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गोरक्षा के नाम पर हिंदुओं ने हिंदुत्व पर ही प्रहार कर दिया, इसलिए प्रधानमंत्री की पीड़ा जायज है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरक्षा के नाम पर गोरखधंधा चलाने वालों पर हमला क्या किया, जातिवादी मानसिकता के मोदी भक्त और जन्मजात मोदी विरोधी, एक साथ मोदी पर टूट पड़े! खुद को मोदी समर्थक मानने वालों को जरा भी आश्चर्य नहीं हुआ कि क्यों उनके सुर को पिछले 15 साल से मोदी को गाली देने वाले लोगों का सुर सपोर्ट कर रहा है? हिंदू धर्म की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले हिंदू महासभा और अन्य हिंदूवादी संगठन के नेता न्यूज चैनलों पर बैठकर देश के प्रधानमंत्री को नसीहत देने लगे कि प्रधानमंत्री ने गो-भक्तों की भावनाएं आहत की हैं!

ऐसे समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भैयाजी जोशी ने एक बयान जारी कर कहा कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाने वाले और सामाजिक सदभाव को बिगाड़ने का प्रयास करने वाले असमाजिक तत्वों का लोग भंडाफोड़ करें। आरएसएस ने कहा- कुछ अवसरवादियों के निंदनीय प्रयासों को उन लोगों से नहीं जोड़ना चाहिए जो गायों की वास्तविक सेवा कर रहे हैं और संरक्षण दे रहे हैं! मोदी ने भी तो यही कहा था कि गोरक्षा के नाम पर कुछ लोग समाज में तनाव और टकराव पैदा करना चाहते हैं!

बात-बात पर उफनने वाले जिहादी हिंदू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही आरोप लगा रहे हैं कि वह प्रधानमंत्री बनने के बाद सेक्यूलर हो गए हैं! लेकिन क्या ऐसे लोग आरएसएस को भी सेक्यूलर कहेंगे, जिसमें न जाने कितने लोगों ने अपना पूरा जीवन हिंदुत्व के लिए खफा दिया! मैं आरएसएस से नहीं हूं, लेकिन मैंने काफी शोध के बाद आरएसएस के द्वितीय सरसंघचालक गुरु गोलवलकर जी की जीवनी लिखी है! मेरा साफ मानना है कि आरएसएस जातिरहित हिंदू समाज के लिए कार्य कर रहा है- जिसमें न कोई ब्राहण है और न कोई दलित! सभी केवल हिंदू है! लेकिन इसी हिंदू ने गुजरात में गोरक्षा के नाम पर जो किया, वह पूरी तरह से हिंदुत्व की मूल भावना पर प्रहार था!

हिंदुत्व में सवर्ण है तो दलित भी, इसे ही समझने की जरूरत है!
हिंदुत्व की सर्वप्रथम परिभाषा वीर सावरकर ने दी थी। उन्होंने कहा था- हिन्दू वह व्यक्ति है जो भारत को अपनी पितृभूमि और अपनी पुण्यभूमि दोनों मानता है। इस हिसाब से हिन्दू शब्द के अंदर भारत की सभ्यता, संस्कृति, ऐतिहासिक तथ्य, सामाजिक आचार-विचार एवं पद्धतियाँ- सभी समाहित हैं। हिन्दुत्व शब्द केवल धार्मिक और आध्यात्मिक इतिहास को ही अभिव्यक्त नहीं करता, अपितु हिन्दू के विभिन्न जातिगत सोपान पर मौजूद लोगों के सभी मत-मतांतरण को मानने वाले और उनकी धारणाएं भी इसके अंतर्गत आता है! हिंदू पद्धतियों में जिन्हें समाज ने मृत गाय के चमरे उतारने का कार्य सौंपा, उसे उन्होंने चमार या चर्मकार या दलित कह दिया! मैं अभी यहां इन जातियों की उत्तपत्ति में नहीं जा रहा, क्योंकि एक समय चमार भी चंवरवंशीय क्षत्रिए ही थे, जिनका सामाजिक सोपान सल्तनत व मुगलकालीन भारत ने तय किया था! आज गुजरात का वही चर्मकार समाज मृत गाय की खाल उतारने का कार्य कर रहा था तो कुछ लठैत हिंदुओं ने उसे जमकर पीटा! क्या यही हिंदुत्व है? कुछ मुटठी भर सवर्ण सात जन्मांे तक प्रयास करेंगे, तब भी अपने बल पर समृद्ध हिंदू समाज की अवधारणा को चरितार्थ नहीं कर पाएंगे, जब तक कि अपने समाज के निचले पायदान पर पड़े हिंदुओं के साथ रोटी-बेटी का संबंध नहीं बनाएंगे!

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दलितों को पीटने वाले साफ तौर पर हिंदू समाज को बांटने का खेल खेल रहे हैं!
आपने क्या सोचा, आप दलितों को मारेंगे और देश का प्रधानमंत्री चुप रहेगा? आप हिंदुत्व की सेवा कर रहे हैं या फिर हिंदू समाज को तोड़ रहे हैं? नए-नए मोदी भक्त बने आज की युवा ने तो मोदी के पूरे साहित्य को भी नहीं पढ़ा होगा! वह अकेले मुख्यमंत्री हैं, जिनका हर शुभ कार्य दलित के हाथों संपन्न हुआ है! जब उन्होंने पहली बार गुजरात की सत्ता संभाली थी तो मुख्यमंत्री कार्यालय व आवास का उदघाटन किसी बड़े भाजपा या आरएसएस के नेता से नहीं, दलित की कन्या से कराई थी! वह व्यक्ति रातदिन हिंदू समाज को जातिविहीन बना कर उसे जोड़ने का प्रयास कर रहा है और आप कुछ लठैत उस पर लाठी मार कर हिंदू… हिंदू चिल्ला रहे हैं!

आप क्या समझते हैं 1925 से हिंदू समाज को जोड़ने का कार्य कर रहे आरएसएस की हिंदू के मामले में समझ आपसे कम है? या उस व्यक्ति की हिंदू समाज के बारे में समझ कम है, जिसने हिंदुओं में एक गर्व का एहसास भरा है, खुद को विदेशी मीडिया के समक्ष हिंदू राष्ट्रवादी घोषित किया, योग को अंतरराष्ट्रीय बनाया है, त्रिपुंड लगाकर पूरी दुनिया में घूमता है और अरब देश के शेखों से अरब की धरती पर मंदिर की स्थापना करवाता है! क्या अशोक ने तलवार के बल पर बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया था ? या यही वो तरीका था, जिससे बौद्ध धर्म अंतरराष्ट्रीय बना! आप अपने आप से पूछिए कि क्या इससे पूर्व आप खुद को इतना खुलकर हिंदू कह पाए थे? गुजरात में गोरक्षा कानून आप लेकर आए थे या मोदी लेकर आए थे? हिंदू धर्म के स्वघोषित ठेकेदार, क्या आप यह बताएंगे?

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बीफ निर्यातक देशों में भारत पहले से तीसरे नंबर पर आखिर कैसे आ गया?
यूपीए सरकार के कार्यकाल में बीफ निर्यातक देशों में भारत पहले नंबर पर था, लेकिन मोदी सरकार के पिछले दो साल में गिरकर यह तीसरे पायदान पर आ गया है! क्या यह सब आपकी चिल्लाहट के कारण हुआ है? जी नहीं, यह केवल चरैवेति..चरैवेति.. चुपचाप एक व्यक्ति और उसके सरकार के काम का परिणाम है! यह गो हत्या को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। गो हत्या संरक्षण कानून राज्य का विषय है, इसलिए इसे सीधे केंद्र से पारित कराने की जगह, जिन राज्यों में यह कानून है, वहां सख्ती से इसे पालन कराने का कार्य चल रहा है, जिसके कारण यह परिणाम आया है!

मोदी ने गेंद राज्य सरकारों के पाले में डाला, लेकिन हिंदुओं ने मूर्खतावश सेल्फ गोल कर लिया!
मोदी ने क्या कहा, यही न कि गोरक्षा के नाम पर गोरखधंधा करने वालों का डोजियर राज्य सरकार बनाए! अर्थात यह राज्य का विषय है, लेकिन वामपंथी मीडिया सहित नीतीश, लालू, केजरीवाल, राहुल गांधी, ममता बनर्जी जैसे नेता सवाल मोदी सरकार पर उठा रहे हैं, इसलिए मोदी ने गेंद राज्यों के पाले में डाला है! इतना समझ भी नहीं आया, बस चले आए उस व्यक्ति पर हमला करने, जो पहले से ही न जाने कितनों का हमला झेल रहा है! हिंदुओं ने मूर्खतावश सेल्फ गोल किया, जैसे जयचंद और न जाने ऊन जैसे कितने ही राजाओं ने किया थाा!

वाजपेयी सरकार गिराने के लिए दंगा बना था हथियार और मोदी सरकार को गिराने के लिए गो को बनाया जा रहा है निशाना!
वाजपेयी सरकार को गिराने के लिए कांग्रेस ने गोधराकांड करवाया था! यकीन न हो तो गोधरा पर आए अदालती आदेश में ढूंढ लीजिए, कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के नाम सामने आ जाएंगे! इसी तरह मोदी सरकार को गिराने के लिए यूपी के अखलाक की हत्या से लेकर गुजरात के ऊना में दलितों को पीटने तक का कार्यक्रम विरोधी पार्टियां और मीडिया एक साजिश के तहत चला रही है! मोदी ने तभी तो कहा कि नगरपालिका से लेकर राज्य सरकार तक का विषय आप केंद्र सरकार पर न थोपें! हर जगह गाय के नाम पर दलितों को पीटा जाएगा और मीडिया इसे हिंदू समाज की असहिष्णुता बताते हुए मोदी सरकार पर हमला करेगी! क्या आप यही चाहते हैं?

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याद है भाजपा इसी दलित आरक्षण के नाम पर बिहार का चुनाव हार चुकी है, याद है दिल्ली में गोरक्षा पर बैठे महंत गोपालदास के पक्ष में दिल्ली के अंदर हिंदुवादियों ने मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चलाया था, याद है अखलाक की मौत पर अवार्ड वापसी गैंग सक्रिय हुई थी और यही अब उप्र चुनाव से पूर्व ऊना सहित पूरे देश में होने वाला है! लेकिन हिंदू हैं कि बार-बार हो रही साजिशों को जैसे न पहचानने की कसम खाएं बैठे हैं!

लेकिन 15 साल से शासन संभाल रहे नरेंद्र मोदी कांग्रेस-वाम मीडिया गठजोड़ की इस साजिश से अच्छी तरह से वाकिफ हैं! इसलिए उन्होंने असली और नकली गोरक्षकों में भेद करते हुए अपनी बात कही है और यही बात आरएसएस ने भी दोहराया है! आप नकली नहीं हैं तो आपको क्यों चुभ रही है उनकी बात?

कृपया कुक्कुरों के हाथों में न खेलें, वे यही तो चाहते हैं!
नरेंद्र मोदी ने कहा कि आप मेरे दलित भाईयों को मार नहीं सकते, भले ही मुझे गोली मार दें! हो सकता है आप इसे मोदी का नाटक कहें या समझें, लेकिन उससे पहले आप उनके द्वारा एक दशक पूर्व लिखे ‘सामाजिक समरसता’ पुस्तक को पढ़ लें तो पता चलेगा कि इस व्यक्ति के अंदर पिछड़ों और दलित के लिए कितना दर्द है! वह जानते हैं कि मुटठी भर सवर्ण हिंदू समाज को नहीं बचा सकते! इसके लिए पूरे हिंदू समाज को एक होना होगा, अन्यथा यह समाज बिखर जाएगा! भगवा वस्त्र में किसी दलित को पीटने वाले कभी गोरक्षक नहीं हो सकते हैं! ये गोरक्षा के नाम पर धंधेबाज हैं, जो 2014 में एकजुट हुए हिंदू समाज को तोड़ने के लिए नित्य नए कुकर्म कर रहे हैं ताकि मोदी गिरें और कुक्कुरों की जमात फिर से सत्ता में आ जाए! वामपंथी मीडिया इन कुक्कुरों की जमात का पहरेदार है, क्योंकि उसकी रोटी-बोटी भी पिछले दो साल से बंद है! तुरंत भावनात्मक न हों और ठंडे दिमाग से साजिश के हर पहलू को समझने की कोशिश करें! आप खुद समझ जाएंगे कि कौन सही गोरक्षक हैं और कौन गोरक्षा के नाम पर धंधा चलाने वाले गोरख धंधेबाज!

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