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कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी वानखेड़े के शौर्य पर कलंक लगाने का प्रयास करती पत्रकारिता

विपुल रेगे। क्रूज़ ड्रग्स केस में शामिल आरोपियों का जिस ढंग से बचाव किया जा रहा है, वह देखना आश्चर्यजनक है। बॉलीवुड की नामचीन हस्तियों से लेकर बड़े पत्रकार तक शाहरुख़ खान के बेटे का समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं। न्यायपालिका पर दबाव बनाने और लोगों का समर्थन जुटाने का इन दिनों एक नया तरीका चल पड़ा है, जो शिल्पा शेट्टी प्रकरण में पहली बार दिखाई दिया था। ये नया तरीका है सोशल मीडिया पर सक्रिय सैकड़ों छुटभैया वेबपोर्टल्स पर प्रायोजित खबरें प्रकाशित करवाना। आर्यन, शाहरुख़ और गौरी के लेकर समाचारों से फेसबुक और इंस्टाग्राम को पाट दिया गया है।

फेसबुक पर न्यूज़ फीड में हर चौथी पोस्ट आर्यन खान या उसके परिवार को लेकर आ रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सजगता इस मामले में अवश्य देखी जानी चाहिए। ये सारे समाचार बहुत ही नए नामों के पोर्टल्स से लिंक है, जिनका कुछ माह पूर्व कुछ पता नहीं था। कुकुरमुत्तों की भांति उग आए इन पोर्टल्स का उद्देश्य एक ही होता है कि किसी विवादित व्यक्ति की छवि को दुरुस्त करना।

यही काम पीआर एजेंसियां करती आई हैं लेकिन इनका ये नया रुप अत्यंत ही संदिग्ध है। इनमे आ रहे समाचार भी कसौटी पर खरे नहीं उतरते। पिछले दिनों एक वेब पोर्टल ने लिख दिया कि अजय देवगन ने आर्यन खान का समर्थन किया है, जबकि अब तक देवगन ने कुछ कहा ही नहीं है। ऐसे ही शाहरुख़ और गौरी के पुराने किस्से सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। लोगों के बीच आर्यन के लिए समर्थन बनाने का ये एक नया तरीका है।

मुझे ये लिखने में कोई संदेह नहीं है कि ये वेब पोर्टल्स अंदर ही अंदर कुछ पीआर एजेंसियों द्वारा संचालित किये जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर किसी सेलेब्रेटी पर किया गया एक भी कमेंट वे अपने लाभ के लिए प्रयोग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए काजोल ने अपना जन्मदिन मनाया तो ट्विटर पर एक गिरोह उन पर टूट पड़ा और कहा कि शाहरुख़ इतने परेशान हैं और तुमको जन्मदिन मनाने की सूझ रही है।

इसके बाद एक बहुत तेज़ चैनल ने लिख दिया ‘यूजर्स बोले शर्म करो शाहरुख़ परेशान है और तुम जन्मदिन मना रही हो।’ केवल चार भाड़े के यूजर्स काजोल की पोस्ट पर कमेंट करते हैं और ये तेज़ चैनल लिख देता है ‘सारे यूज़र्स।’ ये समाचार बनाने की गंदी कला है, जो इस चैनल को खूब आती है। वेब पोर्टल्स ही क्यों देश के दो बड़े चैनल, जिनको राष्ट्रवादी कहा जाता है, शाहरुख़ के आरोपी बेटे के लिए सरेआम बेशर्मी के साथ बेटिंग करते पाए गए हैं।

एक जेल जा चुका पत्रकार कहता है ‘लोगों को पसंद नहीं आ रहा कि आर्यन को ज़मानत नहीं मिली।’ अरे मियां कौनसे लोग ? अपने रात के शो पर ऐसे लोगों को बुला भी लेते। ये निशाना आपके कन्धों पर रखकर लगाया जा रहा है। आखिरकार आप भी तो लोगों में शामिल हैं। भाड़े के यूजर्स से उटपटांग कमेंट करा लो और फिर उन्हें ‘लोगों का रिएक्शन’ बताकर आर्यन के पक्ष में खूब बेटिंग करो। नीचतम पत्रकारिता के ये नए रंग-ढंग है। एक और चैनल का बड़ा पत्रकार तो सीधा शाहरुख़ का पालतू होने की गवाही दे रहा है।

इसका बड़ा पत्रकार अपने सैंतालीस मिनट के कार्यक्रम में अठारह मिनट आर्यन की पैरवी करता है। वह सीधे एनसीबी की जाँच पर सवाल खड़ा कर देता है। वह एनसीबी की अंदुरनी कार्रवाई पर शक जाहिर करता है। इस तरह से देश के दोनों ख्यात पत्रकार आर्यन का समर्थन करते हैं और एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी समीर वानखेड़े के साहस और शौर्य पर कलंक लगाने का प्रयास करते हैं।

मुझे आश्चर्य है कि सोशल मीडिया पर कुकुरमुत्तों की तरह वेब पोर्टल्स का उगना राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी प्रकरण से ही शुरु हो चुका था लेकिन सूचना व प्रसारण मंत्रालय को खबर तक न हुई। इनमे से अधिकांश वेब पोर्टल्स और यूट्यूब चैनल इस प्रकरण को लेकर लगातार झूठ फैला रहे हैं। एक यूट्यूब चैनल पर कहा गया कि शाहरुख़ ने अपने बेटे को इस बात के लिए लताड़ लगाई कि उसके कारण करोड़ों के प्रोजेक्ट हाथ से निकल गए।

इस झूठ और इसके पीछे काम कर रहे नेक्सस का पता लगाना सरकार का काम है। वे शायद नहीं जानते कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही इस गंद के कारण आर्यन को ज़मानत भले ही न मिले लेकिन एनसीबी जैसी संस्था बदनाम हो रही है और केंद्र को ये भी पता होगा कि एनसीबी उनकी ही एक केंद्रीय एजेंसी है।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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