Watch ISD Live Now Listen to ISD Radio Now

पूर्वी पाकिस्‍तानी (अब बंगलादेश ) घुसपैठियों को भारत में बनाए रखने की मंजूरी पंडित नेहरू ने दी थी

अजय कुमार, यथावत के लिए

असम और पूर्वोत्तर के बांग्लादेशी सीमा से लगे राज्यों में घुसपैठ की समस्या कांग्रेस पार्टी की अदूरदर्शिता का नतीजा है, जिसने हमेशा वोट बैंक और तुष्टिकरण की नीति को बढ़ावा दिया। पिछली सदी के साठवें दशक के प्रारंभ में जब असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी. पी.चलिहा ने सीमा पार से घुसपैठ को रोकने की पहल की तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें ऐसा करने से मना किया।

हुआ यूं कि जब बी.पी.चलिहा ने प्रिवेंशन ऑफ इनफिल्टरेशन फ्रॉम पाकिस्तान एक्ट-1964, कानून लाने की घोषणा की तो कांग्रेस पार्टी के 20 मुस्लिम विधानसभा सदस्यों ने सरकार से बाहर जाने की धमकी दे डाली। साथ ही इस कानून को वापस लेने तक का दबाव बनाया। इसके बाद दबाव में आकर चलिहा ने विवादित विधेयक को ठंडे वस्ते में डाल दिया।

इसी तरह जब 10 अप्रैल, 1992 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया ने राज्य में 30 लाख अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम के मौजूद होने की बात कही तो अब्दुल मुहिब मजुमदार नाम के कांग्रेसी कार्यकर्ता के नेतृत्व में ‘मुस्लिम फोरम’ ने मुख्यमंत्री सैकिया को पांच मिनट के भीतर सरकार गिरा देने की धमकी दी।

हालांकि, ‘असम समझौता’ राजीव गांधी सरकार के लिए ऐतिहासिक मौका था। इसके बावजूद बांग्लादेश से गैर कानूनी घुसपैठ रोकने के मसले पर कोई समाधान नहीं निकाल जा सका। पुराने लोगों को स्मरण होगा कि इंदिरा गांधी संसद के माध्यम से आईएमडीटी एक्ट के तहत विदेशी पहचान के संदिग्ध आरोपी व्यक्ति को ट्रिब्यूनल के सामने पेश करने का प्रावधान लेकर आई थीं, लेकिन वह भी व्यावहारिक नहीं बन पाया।

आश्चर्यजनक रूप से 1971 को निर्धारक वर्ष मानकर 1951 से 1971 के बीच बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ कर आए लोगों को भारत का नागरिक मान लिया गया। हालांकि, शीर्ष पदों पर बैठे लोगों ने बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर समय-समय पर चेतावनी दी है। 1996 में आईबी के पूर्व प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल टीवी. राजेश्वर ने अपने लेखों के माध्यम से बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर भारत के तीसरे विभाजन की आशंका जाहिर की थी। ऐसी ही आशंका 1998 में असम के तत्कालीन राज्यपाल एसके. सिन्हा ने भी व्यक्त की थी।

उन्होंने सावधान किया कि असम में हो रहे अवैध घुसपैठ के कारण राज्य के भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्व वाले निचले हिस्से के जिले को खोना पड़ सकता है। चूंकि घुसपैठ से इन जिलों में मुस्लिम आबादी बढ़ती जाएगी और एक दिन ऐसा भी हो सकता है कि इस क्षेत्र को बांग्लादेश में मिलाने की मांग जोर पकड़ने लगे। इस मांग के पीछे तेजी से बढ़ रही अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी ताकतों का भी हाथ होगा। अब जबकि यह माना जाने लगा है कि बांग्लादेश, धर्मनिरपेक्ष रहने की बजाय इस्लामिक राष्ट्र बनने की तरफ बढ़ रहा है तो ऐसी स्थिति में आज भारत पाकिस्तान सीमा से लेकर बांग्लादेश की सीमा तक विषम चुनौतियों का सामना कर रहा है।

Related Article  आपातकाल की बरसी: इंदिरा ने हमेशा ही लोकतंत्र के खिलाफ काम किया!

एक तरफ तो पाकिस्तान अपनी सीमा से समय-समय पर उकसाने की कार्रवाई कर भारतीय सैनिकों से उलझता रहता है। साथ ही घुसपैठ को लगातार बढ़ावा दे रहा है। वहीं भारत विरोधी शक्तियां बांग्लादेश की जमीन का उपयोग कर देश को दूरगामी परिप्रेक्ष्य में गंभीर आघात पहुंचाने की योजना से जुड़ी हुई हैं।

पूर्वोत्तर राज्यों में बांग्लादेशी घुसपैठ के जारी रहने से यह हिस्सा जहां शेष भारत से अलग हो सकता है, वहीं भारत को इस क्षेत्र के विशाल प्राकृतिक संसाधनों से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

वोट बैंक की राजनीति के कारण ही बांग्लादेशी घुसपैठ का आज तक समाधान नहीं हो पाया है। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च स्टडी के आंकड़े भी इसे भली-भांति बयां करते हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कैसे भारतीय धर्मावलंबी निचले असम के इन हिस्सों से पलायन करने को मजबूर हैं। यह स्थिति राज्य के अन्य हिस्सों में भी जारी है। यहां तक कि बांग्लादेश सीमा से सटा भारत का पूर्वी हिस्सा 46 प्रतिशत मुस्लिम बाहुल्य वाला हो चुका है।

अररिया (41), किशनगंज (68), कटिहार (43), पूर्णियां (37), साहिबगंज (31) आदि कई जिलों को बतौर उदाहरण देखा-समझा जा सकता है, जो अब बांग्लादेशी मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। ऊपर दिए गए आंकड़े 2001 के जनगणना पर आधारित है। चूंकि 2011 जनगणना के आंकड़े इतने भयावह हैं कि पूर्ववर्ती सरकार इसे जारी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।

केंद्र और राज्य सरकारों की नाकामी ही रही है, जिसके कारण असम के बांग्लादेशी सीमा से सटे जिलों में अक्सर अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों की तादाद बढ़ती रही। बोडो और बांग्लादेशी मुस्लिमों के बीच हिंसात्मक संघर्ष का भी यह कारण बना। बोडो जनजातियों में यह आशंका घर कर गई कि कहीं वे अपनी जमीन न खो दें।

दरअसल, बांग्लादेशी घुसपैठ कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और अदूरर्दिशता का प्रतिफल है, जो यह मानने से इनकार करती रही है कि घुसपैठी बांग्लादेशी हैं और यह हिन्दू-मुस्लिम से जुड़ा मुद्दा है।

असम के सांस्कृतिककर्मी व गायक भूपेन हजारिका ने भी एक गीत के माध्यम से इस मसले पर अपनी पीड़ा को व्यक्त किया था। उनके गाए हुए एक गीत का भाव था – “असमी अपने और अपनी भूमि को बचायं, अन्यथा असम में ही वे बेगाने हो जाएंगे।”

27 जुलाई, 2005 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के तीन जजों की खंडपीठ ने आईएमडीटी एक्ट को निरस्त कर दिया। इसके बदले केंद्र और राज्य सरकार को फॉरेन ट्रिब्यूनल आर्डर- 1964 के तहत ट्रिब्यूनल स्थापित करने और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित करने का आदेश दिया था। न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद-355 का हवाला देते हुए यह भी ध्यान दिलाया था कि किस तरह असम में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ राज्य की आंतरिक अशांति एवं बाह्य चिंता का सबब बन चुकी है। इस स्थिति में केंद्र सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह राज्य के हितों की रक्षा करे।

Related Article  आपातकाल का धूमकेतु राजनारायण!

सच यह है कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का स्तर इस कदर नीचे आ गया कि अक्सर कहा जाने लगा था कि सरकार बहुसंख्यक हिन्दू जनता के प्रति घृणा को बढ़ावा दे रही है। ‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारक विधेयक-2011’ इसी दिशा में बढ़ रहा प्रयास था।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई और न्यायाधीश आर एफ नरीमन की बैंच ने असम सरकार के जूनियर अफसर की ओर से बांग्लादेशी घुसपैठ पर आधे-अधूरे एफिडेविट देने पर सख्त एतराज जताया। यह एफिडेविट 1 अप्रैल, 2015 को सर्वोच्च न्यायालय को दिया गया था, जिसमें न्यायालय के 17 दिसम्बर, 2014 के आदेश को लागू करने की बात कही गई थी।

दरअसल, यह घिसा पीटा ढर्रा कांग्रेस सरकार की पुरानी तरकीब रही है। अब तो यहां तक कहा जाने लगा है की बांग्लादेशी सीमा से सटे राज्यों की तकदीर अवैध तरीके से बांग्लादेश से भारत आए मुसलमान ही तय कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता इससे भी समझी जा सकती है कि असम के 40 विधानसभा सीट और पश्चिम बंगाल में कुल 294 में से 53 विधानसभा की सीटें बांग्लादेशी मुस्लिम बाहुल्य वाली हैं।

हाल ही में भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या को स्वीकार किया है। इससे इतर कांग्रेस की सरकार घुसपैठियों को वोट बैंक के रूप में ही देखती रही। अब तो प्रतीत हो रहा है कि कुछेक राज्यों में घुसपैठिए ही सरकार का भविष्य निर्धारित करेंगे।

स्मरण होगा कि 15 जुलाई, 2004 को भारत के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने राज्यसभा में जानकारी दी थी कि 31 दिसम्बर, 2001 तक के आंकड़े के अनुसार 1,20,53,950 बांग्लादेशी अवैध तरीके से भारत के 17 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में रह रहे हैं। उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह गुवाहाटी दौरे पर थे। कांग्रेस के नेताओं ने मनमोहन सिंह को अपने मंत्री के कथन पर खेद व्यक्त करने तक की सलाह दे डाली थी। परिणामस्वरूप मनमोहन सिंह ने मंत्री की जानकारी को अप्रामाणिक बताया था। फिर एक सप्ताह बाद ही मंत्री जायसवाल ने संसद को दूसरी जानकारी दी। उन्होंने अपने पूर्व की जानकारी को अविश्वसनीय बताया और इसे कानो-सुनी कहा।

हालांकि, पूर्व सीबीआई प्रमुख जोगिन्दर सिंह के अनुसार अब तक पांच करोड़ से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठ कर भारत आ चुके हैं। खबर है कि बांग्लादेशी कट्टरपंथी और चरमपंथी एक ‘वृहोत बांग्लादेश’ की योजना को अंजाम देने की रणनीति में जुटे हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, असम, बिहार और झारखंड को शामिल करने की बात है।

Related Article  नेहरू ने सुरक्षा परिषद में ही नहीं, चीन के परमाणु शक्ति संपन्न बनने में भी की थी मदद!

इतिहास गवाह है कि पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी ऩे अपने-अपने समय मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए जो प्रयास किए, वह सिलसिला आगे भी चलता रहा। कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय गठित राजेंद्र सच्चर समिति ने सांप्रदायिक आधार पर जनगणना का प्रस्ताव रखा, जिसमें रक्षा क्षेत्र यानी सेना में भी मुस्लिमों की गिनती की बात उठाई गई। इसे तत्कालीन थल सेना प्रमुख जे.जे.सिंह ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इससे सेना के मनोबल और संस्थागत ढांचे पर विपरीत असर पड़ेगा।

इससे यह भी जाहिर हो गया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में यह पार्टी वोट बैंक की राजनीति करने में किस हद तक नीचे जा सकती है।

सच यह है कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का स्तर इस कदर नीचे आ गया कि अक्सर कहा जाने लगा था कि सरकार बहुसंख्यक हिन्दू जनता के प्रति घृणा को बढ़ावा दे रही है।

‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारक विधेयक-2011’ इसी दिशा में बढ़ रहा प्रयास था। इस बिल को ड्राफ्ट करने वाला व्यक्ति सोनिया गांधी का करीबी था, जिसकी नजर में सांप्रदायिक दंगों के लिए हिन्दू जिम्मेवार होंगे और इस स्थिति में बहुसंख्यक समुदाय पर ही आरोप लगेगा। यहां तक कि सांप्रदायिक वारदात के समय तैनात कोई भी हिन्दू अधिकारी बिना संलिप्तता के भी अभियुक्त ठहराया जा सकेगा।

दरअसल, भारत में वंशवादी राजनीति ने अपने स्वार्थ के लिए कई विषैले बीज को बोने का काम किया है। छद्म धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण, वोट बैंक की राजनीति, राष्ट्र के पवित्र धार्मिक चिन्हों एवं मान्यताओं का माखौल उड़ाना आदि इसी रणनीति का हिस्सा रहा है। इनकी कोशिश भारत को आंतरिक तौर पर कमजोर करने के साथ-साथ देश पर घातक हमले की जमीन तैयार करने की है।

अब भारत की जनता नरेन्द्र मोदी जैसे सामर्थ्य, दूरदर्शी एवं कुशल प्रशासक के नेतृत्व में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी, कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण राजनीति से अलग हटकर बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या से जूझ रहे भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को अक्षुण्ण रखने में सफल होंगे? यह भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही तय करना है कि भारतीय जनमानस की उम्मीदों को वे किस तरह पूरा करते हैं!.

(लेखक भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं।)

नोट: यह लेख 15 जुलाई 2015 को ‘यथावत’ पत्रिका में छपा था। इसे वहीं से साभार लिया गया है।

Web Title: india-bangladesh border problem created by pt nehru

Keywords: india-bangladesh border dispute| Jawaharlal Nehru| India-Bangladesh relations| India’s first Prime Minister Jawahar Lal Nehru| भारत बंगलादेश बॉर्डर समस्‍या| भारत बंगलादेश संबंध| बैंक की राजनीति| मुस्लिम तुष्टिकरण|

Join our Telegram Community to ask questions and get latest news updates
आदरणीय पाठकगण,

ज्ञान अनमोल हैं, परंतु उसे आप तक पहुंचाने में लगने वाले समय, शोध, संसाधन और श्रम (S4) का मू्ल्य है। आप मात्र 100₹/माह Subscription Fee देकर इस ज्ञान-यज्ञ में भागीदार बन सकते हैं! धन्यवाद!  

Select Subscription Plan

OR

Make One-time Subscription Payment

Select Subscription Plan

OR

Make One-time Subscription Payment

Other Amount: USD



Bank Details:
KAPOT MEDIA NETWORK LLP
HDFC Current A/C- 07082000002469 & IFSC: HDFC0000708  
Branch: GR.FL, DCM Building 16, Barakhamba Road, New Delhi- 110001
SWIFT CODE (BIC) : HDFCINBB
Paytm/UPI/Google Pay/ पे / Pay Zap/AmazonPay के लिए - 9312665127
WhatsApp के लिए मोबाइल नं- 9540911078

You may also like...

ताजा खबर