अर्णब गोस्वामी के प्रति नफरत से अंधी बरखा दत्त ने कहा उसे गिरफ्तार करो !

जिसने कभी पत्रकारिता की ही नहीं हो, जो अपना हित साधने के लिए एक परिवार की चाकरी कर पत्रकारिता करने का बस स्वांग रचा हो, इसके बाद भी एक मीडिया संगठन में उसकी तूती बोलती रही हो उसका अर्णब गोस्वामी जैसे निर्भीक पत्रकार के प्रति इतनी नफरत तो होगी ही। मैं बात देश की सेना को संकट में लाने वाली और हाल ही में कपिल सिब्बल के लगे पैसे से हार्वेस्ट न्यूज चैनल की प्रमुख एंकर बरखा दत्त की बात कर रहा हूं। वह अर्णब गोस्वामी के प्रति नफरत में इतनी अंधी हो गई है कि पराकांतर से उन्हें गिरफ्तार करने तक को कहा है। यह नफरत यूंही नहीं है। एक समय था जब एनडीटीवी जैसे मीडिया हाउस में वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्त की तूती बोलती थी। लेकिन अर्णब गोस्वामी के आने के बाद इनलोगों का पत्रकारिता से पटाक्षेप हो गया है। क्योंकि अर्णब गोस्वामी इन लोगों जैसे किसी परिवार की चाकरी नहीं बल्कि वास्तविक पत्रकारिता कर रहे हैं। मालूम हो कि शशि थरूर की तीसरी पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध हत्या के मामले को उठाने को लेकर अर्णब गोस्वामी और उनके न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी के खिलाफ एफआईआर करने का आदेश दिया गया है। अपनी पत्नी की हत्या मामले में फंसे शशि थरूर ने गोस्वामी और रिपब्लिक के खिलाफ दस्तावेज चोरी करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर करने की मांग पर कोर्ट ने यह निर्देश दिया है।

बरखा दत्त जैसी पत्रकार अर्णब गोस्वामी के खिलाफ शशि थरूर जैसे संदिग्ध नेता द्वारा कार्रवाई करने से काफी उत्साहित है। उसने अपने ट्वीट के माध्यम से गोस्वामी को गिरफ्तार करने तक की बात कह दी है। जिस बरखा दत्त पर देश की सेना पर संकट खड़ा कर पाकिस्तानी में बैठे आतंकवादियों को अनायास सहयोग करने का आरोप है उसने अर्णब गोस्वामी पर पत्रकारों की छवि धूमिल करने से लेकर उन्हें गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ केस चलाने की मांग करने का आरोप लगाया है। बरखा दत्त ने एक प्रकार से अर्णब गोस्वामी के खिलाफ शशि थरूर की कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने ने लिखा है कि इस प्रकार के खतरनाक, सांप्रदायिक तथा नीच रिपोर्टिंग करने वाले अर्णब गोस्वामी को आपराधिक मामला सामना करना ही चाहिए।

बरखा दत्त ही क्यों राजदीप और प्रणय राय जैसे बड़े स्वधन्यमान पत्रकार भी गोस्वामी के खिलाफ हैं। इसका सबूत स्वयं राजदीप सरदेसाई की पत्नी और पत्रकार सागरिका घोष ने अपने ट्वीट के माध्यम से दे दिया है। उन्होंने ज्योति मल्होत्रा के एक ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा है कि अर्णब गोस्वामी ने पूरी टीवी न्यूज को बर्बाद कर के रख दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिख ाहै कि अर्णब गोस्वामी ने राजदीप सरदेसाई तथा प्रणय राय से ईर्ष्या करने की वजह से पूरी टीवी न्यूज को ही बर्बाद कर दिया है।

बरखा दत्त हो या सागरिका घोष सभी ने अर्णब गोस्वामी के खिलाफ बोलकर अच्छी पत्रकारिता का सबूत नहीं दिया है बल्कि चाकरी के बदले अपने आकाओं का हुकूम ही बजाया है।

बरखा दत्त के अर्णब गोस्वामी के खिलाफ किए गए ट्वीट का जवाब देते हुए एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका सुभ्राष्था ने लिखा है कि जिस शशि थरूर की पत्नी की हत्या पर रिपोर्टिंग करने के लिए अर्णब गोस्वामी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है, उन्हीं की पार्टी यानि कांग्रेस का हार्वेस्ट टीवी में पूरा पैसा लगा हुआ है। इस संदर्भ में बरखा दत्त ने जो ट्वीट किया है वह उसकी विद्रुपता के साथ उसकी असुरक्षा को ही दर्शाता है। अपने ट्वीट के माध्यम से बरखा दत्त को सांप्रदायिकता पर आईना दिखाते हुए लिखा है कि असली सांप्रदायिक तो वे हैं जिन्होंने कश्मीर में कश्मीरी पंडितों पर हुए अन्याय की खबरों को ही को दबा दिया है।

उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में भी बरखा दत्त को सांप्रदायिकता और धर्मनिर्पेक्षता का पाठ पढ़ाया है। बरखा दत्त अर्णब का नहीं बल्कि मृणाल पांडेय जैसी स्वघोषित धर्मनिर्पेक्ष प्रचारक की जयगान करेंगी। क्योंकि जिस नेशनल हेराल्ड में मृणाल पांडेय चाकरी करती हैं और जिस हार्वेस्ट टीवी बरखा दत्त चाकरी करती हैं इन दोनों मीडिया संस्थानों के एक ही ‘मालिक’ है। कहने का मतलब साफ है कि दिखाने के लिए ये दोनों काम भले ही अलग संस्थान के लिए कर रहे हों लेकिन उद्देश्य एक ही है कि अपने ‘मालिक’ को बचाना और आगे बढ़ाना है। सुभ्राष्था ने लिखा है कि पिछले दिनों मृणाल पांडेय ने जो ट्वीट किया था दरअसल वही नस्लवादी, नीच तथा सांप्रदायिकता है। लेकिन बरखा दत्त से इससे अधिक की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

अर्णब गोस्वामी के खिलाफ बरखा दत्त के ट्वीट पर जवाब देते हुुए इंडिया स्पीक्स डेली के संस्थापक संपादक संदीप देव ने लिखा है कि बरखा दत्त असल में अर्णब गोस्वामी की सफलता से हताशा महसूस कर रही है। शायद इसलिए वह उनके प्रति नफरत की पराकाष्ठा पार कर चुकी है।

जो बरखा दत्त गोस्वामी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चलने से खुश होकर उन पर सांप्रदायिक पत्रकारिता करने का आरोप लगाया है, उसे अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। क्या देश की सेना को संकट में डालकर अपने पड़ोसी दुश्मन देश पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को मदद पहुंचाना पत्रकारिता है? कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुए अन्याय की खबर को दबा देना पत्रकारिता है? अपने हित के लिए जिंगदी भर गांधी परिवार की चाकरी और चापलूसी करना पत्रकारिता है? कठुआ कांड के तहत देश और हिंदुओं को बदनाम करने के लिए साजिश के तहत अभियान चलाना पत्रकारिता है?

ध्यान रहे कि शशि थरूर ने दस्तावेज चुराने की शिकायत कर रिपब्लिक टीवी या अर्णब गोस्वामी पर नहीं बल्कि पूरी पत्रकारिता पर चोरी की तोहमत लगाने का दुस्साहस किया है। बरखा दत्त सही में पत्रकारिता की होती तो आज शशि थरूर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आवाज उठाती, लेकिन बिकाऊ पत्रकार की आवाज सुनी नहीं जाती उसे आदेश दिया जाता है। बरखा दत्त अपने आकाओं का उसी आदेश का पालन करने में जुट गई है।

URL : Instead of raising voice against Shashi Tharoor, Barkha ran on Arnab!

Keywords: congress, fakenews, Barkha, Arnab

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