वास्तविक जीवन का भी सुपरहीरो है ‘हल्क’!

एवेंजर्स के सुपरहीरो ‘हल्क’ को जब गुस्सा आता है तो वह हरे रंग का दानव बन जाता है। गुस्सा हल्क की सबसे बड़ी ताकत है। हल्क को दुनिया भर के सिनेमाई दर्शक पसंद करते हैं। उनमे से कम ही जानते हैं कि हल्क का किरदार निभाने वाले अभिनेता मार्क रफेलो वास्तविक जीवन में भी किसी सुपरहीरो से कम नहीं है। नियति ने उनकी राह में कांटे ही कांटे उगा दिए लेकिन अदम्य इच्छा शक्ति के दम पर वे जीतकर लौटे। ‘हल्क’ के किरदार में जो जुझारूपन झलकता है, वह मार्क के वास्तविक जीवन संघर्ष का ही प्रभाव है।

हम मार्क को ताकतवर हल्क के रूप में जानते हैं लेकिन उस किरदार को कर रहे मार्क के जीवन की मुश्किलों को नहीं जान पाते। इस पचास साल के अभिनेता का जीवन भयानक हादसों से भरा रहा है। मार्वल कॉमिक्स के प्रतिभाशाली वैज्ञानिक का चरित्र निभाने वाले मार्क स्कूली जीवन में एक औसत छात्र हुआ करते थे। उन्हें बचपन में डिस्लेक्सिया हो गया था। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को पढ़ाई करने में परेशानी आती है। मार्क ने एक इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को काफी वक्त तक इस बीमारी का पता नहीं चल सका था। अब वे अभिभावक हैं और अपने बच्चों को लेकर बड़े सावधान रहते हैं।

जब मार्क बीमारी से सम्भले तो एक नई मुसीबत उनके लिए तैयार खड़ी थी। जब वे हाई स्कूल में थे तो उनका परिवार बैंक के कर्ज में फंस गया। पिता को जमा जमाया पेंटिंग बेचने का व्यवसाय बंद करना पड़ा। इस बारे में मार्क कहते हैं ‘हम सामान्य से दिवालिया अवस्था में पहुँच गए थे।एक परिवार के रूप में हम समाप्त हो चुके थे’। आर्थिक झंझावतों को सहते हुए मार्क आगे बढ़ते रहे। हालाँकि वे ये नहीं जानते थे कि जिंदगी उनके और भी इम्तेहान लेने वाली है।

उन्होंने कॅरियर जमाने के लिए हॉलीवुड का रुख किया। शुरूआती एक दशक उनके लिए कुछ खास सफल नहीं रहा। 1996 तक वे फिल्मों में छोटे -मोटे किरदार करते रहे। 2008 तक उनको फिल्म उद्योग में पहचान मिल गई थी लेकिन स्टार स्टेटस नहीं मिल सका था। इस बीच 2008 में एक हादसे ने उन्हें फिर से दहला दिया। उनके छोटे भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मार्क के लिए ये अपूरणीय क्षति थी। एक ऐसा नुकसान, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती थी। इसके बाद वे महीनों तक पटल से गायब रहे। जीवन उनकी कठिन परीक्षा ले रहा था। कॅरियर अब तक संवरा नहीं था और अब भाई की मौत ने उन्हें तोड़कर रख दिया था।

पहली ‘हल्क’ में मार्क काम नहीं कर सके। भाई की मौत के सदमे के बाद अभिनय में उनका मन नहीं लग रहा था और एक तरह से वे अपना कॅरियर ख़त्म मानकर चल रहे थे। मार्क के लिए ये निराशा के पल थे। उन्होंने हल्क का प्रोजेक्ट अभिनेता एडवर्ड नॉर्टन को दिलवा दिया और केंद्रीय भूमिका के लिए उनकी हर तरह से मदद भी की। फिल्म जबरदस्त हिट हुई। एडवर्ड का काम पसंद किया गया। अब मार्क घर वापसी की सोच रहे थे लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था।

जीवन के तमाम दर्द झेल चुके मार्क के लिए 2012 का साल उम्मीद लेकर आया। मार्वल सिनेमा की एवेंजर्स सीरीज में उन्हें हल्क की भूमिका के लिए चुन लिया गया। उसी ‘हल्क’ की भूमिका के लिए, जो उन्होंने अपने दोस्त के लिए छोड़ दी थी। ऐसा लग रहा था कि भाग्य अब मार्क पर मुस्कुरा रहा है। एवेंजर्स विश्वभर में बहुत कामयाब रही। मार्क दुनिया में लोकप्रिय सितारे बन गए। बदकिस्मती अब उनसे कोसो दूर रह गई थी। मार्क अब असली जीवन के ‘हल्क’ बन चुके थे।

हालाँकि भाग्य अब भी उनको आजमाने पर आमादा था। कामयाबी के शिखर पर विराजमान मार्क को पता चला कि उन्हें कान के पास गोल्फ गेंद के आकार का ब्रेन ट्यूमर हो गया है। यदि इसकी सर्जरी की जाती है तो अस्सी प्रतिशत आशंका है कि वे अपनी सुनने की क्षमता खो बैठेंगे। बीस प्रतिशत आशंका ये थी कि उनके चेहरे की नसे हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो जाएगी। सर्जरी करवाना ही एकमात्र रास्ता था और बहादुर हल्क ने यही करने का फैसला लिया। सर्जरी के बाद वे सुनने की क्षमता पूरी तरह खो बैठे और उनके चेहरे की कुछ नसे लकवाग्रस्त हो गई।

एक साल के लिए ‘हल्क’ गायब हो गया। कई अफवाहे बाहर आई। कहा गया कि मार्क अल्कोहलिक हो गए हैं। कुछ ने कहा कि निराशा से उबरने के लिए वे ड्रग्स लेने लगे हैं। अफवाहे तो थी लेकिन उनका खंडन करने के लिए मार्क नहीं थे। एक साल बाद गुमनाम हल्क ने वापसी की। एक कान से सुनने की उनकी क्षमता लौट आई थी और चेहरे की नसे भी ठीक हो चुकी थी। मार्क ने पुनः सुनहरे परदे पर शानदार वापसी की। नियति ने मार्क को बार-बार रसातल में पहुँचाया लेकिन अंत में उनके जुझारूपन की ही जीत हुई।

URL: Hulk’ is also a Real life superhero who naver give up

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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