लालू की पार्टी आरजेडी सबसे बड़ी सवर्ण विरोधी है



Awadhesh Mishra
Awadhesh Mishra

लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल सवर्णों की कितनी बड़ी विरोधी है इसका अंदाजा मंगलवार को लोक सभा में 124वें संविधान संशोधन विधेयक पर हुए मतदान से ही पता चलता है। इस विधेयक पर हुए मतदान के दौरान जहां लोकसभा में उपस्थित सदस्यों में 323 ने पक्ष में मत दिया वहीं तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया। विरोध में मत देने वालों में एक आरजेडी के सांसद जयप्रकाश नारायण यादव हैं । इससे स्पष्ट होता है कि शुरू से ही देश के सवर्णों का विरोध करने वाले लालू यादव की पार्टी आरजेडी सामान्य वर्ग के गरीबों की सबसे बड़ी विरोधी पार्टी है। वैसे लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक और सार्वजनिक इतिहास सवर्ण विरोधी का ही रहा है। समय बदलने के बाद भी लालू कुनबा का सवर्ण विरोध हटा नहीं है। अपने बड़े भाई का राजनीतिक अंश खाने वाले लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने जातीय जनगणना जारी कर जातियों की संख्या के अनुपात में आरक्षण देने की मांग की है।

लोकसभा में आरजेडी के सांसद जय प्रकाश नारायण तथा एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी  के अलावा असम के एक सांसद को छोड़कर सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए की जा रही आरक्षण की व्यवस्था का खुले तौर पर किसी ने विरोध नहीं किया है। लेकिन अपने संबोधन के दौरान पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाने की बात अधिकांश लोगों ने कही है। कई लोगों ने तो जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की मांग करना शुरू कर दिया है। जहां कई पार्टियां और उनके नेता जनसंख्या के आधार पर आरक्षण देने की मांग करने लगे हैं वहीं कई लोगो आरक्षण को लेकर सशंकित हो गए हैं। कई लोगों का तो कहना है कि यह भाजपा की एक चाल है जो आगे चलकर वह आरक्षण को जाति आधारित हटाकर सिर्फ आर्थिक आधार वाला आरक्षण लागू करेगी। जिस प्रकार अभी से आरक्षण को लेकर बहस शुरू हो गई है उसे देखते हुए लगता है कि 2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव के लिए आरक्षण बनाम आरक्षण का मुद्दा सबसे ऊपर होगा।

जहां तक सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए आरक्षण का विरोध करने की बात हो तो लालू यादव और उनकी पार्टी शुरू से ही सामान्य वर्ग के गरीब विरोधी रहे हैं। लालू यादव ने अपनी राजनीतिक साख बढ़ाने के लिए बिहार में जातियों के बीच वैमनस्य का वो बीज बोया जिसका फसल अभी तक वह काट रहे हैं। ये वही लालू यादव हैं जिन्होंने  बिहार के मुख्यमंत्री रहने के दौरान ‘भुराबाल’ साफ करो का नारा दिया था। ‘भुराबाल’ से उनका अभिप्राय भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, लाला यानि कायस्थ से था। लालू यादव ने अपने कार्यकाल में इन्हीं सवर्ण जातियों का सबसे ज्याादा उत्पीड़न किया था। लालू यादव के इसी नारे के कारण ही कई सवर्ण जातियों के लोगों को अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी थी। लालू यादव के जंगलराज के कारण ही आज भी बिहारियों को देश के अन्य हिस्सों में प्रवासियों का जीवन जीना पड़ रहा है। ऐसा भी नहीं कि सवर्ण विरोध के नाम पर उन्होंने प्रदेश के दलितों और अन्य पिछड़े वर्ग या फिर अपनी ही जाति यादवों का भला किया हो। लालू यादव अपने कार्यकाल के दौरान प्रदेश में जाति की खाई चौड़ी कर अपना उल्लू सीधा करते रहे। उन्होंने आज तक अपने परिवार के अलावा किसी का भला नहीं किया। भले ही यादव और मुसलमान थोक के भाव में उन्हें अपना वोट देते रहे, लेकिन सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने अपने पारिवारिक सदस्यों की ही भलाई की। उनके परिवार मोह को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि आज उनका अपना साला उनसे खफा चल रहे हैं। क्योंकि उन्होंने अपने परिवार के अलावा न तो यादवों का ना ही मुसलमानों का कोई भला किया। दूसरी पिछड़ी जातियों की बात तो छोड़ ही दीजिए।

लालू यादव के पुराने राग को आलापते हुए ही लोकसभा में आरजेडी ने सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए लाए गए 12वें संविधान संशोधन का विरोध किया है। लोकसभा में आरजेडी सांसद जय प्रकाश नारायण ने अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर समाज में जहर का बीज बोने का काम किया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा है कि दलितों और अति पिछड़ों को 85 फीसदी आरक्षण देने के बाद शेष जिसको जितना देना है दे दीजिए। उन्होंने सदन में लाए गए संशोधन बिल का विरोध किया। इससे स्पष्ट हो जाता है कि लालू यादव आज भी अपने दोनों बेटों का राजनीतिक भविष्य सामान्य वर्ग के विरोध में ही ढूंढ रहे हैं।

लालू यादव आज भी अगर जेल में सड़ रहे हैं तो अपने ही पाप के कारण। आज अगर वे जेल में है तो किसी पिछड़ी जातियों, यादवों या मुसलमानों के लिए आंदोलन करने के कारण नहीं हैं। वे जेल में इसलिए हैं कि पिछड़ी जातियों को मवेशियों के लिए दिया जाने वाला चारा का घोटाला किया था। इसके अलावा अपने परिवार के लिए धन और संपत्ति जमा करने के लालच में उन्होंने कई घोटालों को अंजाम दिया। लालू यादव पर बिहार से से लेकर देश तक में कई घोटाला करने का आरोप है। आरोप तो यहां तक है कि उन्होंने रेलवे में नौकरी देने के बदले कई लोगों की जमीन तक लिखवा ली। चारा घोटाला के अलावा उनके खिलाफ कई घोटाले का मामला चल रहा है।

लालू यादव ने सवर्णों को गाली देकर प्रदेश के पिछड़ी गरीब जातियों में भ्रम फैलाने में जरूर सफल रहे। तभी तो पिछड़ी जातियो, यादवों और मुसलमानों के लिए कोई भी अच्छा काम नहीं करने के बावजूद सालों तक लोग उन्हें अपना जानकर वोट देते रहे। अब जबकि आज वे जेल में हैं पार्टी की कमान उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव के हाथ में हैं। फिर भी उनके परिवार की सवर्ण विरोधी सोच नहीं बदली है। तेजस्वी युवा हैं, लेकिन अपने पिता लालू यादव की खिंची लकीड़ पर चलने को मजबूर हैं।

याद नहीं कि लालू यादव ने मुसलिमों में भाजपा और संघ परिवार के खिलाफ जहर भड़ने और उन्हें उनसे बचाने का आश्वासन देने के अलावा कोई काम किया हो। आज भी सामान्य वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था का विरोध कर लालू की पार्टी आरजेडी ने मुसलमानों का भी विरोध किया है। क्योंकि इस आरक्षण का लाभ मुसलमानों के शेख, सैय्यद, पठान और मुगल तथा ईसाई,पारसी और उन तमाम मजहब के लोगों को मिलेगा जो पहले से किसी आरक्षण के वर्ग में नहीं है। लेकिन अपनी जाति यादव के लिए हमेशा घड़ियाली आंसू बहाने वाले लालू यादव और उनके बेटों ने एससी/ एसटी तथा पिछड़े वर्ग के हितैषी बनने के लिए 124वें संविधान संशोधन विधेयक का विरोध किया है।

लालू यादव की यह समाज और जाति विरोधी नीति अब और नहीं चलने वाली है, क्योंकि पिछड़े वर्ग से लेकर अब तो पढ़े लिखे यादव तक लालू यादव की महत्वाकांक्षा से अवगत हो चुके हैं। नई पीढ़ी के बच्चे समझ चुके हैं कि लालू यादव ने इतने दिनों तक उन्हें बेवकूफ बना कर अपना उल्लू सीधा किया है। क्या वे लोग नहीं जानते हैं कि लालू यादव ने कैसे इतनी संपत्ति अपने पारिवारिक सदस्यों के नाम इकट्ठी कर ली है? मालूम हो कि हाल ही में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि आज लालू यादव बिहार के सबसे बड़े जमींदार हैं। कैसे? इसका खुलासा मोदी पहले ही कर चुके हैं। उन्हीं के खुलासे के कारण आज लालू यादव का पूरा परिवार बेनामी संपत्ति तथा आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे पड़े हैं।

लालू यादव को संपत्ति का लालच इतना गिरा चुका है कि आज उन्हें खुद भी नहीं पता है कि उनके परिवार का कौन सा सदस्य कौन से मामले में कब जेल चले जाएं। ये उनका किया हुआ पाप है जो आज सर चढ़ कर बोल रहा है। ‘रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया’ की कहावत को चरितार्थ करने वाले लालू यादव फिर भी चेतने को तैयार नहीं है। वे आज भी समाज में समरसता लाने के पक्ष में नहीं बल्कि समाज में वैमनस्य के पक्षधर हैं ताकि उनकी राजनीतिक रोटी सेंकी जा सके। लालू यादव के बारे में अगल एक लाइन में कहने के लिए कहा जाए तो यही कहा जा सकता है कि परिवार के अलावा लालू किसी का नहीं ।

URL : Laloo Yadav’s RJD is the biggest anti-social political party!

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