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होली गीत – आओ खेलें कुमाऊंनी होली रे रसिया…

होली गीत – कुमाऊंनी होली

भारत की सांस्कृतिक विरासत कश्‍मीर से लेकर कन्याकुमारी तक विविधता में एकता की छटा बिखेरता है। रंगों का त्‍यौहार होली भी इस विविधता से बचा नहीं रह पाता। कहने को तो होली रंग-गुलाल का त्‍यौहार है, लेकिन इस भारत में कुंमाऊ होली, मथुरा की होली, ब्रज की होली- सब अपनी अपनी विविधता में भारतीय संस्‍क़ति की एकता को प्रदर्शित करते हैं।

कुमाऊंनी होली, भारतीय पौराणिक कथाओं को गीत के माध्यम से कहना और पीढ़ी दर पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ाने का नाम है। कुमाँऊनी होली,. उत्तरांचल में होली की पहचान है। बसंत पंचमी से होली के गीत उत्तरांचल के कुमाऊं मंडल के वातावरण में गूंजने लगते हैं। घर-घर, बारी-बारी होली की बैठकों का दौर सा चल पड़ता है और समाप्त होता है होलिका दहन के साथ।

एकादशी से खड़ी होली प्रारम्भ होती है। अपने इष्ट देव के प्रांगण में पहली होली गायी जाती हैं। उत्तरांचल में होली रंगों से ज्यादा रागों से खेली जाती है। शास्त्रीय संगीत की विधाओं और भिन्न-भिन्न रागों के रंगों में सजी उत्तरांचली होली अपने आप में एक सफल प्रयास है अनमोल सांस्कृतिक विरासत को पोषित करने के लिए।

इष्ट देव के प्रांगण से निकल होली 5-6 दिनों तक गांव के हर घर से होती हुई समापन को जाती है। गणेश वंदना के होली गीत ‘होली खेलें गिरिजापतिनन्दन’ प्रमुखतया सभी कुमाऊं अंचल में गाया जाने वाला प्रारंभिक गीत है। इसके बाद फिर देवर भाभी की चुहलबाजी और नोंक-झोंक से सजी इस होली गीत का अपना अलग ही रस है- ‘मेरो रंगीलो देवर घर आ रे छो’ शाम ढलती रहती है और फिर बारी आती है शिव के काशी प्रेम को दर्शाती होली..

शिव के मन हो
शिव के मन माहि
बसे कासी
शिव के मन हो

तो कभी सीता माँ की व्यथा को सुनाता यह होली गीत
हाँ जी सीता वन में कैसे रही,
कैसे रही दिन रात
सीता वन में कैसे रही

महाभारत के प्रसंगो को भी कुमाउँनी होली में प्राथमिकता दी गयी है जैसे सीता और मंदोदरी के मिलने पर लिखी गयी यह होली ‘गई-गई असुर तेरी नार मंदोदरी सिया मिलन गयी बागा में’ या सुलोचना के सती होने के प्रसंग पर कही गयी यह होली गीत कि ‘ऐसी पतिव्रता नार सुलोचना सती भई बालम संग में’ और यह भी देखिए, अहंकार न करने की सलाह देती यह होली:

जिले गर्व कियो,
वो ही, हारे पिया जिले गर्व कियो
गर्व कियो लंका पति रावण
राजा बलि की छवि को महादानी प्रस्तुत करती यह होली मुझे बचपन से ही पसंद है
राजा बलि छलने
को आये त्रिपुरारी

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ना जाने ऐसी कितनी ही पौराणिक कथाओं को जीवंत करती उत्तरांचल की होली हमारी मूल आत्मा, आध्यात्म व पौराणिक विचारों की पोषक है। जरूरत है तो सिर्फ इतनी कि इस परम्परा के निर्वाह को जीवंत रखने की। समाज कितनी महती भूमिका निभाते हैं इस परम्परा को निभाने के लिए यह प्रश्न महवपूर्ण है।

हमारा एक छोटा सा प्रयास लोगों तक भारतीय आंचलिक संस्कृति को पहुंचाने का है। कुछ होलियाँ नीचे लिख रहा हूँ इस आशा के साथ की आप सभी लोगों का जीवन रंगों से सरोबार रहें।

लागो फाल्गुन मास,
होली सबको मुबारक
बूढ़ा सयाना तुम बच्ची रया
मिलुला अगल्ली साल
होली सबको मुबारक

होली गीत- एक

ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में .
चल रावण राम को युद्ध भयो है (२)
युद्ध भयो घनघोर सुलोचना, सती भई ………… .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में
योद्धाओ से योद्धा भिड़ गये हैं (२)
मच गई हाहाकार सुलोचना, सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में
मेघनाथ रण भूमि गये है (२)
लछिमन से भिड़ जाय सुलोचना, सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में
मेघनाथ ने बाण चलायो (२)
लछिमन को लग जाय सुलोचना सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना सती भई बालम सग में
लछिमन योद्धा धरणी पड़े है (२)
बानर सब व्याकुल होय सुलोचना सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना सती भई बालम सग में
द्रोणाचल से वैध बुलायो (२)
रामीचन्द व्याकुल होय सुलोचना,सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में
है कोई योद्धा, इस कपि दल में (२)
जाय संजीवन लाय सुलोचना, सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में
तब हनुमान ने बेड़ा उठायो (२)
जाय संजीवन लाय सुलोचना,सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में
पाय संजीवन लछिमन जि आये (२)
बानर हर्षित होय सुलोचना, सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में
लछिमन रण भूमि गए है (२)
मेघनाथ से भिड़ जाय सुलोचना,सती भई बालम सग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना,सती भई बालम सग में
लछिमन ने बाण चलायो (२)
मेघनाथ लग जाय सुलोचना, सती भई बालम संग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में
मेरे पति रण भूमि गये है (२)
कोई खबर ना आय सुलोचना, सती भई बालम संग में .
ऐसी पतिव्रता नारी सुलोचना, सती भई बालम सग में

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होली गीत- दो

राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
निरनब्बे यज्ञ किये राजा बलि ने (२)
किन्ही स्वर्ग की आशा,राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी राजा बलि छलने
इंद्र सिहासन डोलन लाग्यो (२)
पहुचे विष्णु के पासा, राजा बलि छलने ,राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
बूड़े बामन का भेष धरयो (२)
पहुचे बलि के पासा, राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
बूड़े बामन को आसन दीनो (२)
पूछे सारे हाला, राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
माग ले बामन जो कछु मागे (२)
जो मन इच्छया होय राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
तीन चरण मोहे धरती दीजो (२)
यज्ञ करण की आशा, राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
अहो बामन तने कछु नही माँगा (२)
किस्मत तेरी खोटी, राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
एक चरण से धरती नापी (२)
दूजे से आकाशा,राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
तीसरो चरण बलि सिर पर राख्यो (२)
बलि पहुचे पाताला, राजा बलि छलने ,राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
राजा बलि पाताल सिधारो (२)
भीष उड़े आकाशा, राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने
घन घन घन घन घंटा बाजे (२)
धूल उड़ी आकाशा, राजा बलि छलने, राजा बलि छलने को आये त्रिलोकी, राजा बलि छलने

होली गीत-तीन

कुंडलपुर के राजा भीष्म का नाम सहाय. कुंडलपुर के राजा भीष्म का नाम सहाय
ता घर जन्मी कन्या रुक्मणि नाम कहाय
रुक्मणि कन्या ऐसी जन्मी जेसो फूल गुलाब (2)
कनक बदन तन सोहै मुख चंदा सो होई (2)
कुंडल पुर के राजा भीष्म का नाम सहाय. कुंडल पुर  के राजा भीष्म का नाम सहाय……..
उसी शहर के अध् बीच देवी को दरबार (2)
नित उठ रुक्मणि कन्या देवी पूजन जाय (2)
अक्छयत चन्दन ले कर नारियल भेट चढ़ाय (2)
कुंडल पुर के राजा …. भीष्म का नाम सहाय, कुंडल पुर के राजा भीष्म का नाम सहाय…..
पिता कहे श्री कृष्ण को दीजो भाई कहे शिशुपाल (2)
धनुष को हाथ में ले के लड़न चले शिशुपाल (2)
पीताम्बर के कपडे गरुड़ चले है सवार
गगन मंडल से झपटे रुक्मणि रथ बैठाय  .
रुक्मणि रथ बैठा के रुक्मणि हर ले जाय
कुंडलपु के राजा भीष्म का नाम सहाय. कुंडलपुर के राजा भीष्म का नाम सहाय

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होली गीत- चार

तल धरती पुर बादल, बादल उपजो बयार (2)
के वन अमृत सींचो , के वन उपजो खमार (2)
मधुवन अमृत सींचो, गोकुल उपजो खमार (2)
पांडव जुहरा  खेले,  सतयुग का अवतार
कौरव जुहरा खेले, कपट करे व्यवहार
ले हो पांडव जुहरा ,तुम जैठिय  जात
त्रिया बैरी योवन , बादल बैरी बयार
धन को बैरी जुहरा, रण बैरी तलवार
सूरज को बैरी बादल. बादल बैरी वयाल
पांडव जुहरा खेले, पासा पढ़ गयो हार
अरब खरब सब हारो, हारो द्रोपती नार
तल धरती पुर बादल, बादल उपजो बयार (2)

होली गीत- पांच

शिव दर्शन दे हो जटा धारी शिव दर्शन दे.
मन परसन हो, मन परसन हो, हो जटा धारी (२)
चल पूरब दिशा से आतुर आये
नगर निशाना संग लाये शिव दर्शन दे, शिव दर्शन दे हो जटा धारी
चल पचिम दिशा से आतुर आये
अक्षत चंदन सग लाये, शिव दर्शन दे, शिव दर्शन दे हो जटा धारी
चल उतर दिशा से आतुर आये
अबीर गुलाल सग लाये शिव दर्शन दे, शिव दर्शन दे हो जटा धारी
चल दक्क्षिण दिशा से आतुर आये
होली कि बहार सग लाये, शिव दर्शन दे,शिव दर्शन दे,हो जटा धारी

होली गीत- छह

भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका भलो जनम लियो मथुरा में
भर भादो की रतिया में रे, भर भादो की रतिया में रे
किशना भये अवतार राधिका,भलो-जनम लियो मथुरा में
रोहिणी नछत्र पड़ो है (२)
जन्म लियो बुधवार राधिका, भलो जन्म लियो मथुरा में, भलो-२, जन्म लियो मथुरा में
कौन की कोख से जन्म लियो है (२)
कौन खिलाये गोद राधिका,भलो जन्म लियो मथुरा में ,भलो-२ जनम लियो मथुरा में
देवकी की कोख से जनम लियो है (२)
यशोदा खिलाये गोद राधिका भलो जन्म लियो मथुरा में ,भलो-२ जनम लियो मथुरा में
माता-पिता की बंदी छूटी(२)
खुल गये बंद किवाड़, राधिका भलो जन्म लियो मथुरा में, भलो-2 जन्म लियो मथुरा में
चारो चौकी सोई रही है(२)
सोई रहै चौकीदार राधिका, भलो जन्म लियो मथुरा में, भलो-2 जनम लियो मथुरा में
ले, बालक वासुदेव चले है (२)
पहुचे यमुना तीर राधिका, भलो जनम लियो मथुरा में, भलो-2 जनम लियो मथुरा में
ले बालक पार गये है(२)
गोकुल जा पहुचाय राधिका, भलो जन्म लियो मथुरा में भलो-2 जनम लियो मथुरा में
जब बालक गोकुल पहुंचा(२)
हो रही जय-जयकार राधिका, भलो जनम लियो मथुरा में, भलो-2 जनम लियो

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