वेव ऑफ़ द नेशन’ बन चुकी है ‘मणिकर्णिका’

मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ़ झाँसी 25 जनवरी को प्रदर्शित होने जा रही है। फिल्म के दो प्रोमो देखने के बाद दर्शक आश्वस्त हैं कि उन्हें एक बेहतरीन पीरियड ड्रामा देखने को मिलेगा। उस वक्त देश में राष्ट्रप्रेम का माहौल रहेगा और ऐसे माहौल में ‘मणिकर्णिका’ सिनेमाघरों में कतारें लगवा देगी, इस बात में कोई शक नहीं है। प्रोमो से ही नज़र आ रहा है कि एक सशक्त पटकथा, विश्व स्तरीय ट्रीटमेंट, कंगना रनौत का दमकता अभिनय तय कर चुका है कि फिल्म को बड़ी ओपनिंग लगने जा रही है।

 

फिल्म का दूसरा प्रोमो रिलीज होते ही यू ट्यूब पर इसे 23 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा है। फिल्म के प्रति दर्शकों का क्रेज दीवानगी की हद तक पहुँच गया है। प्रोमो पर आए कुछ कमेंट पढ़कर महसूस हुआ कि युवा पीढ़ी साहस और ऊर्जा से ओतप्रोत मणिकर्णिका के व्यक्तित्व से कितने प्रभावित हैं। एक कमेंट में किसी दर्शक ने लिखा था ‘देखकर आंसू निकल आए, हर हर महादेव।’ ऐसा बहुत कम फिल्मों के साथ होता है कि रिलीज से पहले ही दर्शक भावुक रूप से उनसे जुड़ जाता है। दूसरा प्रोमो स्पष्ट कर देता है कि मणिकर्णिका शर्तिया कामयाब फिल्म है।

 

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जहाँ के वी विजयेंद्र प्रसाद जैसे विलक्षण स्क्रीनप्ले लेखक का नाम जुड़ जाता है, वह फिल्म ऐसे ही आकर्षण का केंद्र बन जाती है। आज की तारीख में विजयेंद्र प्रसाद की हैसियत किसी सुपर सितारे से भी अधिक है। बाहुबली की सफलता ने उनका नाम ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। पीरियड फ़िल्में लिखने में उन्हें महारत हासिल है। मणिकर्णिका में भी उन्होंने सौ प्रतिशत दिया है। निश्चय ही ये फिल्म लिखने से पहले उन्होंने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के सम्पूर्ण जीवनकाल की घटनाओं को पढ़ा होगा, उनके ओजस्वी व्यक्तित्व को समझा होगा। वे बारीकियां ऑन स्क्रीन कंगना की अद्भुत प्रेजेंस में देखी जा सकती है।

 

एक अंग्रेज अफ़सर ने लक्ष्मीबाई के बारे में लिखा था, ‘वो बहुत ही अद्भुत और बहादुर महिला थी। यह हमारी खुशकिस्मती थी कि उसके पास उसी के जैसे आदमी नहीं थे’।  उस अंग्रेज़ का ये कथन उस वीरांगना के व्यक्तित्व का पूरा बखान कर देता है। उसकी तलवार जब फिरंगियों की पसली को चीरती थी तो हड्डियों के चटकने की आवाज़े आती थी। वह इतनी दृढ़ प्रतिज्ञ थी कि ऑस्ट्रेलियन वकील लैंग जॉन के समझाने के बावजूद पेंशन लेने के लिए तैयार नहीं हुई। झाँसी की रानी के व्यक्तित्व के जितने शेड्स हैं, वे सारे विजयेंद्र की लेखनी में झलक रहे हैं।

 

मणिकर्णिका के दो प्रोमो ने उसकी विस्फोटक सफलता तय कर दी है। दूसरे वाले प्रोमो में संवाद हमारा ध्यान खींचते हैं। ख़ास तौर से द्रवित स्वर में कहा गया कंगना का संवाद ‘ हम लड़ेंगे ताकि आने वाली पीढ़ियां आज़ादी का उत्सव मनाए’। कुल मिलाकर मणिकर्णिका प्रदर्शन से पहले ही ‘वेव ऑफ़ द नेशन’ बन चुकी है। पिछले दिनों एक पुराना ‘गीत आंख मारे ओ लड़की’ रिक्रिएट किया गया। फिल्म ‘सिम्बा’ में ये पुराना ट्रेक डाला गया था। कल पता चला कि स्कूलों में छोटे बच्चों से इस गीत पर डांस करवाया जा रहा है। मैं कहना चाहता हूँ कि स्कूल अब उस गीत को भूल जाए और मणिकर्णिका के इस गीत को बच्चों के जेहन में बैठाए। आगामी गणतंत्र दिवस पर यही गीत बजना चाहिए।

 

देश से है प्यार तो

हर पल ये कहना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

URL:  Manikarnika: The Queen of Jhansi also stars Ankita Lokhande, Mohammed Zeeshan Ayyub and Atul Kulkarni in pivotal roles.

Keywords: Manikarnika: The Queen of Jhnasi, Kangana Ranaut, promo

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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