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उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल में मोदी सरकार का ‘भोजपुरी’ दांव!

उम्मीद है कि उत्तरप्रदेश चुनाव से पूर्व मोदी सरकार भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता प्रदान कर पूर्वी उप्र में एक बड़ा चुनावी दाव खेल सकती है! करोड़ों लोगों की भाषा भोजपुरी को अभी तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिली है! भोजपुरी कलाकार एवं सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचलवासियों को एक सकारात्मक संदेश भाजपा दे चुकी है! गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी भोजपुरी को सम्मान दिलाने की बात बार-बार कही है, जिससे पूर्वी उप्र व बिहार के लोगों के अंदर एक उम्मीद जगी है!

यह भी सच है कि भोजपुरी की बहन मैथिली को पूर्व की वाजपेयी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने ही संवैधानिक सम्मान दिलाया था! इसलिए उप्र-बिहार के लोगों को इस बार भी मोदी की एनडीए सरकार से ही उम्मीद है! यदि उत्तरप्रदेश चुनाव से पूर्व सरकार इसके लिए बिल ले आती है तो पूरे उत्तरप्रदेश में इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

आगामी उत्तरप्रदेश चुनाव में भोजपुरी भाषा चुनाव में अहम जैसे-जैसे उत्तरप्रदेश में चुनाव नजदीक आ रहे हैं भोजपुरी भाषा भाषियों को इस बात की उम्मीद बढ़ रही है कि पूर्वी उत्तरप्रदेश को उनके सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी बोलचाल की भाषा भोजपुरी को उसका संवैधानिक हक प्रदान करेंगे! ध्यान रहे कि पूर्वी उत्तर-प्रदेश का एक बड़ा समुदाय भोजपुरी भाषी है! जो आगामी चुनाव में किसी भी पार्टी के गुणा- भाग को बिगाड़ सकता है।

माॅरिशस जैसे देशों ने भोजपुरी भाषा को अपनी संवैधानिक भाषा का दर्जा दिया है, लेकिन आश्चर्य है कि अपनी मातृभूमि में भोजपुरी संवैधानिक भाषा का दर्जा पाने के लिए कई दशकों से लड़ाई लड़ रही है। सिर्फ मॉरिशस ही नहीं, फिजी, सूरीनाम, नेपाल जैसे देशों में भोजपुरी को बोलने वाले की अच्छी खासी तादात है, यदि इन आंकड़ों पर गौर करें तो भोजपुरी एक तरह से विश्व मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है। विश्व स्तर पर बोली जाने वाली भाषा का अपने देश में इस तरह की उपेक्षा गले नहीं उतरती है।

भोजपुरी समाज, दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे वर्षों से भोजपुरी भाषा की अस्मिता के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने व्हाट्स एप पर मॉरीशस की अध्यक्ष डॉ़ सरिता का एक सन्देश को साझा किया है जिसमें उन्होंने भोजपुरी भाषा के लोकगीत को वर्ल्ड हेरिटेज ऑफ ह्यूमैनिटी में शामिल कर लिया गया है। आपको बात दूं वर्ल्ड हेरिटेज ऑफ ह्यूमैनिटी यूनेस्को द्वारा संचालित की जाती है। यह खबर सच में भोजपुरी भाषा भाषियों को उत्साहित करने वाली हो सकती है। शायद यूनेस्को के पहल से भोजपुरी भाषा संविधान की अष्ठम सूची में शामिल होने के लिए और सशक्त दावेदारी प्रस्तुत करे।

कुछ लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली नेपाली भाषा भी संविधान की अष्ठम सूची में सम्मिलित है किन्तु लगभग बीस करोड़ द्वारा बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा, अभी भी अपने देश में उपेक्षित है!वह भी तब जब की भारतीय संसद में लगभग 70 सांसद भोजपुरी भाषी है! भोजपुरी गायक व भाजपा के दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने एक बैठक में दुःख जताते हुए कहा था कि “भोजपुरी भाषा-भाषी सांसदों के बीच इसके लिए क्रेडिट लेने की होड़ के कारण इस दिशा में अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है”। मनोज ने इस बैठक में उपस्थित पत्रकारों से अपील भी की थी कि वह सभी सांसदों को एक मंच पर लायें और पूछें कि भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता दिलाने के सन्दर्भ में कितने सकरात्मक कदम उठाये गए हैं

उम्मीद करते हैं कि उत्तरप्रदेश चुनाव से पूर्व मोदी सरकार भोजपुरी भाषा को भी संवैधानिक मान्यता प्रदान करेगी। भोजपुरी भाषा-भाषी मोदी सरकार की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। यदि उत्तरप्रदेश चुनाव से पूर्व सरकार इसके लिए बिल ले आती है तो पूरे उत्तरप्रदेश में इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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