कविता- तय कर लो, जाना किधर है…

तय कर लो!
जाना किधर है
एक तरफ
काँटों का रास्ता पर
तरफ दूसरी उजाले
की चमक है
सोच लो चलना किधर है
एक तरफ
नरम घास सा रास्ता
तरफ दूसरी अँधेरे
का असर है
पसंद तुम्हारी
देगा तुम्हे
रास्ता नया
या बरबादियो
का मंज़र
एक तरफ
तरफ एक पल
का दर्द मगर
उम्र भर का
सुख है
तो तरफ दूसरी
कुछ पलों
की खुशिया
तरफ दूसरी
तमाम जिंदगी
भर का ग़म है

URL: India Speaks Daily hindi poem by Ravi Kumar Bhadra

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