आता है और शाहरुख़ खान की स्टाइल में भद्दा संवाद कहता है ‘मैं हामिद अंसारी हूं और मैं जासूस नहीं हूं।’ इसके बाद विदेश मंत्री हामिद को गले लगाकर आंसू पोंछती हैं, जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था। आख़िरकार हामिद दुश्मन देश में तीन साल की सजा काटकर आया है। नैतिक मूल्यों पर देखें तो उसका स्वागत नहीं होना चाहिए था बल्कि कड़ी पूछताछ के बाद भारत में भी मामला दर्ज करना चाहिए था। यहाँ भी हामिद के खिलाफ वही मामला बनता है। लेकिन पिछले छह घंटे से एक अपराधी महान बताकर पेश किया जा रहा है।

क्या ये हास्यापद नहीं है कि हामिद को स्टूडियो में बैठाकर उसकी महान यात्रा के अनुभव देश को सुनाए जाते रहे। इसके बजाय क्या हामिद से कड़े सवाल नहीं होने चाहिए थे ? किसी ने ये सवाल नहीं किये कि मंगलवार सुबह 6.30 बजे रिहाई होने के चंद घंटे बीतने के बाद आप इतने हष्ट-पुष्ट कैसे नज़र आ रहे हैं जबकि आपने खुद ही बताया कि आपको ठीक से खाना तक नहीं दिया जाता था। आपके चेहरे और शरीर से ऐसा नहीं लगता कि आपको पाकिस्तानियों ने घोर यातनाएं दी थी। जबकि पाकिस्तानियों की कैद से रिहा होने वाला कैदी महीनों तक ठीक से बात नहीं कर पाता और आप स्टाइलिश जैकेट पहनकर ज्ञान झाड़ रहे हैं।

बीबीसी हामिद की रिहाई के लिए पाकिस्तानी वकील को श्रेय दे रहा है। एबीपी, आज तक, एनडीटीवी जैसे बड़े चैनल एक अपराधी को हीरो बनाकर पेश कर रहे हैं। मुझे हैरानी है कि आज तक इन चैनलों ने किसी बहादुर भारतीय सैनिक को ऐसा सम्मान देकर नहीं बुलाया। इसलिए मैंने शुरू में ही कहा था भारत की जनता देश के मीडिया का डीएनए खूब जान चुकी है। हामिद को नायक बताने का प्रयास एक बार फिर बता गया कि ये देश का मीडिया नहीं बल्कि जोकरों का समूह है। इस समूह से आप ‘गीता’ और ‘हामिद’ जैसी मूर्खताओं की नियमित रूप से अपेक्षा कर सकते हैं और वे आपको निराश भी नहीं करते।

URL: Ansari, 33, to reach India through Wagah border

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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