कांचा इल्लैया ने अपनी किताब ‘पोस्ट हिंदू इंडिया’ में वैश्य समुदाय को बताया सामाजिक तस्कर!

भारत में आज़ादी के बाद से ही अकादमिक स्तर पर विषाक्त प्रचार-प्रसार होता रहा है! विभाजनकारी कांगी वामी राजनीति इसका समर्थन करती रही है, जिससे भारतीय समाज में जातिगत आधार पर विभाजन की रेखा बरकरार रखी जा सके। वैसे भी वाम समाज में द्वन्द पैदा कर अपना प्रसार करता रहा है! इसी श्रेणी के एक्टिविस्ट और लेखक कांचा इल्लैया की तीन किताबों का नाम भी आता है। कांचा इल्लैया ने अपनी किताब ‘पोस्ट हिंदू इंडिया’ वैश्य समुदाय को सामाजिक तस्कर बताया है जो हिन्दू समाज के मध्य एक रेखा खींचने का काम कर रही थी! मालूम हो कि दिल्ली विश्वविद्यलय की स्थायी समिति ने कांचा इल्लैया की तीन किताबों को एमए राजनीति शास्त्र के सिलेबस से हटा दिया है।

लेकिन लेखक के समर्थन में वामी कांगी संगठन ने दिल्ली विश्वविदालय के इस कदम की आलोचना करते हुए फैसला वापस लेने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। देश के हर विभाग में स्वच्छता अभियान चल रहा है तो अभियानवादी शिक्षाविदों के पेट में मरोड़ शुरू हो चुका है। आलोचना के लिए शैक्षणिक माहौल बनाने का यह कैसा दावा है कि एक लेखक और शिक्षक अपनी किताब में समाज के एक जाति विशेष को दोषी करार देता है, लेकिन कांगी वामी संगठन उसकी निंदा करने की बजाए उसके समर्थन में जुट गए हैं और दिल्ली विश्वविदालय के इस कदम की आलोचना करते हुए फैसला वापस लेने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

मुख्य बिंदु

* समाजविरोधी कांचा इल्लैया के पीछे लामबंद होने लगे डीयू के कांगी-वामी संगठन

* दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थायी समिति ने कांचा इल्लैया की तीन किताबों को कोर्स से वापस लिया

गौरतलब है कि कांचा इल्लैया ने अपनी एक किताब “पोस्ट हिंदू इंडिया” के एक अध्याय ‘सामाजिक तस्कर’ के तहत लिखा है कि वैश्य समुदाय ने समाज की संपत्ति हड़प कर उस पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने अपनी किताब में इसे सामाजिक तस्करी के नाम से उल्लेख करते हुए इसके लिए वैश्य समुदाय को जिम्मेवार बताया है। वैश्य समुदाय ने ऐतराज जताते हुए कहा है कि पूरी जाति को तस्कर कहकर अपमानित करना कतई सही नही है।

इस विवाद को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने उनकी तीन किताबों को कोर्ट से हटा दिया है। जबकि विश्वविद्यालय के कांगी-वामियों के संगठन ने इसका विरोध किया है। देश विरोधियों, समाज विरोधियों, हिंदू और देश को अपमानित करने वालों का समर्थन करना कांगियों-वामियों की आदत सी बन गई है। जबकि ऐसे समाज विरोध लेखकों की किताब तो कोर्स से नहीं बल्कि एक जाति विशेष को अपमानित करने के लिए प्रतिबंधित कर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

URL: Kancha Ilaiah writes Vaish community Social smuggler in his book ‘Post Hindu India’

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