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पतंजलि आयुर्वेद ने लांच की कोरोना उपचार के लिये आयुर्वेदिक दवा!

पतंजलि आयुर्वेद ने मंगलवार को कोरोना की पहली आयुर्वेदिक दवाई ‘कोरोनील व स्वासरी’ लांच की. बाबा रामदेव के अनुसार यह दवा कोरोना के उपचार के लिये पहली आयुर्वेदिक दवा है . उन्होने यह भी कहा कि कोरोना मरीज़ों पर बाकायदा क्लिनिकल ट्रायल या रोग विषयक प्रयोग करने के बाद यह पता चला कि कोरोना को ठीक करने में इस दवा ने 100 प्रतिशत नतीजे दिये.

बाबा रामदेव के अनुसार दिल्ली, अहमदाबाद सहित अन्य भारतीयों शहरों के अस्पतालों में कोरोना मरीज़ों पर इस दवाई के ट्राइल किये गये और पूरे प्रोटोकांल का पालन करने के पश्चात ही इस दवाई को लांन्च किया गया. उन्होने कहा कि जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आंफ मेडिकल साइंसेज़ की सांझेदारी में 95 कोरोना मरीज़ों पर दवा का क्लिनिकल ट्राइल किया गया. और तीन दिन के अंदर ही 69 प्रतिशत मरीज़ ठीक हो गये यानि उनकी कोरोना रिपोर्ट पांजिटिव से नेगेटीव मे बदल गयी और 7 दिनों के भीतर में 100 प्रतिशत मरीज़ों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटीव में बदल गयी.

बाबा रामदेव की दवाई अभी मार्केट तक पहुंच भी नहीं पायी है और उससे पहले ही उनके विरोध में लेफ्ट लिबरल की गैंगबाज़ी शुरू हो गयी है. दवा की लांच का समाचार टेलीविज़िन पर आते ही फेसबुक आदि सोशल मीडिया पर प्रहारों की झड़ी लग गयी. बाबा रामदेव की सारी दवाइयां फर्ज़ी हैं से लेकर बाबा का आयुर्वैदिक दवाइयों का कारोबार फर्ज़ी है और उनकी द्वाइयों में कीड़े तक पाये गये हैं, इस प्रकार की बेसिरपैर की अफवाहें सोशल मीडिया पर देखने और पढ़्ने को मिलीं. जबकि अभी दवाई बाज़ार तक पहुंची भी नही है. तो ये सब क्या एक सोची समझी अंतराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा नहीं लगता? जो लोग हिंदू मुस्लिम के नाम पर बाबा रामदेव के खिलाफ हैं, वह तो इस साज़िश में प्यादे मात्र हैं. उन्हे तो शायद मालूम भी नहीं कि वो किसके हाथों इस्तेमाल हो रहे हैं. लेकिन ये जो बड़ी बड़ी फार्मा कंपनियों में कोरोना के उपचार के लिये दवाइयों और वैक्सीन बनाने के लिये होड‌‌ लगी हुई है, क्या वे कभी भी चाहेंगी कि एक आयुर्वेदिक दवाई इसके इलाज के लिये मार्केट में उतर जाये? और वह भी ऐसी दवाई जिसकी कीमत उनकी दवाइयों से 10 गुना कम हो. तो ज़ाहिर सी बात कि फिर बाबा रामदेव और उनकी कंपनी पतंजलि के विरुद्ध योजनगत प्रोपोगैंडा तो होगा ही. विश्व स्वास्थ्य संगठ्न का झुकाव भी कोरोना वायरस के मामले में एलोपैथी और बिग फार्मा की तरफ आ रहा है. तो वह भी नहीं चाहता कि आयुर्वेदिक दवाइयां मार्केट में उतरें.

अब सरकार के आयुष मंत्रालय ने पतंजलि से क्लिनिकल ट्रायल्स के प्रमाण वगैरह मांगे हैं. और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने कहा है कि सभी प्रमाण देखने परखने के बाद ही दवाई को मार्केट मे उतारने के विषय में कोई निर्णय लिया जायेगा. जो कि उचित भी जान पड़्ता है. लेकिन ये अपने आप में ही हैरानी की बाद है कि जब पतंजलि कंपनी के अनुसार सरकार से सारी अनुमतियां ली जा चुकी थीं, तो सरकार इस विषय में फिर से सब कुछ क्यों देखना चाह्ती है? पतंजलि के सी ई ओ आचार्य बालकृष्ण ने इस विषय पर ट्वीट भी किया है कि सरकार ने लांच के बाद जो प्रमाण मांगे हैं, वह सभी सरकार को अब सौंप दिये गये हैं.

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Rati Agnihotri

Rati Agnihotri

रति अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में कवितायें लिखती हैं. इनका अंग्रेज़ी का पहला कविता संग्रह ‘ द सनसेट सोनाटा’साहित्य अकादमी से प्रकाशित हुआ है. रति की हिंदी कवितायें पाखी, संवदिया, परिकथा, रेतपथ, युद्धरत आम आदमी, हमारा भारत आदि साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. रति दिल्ली में ‘ मूनवीवर्स – चांद के जुलाहे’ के नाम से एक पोएट्री ग्रुप चलाती हैं जहां कविता को संगीत, चित्रकला आदि विभिन्न विधाओं से जोड़ा जाता है और कविता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार भी होता है. रति चीन के शिनुआ न्यूज़ एजेंसी के नई दिल्ली ब्यूरो में बतौर टी वी न्यूज़ रिपोर्टर कार्य कर चुकी हैं. रति आजकल स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. रति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कांलेज से अंग्रेज़ी विशेष में बी ए आनर्स किया है और इंग्लैंड के लीड्स विश्वविद्यालय से अंतराष्ट्रीय पत्रकारिता में एम ए किया है.

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