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स्वाइन फ्लू से पीड़ित अमित शाह की मौत की कामना करते पत्रकार और ‘शांतिदूत’!

रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय. हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय…भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वाइन फ्लू से बीमार क्या हुए मानवता के पक्षधरों की असली मानवता सामने आ गई। मानवता, तथाकथित सेक्युलरों और शांतिदूत के झंडावदारों की क्रूर प्रवृत्ति और विद्रुपता सामने आ गई। राघव बहल द्वारा संचालित वेबसाइट the quint की सोशल मीडिया हेड स्तुति मिश्रा ने तो अमित शाह की मौत तक की कामना कर बैठी। स्तुति मिश्रा ही क्यों उनके जैसे कई शांतिदूत उनकी मौत की कामन करने में जुट गए वो भी सरेआम। कांग्रेस के नेता बीके हरिप्रसाद ने तो यहां तक कह दिया है कि अमित शाह को कर्नाटक सरकार का श्राप लगा है इसलिए वे बीमार पड़े हैं।  ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि मोदी-शाह की मौत की कामना की गई हो, ये लोग शुरू से ही इन दोनों की मौत की कामना करते रहे हैं, लेकिन ये लोग यह नहीं जानते की कसाई के श्राप से गाय नहीं मरा करती।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जैसे ही अपने वारे में स्वाइन फ्लू से बीमार होने की जानकारी दी, वामी-कांगी पत्रकारों से लेकर देश में ‘शांतिदूत’ की संज्ञा पाने वाले समुयदाय के लोग उनकी मौत की कामना करने में जुट गए।

the quint की सोशल मीडिया हेड स्तुति मिश्रा ने सरेआम ट्वीट कर अमित शाह की मौत की कामना कर बैठी। अमित शाह के बीमार होने की खुशी उनसे छिपाई तक नहीं गई, आश्स्त होने के लिए उन्होंने लोगों से पूछ भी लिया कि इस बीमारी से मौत होती है कि नहीं?

हालांकि क्विंट ने अपनी कर्मचारी स्तुति मिश्रा के ट्वीट को असंवेदनशील बताते हुए उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करने की बात कही है, लेकिन यह दिखावा मात्र है। क्योंकि स्तुति मिश्रा जिस क्विंट की सोशल मीडिया हेड हैं उनके मालिकान भी मोदी-शाह के हितैषी नहीं रहे हैं। क्विंट के मालिक राघव बहल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को बदनाम करने में कोई कोर कसर छोड़ नहीं रखा है। ये वही राघव बहल हैं जिनके भ्रष्टाचार पर खड़े मीडिया साम्राज्य का खुलासा चेन्नई आयकर विभाग ने किया था। आयकर विभाग के मुताबिक 2008 में राघव बहल ने पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को घूस देकर विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी हांसिल की थी।

मालूम हो कि 2008 में राघव बहल ने अपनी मीडिया कंपनी टीवी-18 के लिए विदेशी निवेश के लिए मंजूरी ली थी। बाद में उसे बेच कर ही क्विंट नाम की वेबसाइट शुरू की। उनके भ्रष्टाचार के कारण ही आयकर विभाग के अधिकारियों ने उनके क्विंट दफ्तर और घर दोनों जगह छापेमारी की थी। आजकल तो चलन बन गया है कि जब भी कोई जांच एजेंसी किसी को घेरती है वह तुरंत ही सरकार पर फंसाने का आरोप लगाने लग जाते हैं। कारण देते हैं कि वह सरकार के गलत चीजों को बाहर ला रहे हैं इसलिए सरकार बल प्रयोग कर उनकी आवाज दबा रही है।

द क्विंट ने जिस प्रकार अपनी कर्मचारी की असंवेदनशील ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी है वह भी फेक है। यह बात फिल्म निर्माता ने कही है। उन्होंने क्विंट की प्रतिक्रिया वाले ट्वीट की प्रतिक्रिया में लिखा है कि उनकी प्रतिक्रिया भी एक प्रकार से फेक है। यह प्रतिक्रिया उन्होंने अपना चेहरा बचाने के लिए ही दी है। ध्यान रहे कि क्विंट ने अपनी कर्मचारी की हरकत पर गलती नहीं मानी है। विवेक अग्निहोत्री ने लिखा है कि वह जानते हैं कि क्विंट का वर्क कल्चर ही घृणा और नकारात्मकता फैलाने वाला है। असल में स्तुति मिश्रा जैसे लोगों को वहां प्रोत्साहन और उन्नति मिलती है।

अमित शाह की मौत की इच्छा रखने वालों में क्विंट और स्तुति मिश्रा ही नहीं हैं बल्कि रवीश कुमार सरीखे तथाकथित सेक्युलर पत्रकार के मुंह से देश में शांतिदूत की संज्ञा पाने वाले समुदाय के लोगों की पूरी फौज है। रविरंजन ने उसकी पूरी सूची ही डाल कर ऐसे लोगों को बेनकाब किया है।

स्तुति मिश्रा जैसे फेक पत्रकार इसी प्रकार की हरकत करती है, वह हिट एंड रन के सिद्धांत से संचालित होती हैं, यह इनकी पीढ़ीगत आदत है कि वार करो और फिर भाग जाओ। तभी तो उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है।

इन्हीं लोगों की हरकत को देखते हुए वरिष्ठ पत्रकार मानक गुप्ता ने कहा है कि दरअसल में ये लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। जो व्यक्ति किसी बीमार इंसान के लिए सार्वजनकि रूप से मैत की कामना करे वे लोग मानसिक रूप से स्वस्थ हो नहीं सकते। इसलिए इनसे संवेदनशील होने की अपेक्षा की ही नहीं जा सकती क्योंकि सबसे पहले इन्हें अपना इलाज कराना चाहिए।

URL : journalists and mims wishing death of Shah who suffering Swine Flu !

Keyword : amit shah, unsensitive journalists, Swine flu, the quint,BPP, संवेदनहीनता, अमित शाह

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