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जय श्रीराम लिखे मॉस्क बांटने से ममता सरकार को कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा!

रास बिहारी. जय श्रीराम के जयकारे चिढ़ने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कातिलाना हमलों के बीच खुद को सबसे बड़ा हिन्दू साबित करने में जुटी है।

राज्य में वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा पर रोक लगाने वाली ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इस बार आयोजनों को लेकर खासी सक्रियता दिखाई। भाजपा का मुकाबला करने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने सरस्वती पूजा मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

ममता बनर्जी मुसलमान वोटरों को एकजुट करने के बाद अब हिन्दू मतदाताओं को लुभाने के अब हिन्दुत्व का लबादा भी ओढ़ना चाहती है। मुस्लिम तुष्टीकरण की सबसे बड़ी हिमायती ममता बनर्जी को भाजपा का मुकाबला करने के लिए हिन्दू मतदाताओं के खिसकने का पूरा डर सता रहा है।

हिन्दुत्व की छवि दिखाने के लिए जय श्रीराम का नारे जवाब ममता बनर्जी ने जय सियाराम के जयकारे से दिया। मस्जिद के इमामों को धन देने के बाद ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा के लिए समितियों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की थी।

आठ हजार पुरोहितों को एक हजार रुपये देने की घोषणा की गई। हिन्दुओं को लुभाने के लिए कुछ और योजनाओं की घोषणा भी की गई। एक तरफ ममता बनर्जी खुद को सबसे बड़ी हिन्दू साबित करने में जुटी है

तो दूसरी तरफ उनके कार्यकर्ता जय श्रीराम का जयकारा लगाने पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को खात्मा करने में लगे हैं। भाजपा नेताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। 2020 में ही 35 से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ताओं हत्या की गई और हजारों पर हमले किए गए।

बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता घायल हुए। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की रैली में कहा था कि बंगाल के लोगों को ममता की अपेक्षा थी, लेकिन निर्ममता मिली। 10 साल के शासनकाल में यह साफ हो गया कि ये कोई परिवर्तन नहीं बल्कि लेफ्ट का पुनर्जीवन ही है।

बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी बार-बार कह रहे हैं कि राज्य में डर का माहौल डराने वाला है। बंगाल में डर का माहौल ऐसा है कि डर के बारे में बात करने से भी लोग डरते हैं।

बंगाल में लगातार बिगड़ती जा रही कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में लोकतांत्रिक अधिकार खत्म हो गए हैं। राज्यपाल ने लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए ममता सरकार सफाया जरुरी बताया है।

भारत के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी राज्यपाल ने सीधे तौर पर अपने राज्य की सरकार में बदलाव की जरुरत बताई है। तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि जिस तरह से मेरे प्रांत में हिंसा हो रही है, मुझे यहां बैठे-बैठे अजीब लग रहा है।

हम उस प्रांत से आते हैं जहां से रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस आते हैं। हम सभी जन्मभूमि के लिए ही हैं। इसलिए अब मुझसे ये देखा नहीं जा रहा है।

बंगाल में अत्याचार बढ़ रहा है। मेरी आत्मा की आवाज ये कह रही है कि यहां बैठे-बैठे चुपचाप रहो और कुछ नहीं कर सकते हो तो यहां से इस्तीफा दे दो। मैं बंगाल के लिए आगे काम करता रहूंगा।

बंगाल में भारी राजनीतिक उठापटक के बीच विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा बढ़ने लगी है। भाजपा के साथ वाम मोर्चा और कांग्रेस के नेता भी अपने-अपने कार्यकर्ताओं पर हमलों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

7 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हल्दिया में सभा से पहले नंदकुमार में उनके फ्लेक्स और पोस्टर को फाड़ दिए गए। प्रधानमंत्री मोदी की सभा में शामिल होने के लिए जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हमले किए।

हमले में पांच भाजपा कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की 7 फरवरी को बंगाल की यात्रा के बाद से भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं।

9 फरवरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के पहुंचने से पहले लालगढ़ के झिटका भाजपा कार्यकर्ताओं की बस पर गोलीबारी की गई। 10 फरवरी को हुगली के सेवड़ाफुल्ली में जय श्रीराम का लिखा मॉस्क बांट रहे 19 भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

इससे पहले 7 फरवरी को चांपदानी में भी जय श्रीराम लिखे मॉस्क बांटने पर विवाद हुआ था। पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति मॉस्क बांटे जा रहे थे। पुलिस का कहना था कि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती थी। 14 फरवरी 11 फरवरी को दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर में घायल भाजपा कार्यकर्ता पीयूष कांति प्रमाणिक की मौत हो गई।

1 जनवरी को प्रमाणिक भोलारहाट से अगवा करके तृणमूल कांग्रेस के लोगों ने बुरी तरह पीटा था। हत्या के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव किया था। 12 फरवरी को बीरभूम जिले में परिवर्तन यात्रा से लौट रहे भाजपा कार्यकर्ताओं को घेरकर पीटा गया।

कुछ कार्यकर्ताओं क घरों तोड़फोड़ की गई। सैंथिया इलाके में भाजपा के दो कार्यकर्ताओं संतू डोम और माखन डोम पर गर्म पानी डाल दिया गया। दोनों को झुलसी हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

13 फरवरी को कोलकाता से सटे उत्तर 24 परगना जिले के बासंती हाइवे पर भाजपा नेता बाबू मास्टर की गाड़ी रोककर उन पर बम व गोलियों से हमला किया गया। हमले में घायल भाजपा नेता और उनके ड्राइवर को रक्त रंजित हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

उत्तर 24 परगना के मीनाखां इलाके में प्रभावशाली नेता बाबू मास्टर पिछले साल दिसंबर में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। 13 फरवरी को ही उत्तर 24 परगना के बारासात में सड़क किनारे खड़ी भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार की कार को उड़ा दिया।

16 फरवरी को कूचबिहार जिले के बक्शीरहाट में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के पोस्टर फाड़ने का विरोध करने पर पार्टी कार्यकर्ता बादल शाह, उनकी पत्नी और बेटे पर हमला किया गया।

11 फरवरी को वामदलों के राज्य सचिवालय नवान्न अभियान के दौरान पुलिस के साथ झड़प में गंभीर रूप से घायल हुए डीवाइएफआइ कार्यकर्ता मैदुल इस्लाम ने इलाज के दौरान 14 फरवरी को मौत हो गई।

इसके बाद वामो कार्यकर्ता एक बार फिर कोलकाता की सड़कों पर उतर आए और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार मृत डीवाइएफआइ कार्यकर्ता के परिवार की आर्थिक मदद व एक सदस्य को नौकरी प्रदान करने के लिए तैयार है।

डीवाइएफआइ कार्यकर्ता की मौत से आक्रोशित वामो समर्थकों ने तालतल्ला इलाके में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वे एक रेस्तरां में घुस गए। मालदा में माकपा के एक नेता की अगवा करके हत्या कर दी गई।

तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई के कारण पार्टी के कार्यकर्ता एक-दूसरे को काटने में लगे हैं। 16 फरवरी को मालदा के जिला युवा तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष पर तृणमूल विधायक नीहार रंजन घोष पर हमले का आरोप लगा।

हमले का आरोप पूर्व मंत्री कृष्णेन्दु नारायण चौधरी के लोगों पर भी लगा। विधायक के घर में लगभग सौ लोगों ने घुसकर हमला किया। बर्दवान शहर में एक क्लब पर कब्जे लेकर तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों की लड़ाई में पार्टी कार्यकर्ता अकबर की मौत हो गई। 16 फरवरी को ही हुगली के आरामबाग में तृणमूल का आपसी लड़ाई में अंचल सभापति शंकर कुमार दे की जमकर पिटाई की गई।

वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी की हाल में पश्चिम बंगाल की खूनी राजनीति पर तीन पुस्तकें रक्तांचल-बंगाल की रक्तचरित्र राजनीति, रक्तरंजित राजनीति-लोकसभा चुनाव 2019 और बंगाल-वोटों का खूनी लूटतंत्र प्रकाशित हुई है।

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