वामपंथी धूर्तता, बेशर्मी और झूठ का प्रतिनिधि है कन्हैया, जिसे मुसोलिनी के सैनिक स्टीफन माइनो की बेटी नचा रही है!

कन्हैया का दोगलापन देखिए! वामपंथ की धूर्तता, बेशर्मी, और झूठ का सम्मिलित रूप इसके व्यक्तित्व में देखने को मिल रहा है! कन्हैया सबूत नहीं देगा कि गोलवलकर मुसोलिनी से कब मिले थे, वह सबूत नहीं देगा कि जिन्ना से पहले सावरकर ने देश बंटवारे की बात कब कही थी, वह कोई रिफ्रेंस नहीं दे पाएगा कि मोहन भागवत ने यह कब कहा था कि महिलाओं को घर में बैठना चाहिए! लेकिन वह मुसोलिनी की सेना में काम करने वाले स्टीफन माइनो की बेटी सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस पार्टी द्वारा नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेता है! लेकिन वह सडक पर पेशाब करने का विरोध करने वाली महिला को अपना लिंग दिखाते हुए मानसिक रोगी कहता है! लेकिन वह कश्मीर को भारत से अलग करने वाले उमर व अनिर्वान जैसों के समर्थन में नारेबाजी करता है! सावरकर और जिन्ना तो पूर्व में हुए, कन्हैया तुम तो अभी दिल्ली में बैठकर भारत से कश्मीर और केरल को अलग करने की बात करने वालों के साथ खड़े हो! कैमरे पर इसे पूरी दुनिया ने देखा है!

यह केवल कन्हैया नहीं, पूरे वामपंथ का दोगलापन है। RSS पर आरोप लगाते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों का साथ दिया, लेकिन इनके पास सबूत नहीं है! लेकिन मेरे पास राष्ट्रीय अभिलेखागार में मौजूद उस वक्त कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव पीसी जोशी व अंग्रेज वायसराय काउंसिल के गृह मत्री मैक्सवेल के बीच का पत्राचार उपलब्ध है, जिसमें जोशी ने अंग्रेजों को यह आश्वासन दिया था कि वह भारत की आजादी का विरोध करते हैं और अंग्रेजों के साथ हैं। कम्यूनिस्ट पार्टी का मुख्यपत्र ‘पिपुल्स वार’ भारत के खिलाफ अभियान चला रहा था, गांधी को बुर्जुआ दलाल, सुभाषचंद्र बोस को तोजो का कुत्ता और नेहरू को साम्राज्यवाद के पीछे दौडता कुत्ता कहा जा रहा था। कम्यूनिस्टों का वह पूरा घिनौना चेहरा अभिलेखागार में मौजूद है, लेकिन अफसोस अरुण शौरी के अलावा अन्य किसी ने उसे बाहर निकालने का प्रयास नहीं किया।

ज्ञात हो कि नागपुर में 14 अप्रैल 2016 को कांग्रेस ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें जेएनयू अध्‍यक्ष कन्‍हैया कुमार मुख्य अतिथि था। वहां कन्हैया ने दावा किया कि भारत से अलग पाकिस्‍तान बनाने की अवधारणा मोहम्‍मद अली जिन्‍ना के बजाय सबसे पहले वीर सावरकर ने रखी थी। जहां तक साम्‍प्रदायिकता की बात है तो हमें इतिहास में जाना होगा जहां से इसकी शुरुआत हुई। दो देशों की धारणा की नींव रखने वाले सावरकर थे न कि मोहम्‍मद अली जिन्‍ना। हालांकि जब इस बारे में सबूत की मांग की गई तो वह बगले झांकने लगे।

कन्हैया ने एक और झूठ बोला। उसने कहा, देश को मोदी से, संसद को आरएसएस से और संविधान को मनुस्‍मृति से बदले जाने के खिलाफ वे लड़ाई लड़ते रहेंगे। कन्‍हैया से जब पूछा गया कि कांग्रेस के सह आयोजन वाले कार्यक्रम का न्‍योता उन्‍होंने कैसे स्‍वीकार किया। इस पर उसके पास कोई उत्तर नहीं था, उल्टा झल्ला कर बोला- मैंने किसी को मुझे बुलाने के लिए नहीं कहा था।

उसने तीसरा झूठ बोला कि आरएसएस प्रमुख मोाहन भागवत महिला विरोधी हैं। जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्‍या आपके पास आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के महिलाओं के घरों में ही रहने के बयान का सबूत है तो कन्‍हैया फिर से बगले झांकने लगा और पत्रकारों से कहा कि आप लोग तैयारी करके नहीं आते हैं। पत्रकार उसके झूठ की और पोल खोलते, इससे पहले ही वह प्रेस कांफ्रेंस खत्‍म कर भाग खड़ा हुआ।

दरअसल दुर्भाग्य यह है कि इस देश में वामपंथी मीडिया-बुद्धिजीवी माफियाओं ने वामपंथ के काले चेहरे को उजागर करने के लिए कुछ लिखा नहीं और राष्ट्रवादियों ने इस पर कभी सोचा नहीं, जिसके कारण मैकाले-माक्र्स के गठजोड का काला सच सामने नहीं आ पाया। आज ये झूठ बोलने की हिम्मत इसी लिए कर रहे हैं, क्योंकि तथ्यगत रूप से इनके चेहरे से नकाब खींचने के लिए कहीं कोई काम नहीं हो रहा है। इनको नंगा करने की जरूरत है, क्योंकि पीसी जोशी से लेकर कन्हैया कुमार तक बेशर्मी से झूठ बोलने में पारंगत हैं और ये तब तक बोलते रहेंगे, जब तक इनके झूठ को उजागर करने के लिए तथ्यगत रूप से सच को सामने नहीं लाया जाता है।

Web title: kanhaiya-kumar-says-v-d-sawarkar-not-mohammad-ali-jinnah-was-the-propounder-of-two-nation-theory

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