तो क्या भारतीय मीडिया ने एजेंडे के तहत भारत को कश्मीर से अलग करने की साजिश रची ?

Pushker Awasthi. ‘भारत में कश्मीर जल रहा है’,’लगातार 50वें दिन कश्मीर में कर्फ्यू’,’मोदी की सरकार की कश्मीर की नीति असफल’,’केंद्र की सरकार ने कश्मीरियों को जोड़ने की जगह तोड़ दिया है,’कश्मीर का जन जन मांगे आज़ादी’! यही सब तो, हम लोग रोज टीवी पर अखबारों पर देखते और पढ़ते है? अब उसी में, मखमल में टाट के पैबन्द जैसा, जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री का बयान आ जाता है की कश्मीर की 95% जनता, भारत के साथ है और विकास चाहती है और केवल 5% ही लोग ऐसे है जिन्होंने राज्य में अराजकता और अलगावाद का माहौल बना रखा है।

यह क्या है? यदि कश्मीर के केवल 5% लोग ही इस अराजकता में शामिल है तो फिर 50 दिन से कर्फ्यू क्यों है? मुझको यह बात समझ में बिलकुल भी नही आयी और यही लगा की महबूबा मुफ़्ती ने एक राजनैतिक बयान दे कर मूल बात से मुँह छिपा लिया है। मैंने जब इसका गम्भीरता से अध्ययन किया तो पाया, दोनों ही बाते सही है। महबूबा मुफ़्ती ने 5% का बयान दे कर सत्य से मुँह नही छिपाया था बल्कि भारत की मीडिया ने,या तो एजेंडे के तहत या फिर टीआरपी के लिए भारत की जनता से कुछ सत्य छिपाया है। आज इसी को लेकर मैंने एक लेख पढ़ा जिसमे कुछ डाटा दिए गए थे। उसी डाटा को मैं यहां दे रहा हूँ ताकि आप यह समझ सके की कश्मीर और उसकी कश्मीरियत का असली सच क्या है।

भारत की मिडिया ने भी इस पर बात न करके, शेष भारत को बरगलाया है और एक एजेंडे के तहत, कश्मीर को भारत से अलग करने की एक कोशिश की है! इन बरखा दत्त, राजदीप, सगिरका, राणा अयूब, रवीश, शेखर गुप्ता,राहुल कंवल,अरुण पूरी ऐसे लोगो ने भारत की जनता को यह नही बताया की जम्मू कश्मीर के 22 जिलों में से सिर्फ 5 जिलों में यह अराजकता है। श्रीनगर, अनंतनाग, बरमुल्लाह, कुलगाम, पुलवामा शहरों को छोड़ कर, शेष 17 जिलों की जनता पूरी तरह से भारतीयता का वरण किये हुए है। इन लोगो ने यह नही बताया है की इन 5 जिलों की जनसंख्या, पुरे जम्मू कश्मीर राज्य की जनसँख्या की 15% से भी कम है। इन 15% में ही वह 5% लोग है जो पाकिस्तान और इस्लाम के हाथों खेल रहे है। इन लोगों ने यह नही बताया की 85% भारत समर्थक जनता में 14 विभिन्न धर्मों और जातीय समूह के लोग है जिसमे, शिया मुस्लिम,डोगरा, कश्मीरी पंडित, सिख,बौद्ध, गुज्जर, बकरवाल, पहाड़ी, बाल्टिस, ईसाई इत्यादि है।

इन लोगो ने यह नही बताया की जम्मू कश्मीर की कुल जनसंख्या में 69% लोग ही मुस्लिम है और उसमें भी शिया मुस्लिम 12%, गुज्जर मुस्लिम 14%, पहाड़ी मुस्लिम 8% है जो पूरी तरह से अलगावादियों के विरुद्ध है। इन लोगो ने यह नही बताया की जिस कश्मीरियत की बात की जाती है, उस कश्मीरी भाषा को जम्मू कश्मीर की 1.25 करोड़ जनता में से ज्यादातर लोग नही बोलते है। लोग डोगरी, गुज्जरी, पंजाबी, लद्दाखी और पहाड़ी बोलते है। इन लोगो ने यह नही बताया की जम्मू कश्मीर के 85% इलाके, मुस्लिम बाहुल्य नही है और जम्मू कश्मीर का कश्मीरी हिस्सा केवल 15% है बाकी 26% जम्मू है और 59% लद्दाख है।

हकीकत यह है कि कश्मीर में कश्मीरी बोलने वालों के इस छोटे समुदाय ने कश्मीर के तंत्र और हर एक क्षेत्र पर पिछले कई दशकों से कब्ज़ा जमा रक्खा है। वह चाहे व्यपार हो, चाहे खेती या फिर नौकरशाही, इन्ही लोगो का आधिपत्य है। यही लोग हुर्रियत में है, यही लोग आतंकवादी संघठनो में है और यही लोग राजनैतिक दल नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी में है। यही लोग दिल्ली की मीडिया में घुसे है और यही लोग दिल्ली के अभिजात वर्ग में कश्मीर के बुद्धिजीवी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते है।

यह लोग उन्ही 5 जिलों से आते है जहाँ पथराव की घटनाएं, भारत विरोधी प्रदर्शन और पाकिस्तान समर्थक नारे लगते है। शेष 17 जिले पूर्णतः शांत है, यहां तक की कश्मीर के पूँछ और कारगिल इलाके, जहाँ की मुस्लिम जनसँख्या 90% है, वहां भी आज तक, भारत विरोधी कोई भी वारदात नही हुयी है।

आज से करीब 10 वर्ष पहले एक कश्मीरी ने मुझे बताया था की कश्मीर सिर्फ 600 परिवारों की मिल्कियत है और इन्ही परिवारों ने आज़ादी के बाद से ही कश्मीर को खाया और चूसा है!

Courtesy: Pushker Awasthi FaceBook Wall

आदरणीय पाठकगण,

News Subscription मॉडल के तहत नीचे दिए खाते में हर महीने (स्वतः याद रखते हुए) नियमित रूप से 100 Rs. या अधिक डाल कर India Speaks Daily के साहसिक, सत्य और राष्ट्र हितैषी पत्रकारिता अभियान का हिस्सा बनें। धन्यवाद!  

For International members, send PayPal payment to [email protected] or click below

Bank Details:
KAPOT MEDIA NETWORK LLP
HDFC Current A/C- 07082000002469 & IFSC: HDFC0000708  
Branch: GR.FL, DCM Building 16, Barakhamba Road, New Delhi- 110001
SWIFT CODE (BIC) : HDFCINBB
Paytm/UPI/ WhatsApp के लिए मोबाइल नं- 9312665127

You may also like...

ताजा खबर