चर्च का पादरी रेप करे तो पीड़िता को वेश्या बना दो, यदि कोई हिंदू बाबा लड़की के कंधे पर हाथ भी रखे तो उसे बलात्कारी साबित कर दो! और कितना गिरोगे मक्कारों?



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देश में वामी और पीडी पत्रकारों के नीचे गिरने की कोई हद ही नहीं बची है। केरल में एक नन के साथ पादरी के बलात्कार का मामला सामने आते ही कांगी-वामी पत्रकार नन को ही वेश्या साबित करने पर तुल गया है, जबकि किसी हिंदू बाबा के लड़की के कंधे पर हाथ रखने पर ही उसे बलात्कारी साबित कर देता है। ये लोग बेशर्मी की सारी हदें पार कर चुके हैं। तभी तो वहां के एक विधायक पीसी जॉर्ज ने कहा है कि किसी को पीड़ित नन के वेश्या होने में संदेह नहीं है,क्योंकि 12 बार तो उसने आनंद उठाया और 13वीं बार बलात्कार का आरोप लगाया है। पादरी का बलात्कार गिनने वाला बेशर्म विधायक का कहना है कि आखिर नन ने पहली बार ही बलात्कार करने का आरोप क्यों नहीं लगाया? मालूम हो कि जालंधर के एक पादरी फ्रैंको मुलाक्कल पर एक नन ने कई बार बलात्कार करने का आरोप लगाया है। लेकिन केरल की वामपंथी सरकार कान में तेल डालकर रेप आरोपी पादरी को बचाने में जुटी है।

मुख्य बिंदु

* केरल के एक विधायक ने पीड़िता नन को बता दिया वेश्या, वामपंथी और लुटियंस ब्रिगेड ने साध रखा है मौन

* अगर केरल सरकार एसआईटी गठित नहीं करती है तो किसी को हाईकोर्ट से सीबीआई जांच के लिए कहना चाहिए

केरल में अबला नन के साथ हुए बलात्कार के नामले में भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद सुब्रमनियन स्वामी ने कहा है कि अगर इस मामले की जांच के लिए सरकार एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित नहीं करती तो किसी को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश देने के लिए कहना चाहिए।

इसके साथ ही स्वामी ने वामपंथियों तथा फेक पत्रकारों के साथ ही धर्म के आधार पर हो रहे भेदभाव पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आशाराम के मामले का दृष्टांत देते हुए कहा कि अगर एक हिंदू साधू को लड़की के कंधे पर हाथ रखने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है तो फिर केरल कैथोलिक बिशप को अभी तक हिरासत में भी क्यों नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि आशाराम के खिलाफ दर्ज एफआईआर में तो बलात्कार का जिक्र भी नहीं था। जबकि केरल के कैथोलिक बिशप फ्रैंक मुलाक्कल के खिलाफ तो एक नन के साथ 13 बार बलात्कार करने का आरोप है। जिस प्रकार सरकार के स्तर पर रिलीजन के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है वह देश के हित में नहीं है।

इस मामले में क्रिश्चियन समुदाय द्वारा संचालित मीडिया ने भी दोगलापन दिखाया है। इस मामले में केरल से प्रकाशित अधिकांश अखबारों ने नन के साथ पादरी के बलात्कार मामले को प्रमुखता से पहले पन्ने पर छापा है जबकि क्रिश्चियन समुदाय द्वारा संचालित अखबारों ने इस मामले को अंदर के पेज पर धकेल दिया है। इससे साफ हो जाता है कि किस प्रकार मीडिया रिलीजन से नियंत्रित है। मीडिया पर धार्मिक नियंत्रण का यह एक अनोखा मामला सामने आया है।

सवाल उठता है कि आज कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना मुंह क्यों बंद कर रखा है? कठुआ मामले में पीड़ित बच्ची के समर्थन में कैंडल मार्च निकालने वाले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आज क्यों छिपकर घर में बैठे हैं? इसलिए क्योंकि इस मामले में किसी पादरी पर सीधा आरोप लगा है? या इसलिए कि एक पीड़ित अबला नन के पक्ष में आने से उनका क्रिश्चियन वोट खराब हो जाएगा? केरल के कैथोलिक पादरी वर्ग कांग्रेस से नाराज हो जाएगा?

URL: Kerala MLA pc george Calls Rape Victim Nun A Prostitute

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