नसीरुद्दीन शाह के बयान के पीछे वामपंथी ब्रिगेड का दिमाग है

नसीरुद्दीन शाह के ‘डिजाइनर बयान’ के बाद उनको बुरी तरह लताड़ा जा रहा है। अपने एक साथी को घिरता देख फिल्म उद्योग के कुछ लोग नसीर के बचाव में उतर आए हैं। अभिनेता आशुतोष राणा ने पुरजोर ढंग से उनको समर्थन दिया है। ये मामला इतना सहज नहीं है, जितना दिखाया जा रहा है। नसीर ने ये बयान अपनी प्रिय वामपंथी ब्रिगेड के कहने पर बहुत सोच समझकर दिया है। ऐसा लग रहा है कि ‘पुरस्कार वापसी’ की तरह कला जगत की ओर से एक नया घृणित अभियान शुरू होने जा रहा है।

बहुत समय से गायब रही स्वरा भास्कर अचानक नसीरुद्दीन शाह के विवाद में कूद पड़ी हैं। उनका अचानक से प्रकट होना इस बात का संकेत है कि मामले को परदे के पीछे से संचालित किया जा रहा है। उनके साथ अभिनेत्री ऋचा चड्ढा भी नसीर के समर्थन में बयानबाज़ी कर रही हैं। उनका कहना है ‘हम टैक्स पेयर्स हैं। हमें भी अपनी बात कहने का अधिकार है।’ सुनील शेट्टी ने भी नसीर का बचाव करने वाला बयान दिया है। हैरानी की बात है कि अनुपम खेर को छोड़ किसी ने ये नहीं पूछा कि जिस देश ने आपको इतना प्यार दिया, उस देश के लिए ऐसी बात आपने कैसे कह दी। यदि ऋचा चढ्ढा टैक्स पेयर हैं तो वे करोड़ों लोग भी टैक्स पेयर्स हैं, जिनको नसीर की बात बहुत नागवार गुज़री है।

नसीरुद्दीन शाह के बयान को एक बार फिर देखने और सुनने की आवश्यकता है। बारीक़ी से देखेंगे तो नसीर इस इंटरव्यू में खालिस अभिनय करते नज़र आते हैं। वह बयान एक आम नागरिक ‘नसीर’ का नहीं है बल्कि एक अभिनेता ‘नसीरुद्दीन शाह’ का है। आप उनके तेवर देखिये। उनका गुस्सा देखिये। इसी अभिनय ने लोगों को गुस्सा दिलाया है। वे ये बात ट्वीटर पर भी कह सकते थे लेकिन उन्होंने कैमरे को चुना। वे जानते थे कि ये वीडियो देशभर को सुलगा कर रख देगा। इसके बाद वे जयपुर साहित्य सम्मेलन में पहुँचते हैं और अपने विरोध को भी ‘कैश’ करवाने का प्रयास करते हैं।

नसीरुद्दीन शाह कोई आज असुरक्षित महसूस नहीं करते। जब उन्होंने उन्नीस साल की उम्र में अपने से पंद्रह साल बड़ी मुस्लिम महिला से शादी कर ली थी।  शादी के दस माह के भीतर बीवी ‘पुरवीन’ ने एक बेटी को जन्म दिया। जिम्मेदारी उठाने के बजाय नसीर उन्हें छोड़कर नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा चले आए। नसीर ने खुद स्वीकार किया है कि उस दौर में वे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे थे। नसीर को असुरक्षित महसूस करने की कोई बीमारी तो नहीं है।

एक समय उनके पास इतने पैसे भी नहीं होते थे कि सड़क पर गन्ने की चरखी से रस खरीदकर पी ले। फिर वक्त बदला तो झोली में पंद्रह से ज्यादा पुरस्कार और अनगिनत फ़िल्में आ गिरी। दर्शक ने उनको ये सोचकर प्यार नहीं किया कि वे हिन्दू या बेचारे मुस्लिम हैं। दर्शक ने नसीर को उनकी अभिनय क्षमता के लिए प्यार किया।

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हाल ही में इंडियन आइडल का विजेता एक मुस्लिम लड़का घोषित किया गया है।  नसीर साहब की बात में सच्चाई होती तो वह लड़का कभी इस मंच पर पहुँच नहीं सकता था। अब आप इमरान खान को नसीहत देकर डेमेज कंट्रोल की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वह तो अब होगा नहीं।  इसलिए नहीं होगा कि लोग ये जान चुके हैं कि नसीर का बयान सुनियोजित ढंग से दिया बयान है।

URL: Naseeruddin Shah’s remark “I fear for my children” is simply refusing to die.

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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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