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नोएडा में रिटायर्ड फौजी अफसर के साथ सरकारी अफसर ने की दबंगई, सीसीटीवी में कैद हुई घटना!

प्रेस विज्ञप्ति आदरणीय बन्धुओ ,हम सभी नोएडा के पूर्व सैनिक एवं इस शहर के संभ्रांत नागरिक यहाँ पर ये प्रेस कांफ्रेंस भारतीय थल सेना के पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान व अन्य पर झूठे SC,ST एक्ट व अपहरण, छेड़छाड़ अन्य जघन्य धारा लगाने, उनके साथ मारपीट करने, अपमानित करने, गिरफ्त्तार करने, 76 वर्ष की अवस्था में हथकड़ी लगाकर पुलिस द्वारा कोर्ट ले जाने व् जेल भेजने के विरोध में कर रहे हैं।

कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान 1st पेरा रेजिमेंट के जाबांज अधिकारी रहे है तथा 1965 की प्रसिद्ध हाजीपीर की लड़ाई में भाग लेकर घायल हुए थे। 1971 के बांग्लादेश के युद्ध के दौरान सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व भी किया था! सियाचिन ग्लेशियर के कब्जे के ऑपरेशन में भी कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान का महत्वपूर्व योगदान रहा है। वह थलसेना अध्यक्ष के ADC भी रह चुके है तथा Indian Institute of Mountaineering and Skiing के Principle भी रह चुके हैं। उनको वीरता व अन्य राष्ट्र सेवाओं को लेकर 16 मैडल भी प्रदान किये गए हैं।

सामाजिक क्षेत्र में भी कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान का योगदान रहा है तथा सेवा निवृत्ति के बाद वह गोरखपुर, जौनपुर, आजमगढ़, महू व अन्य पूर्वाचल के नवयुवको को सेना में भर्ती हेतु निशुल्क ट्रेनिंग भी देते है। कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान के पिता प्रोफेसर जे एन सिंह चौहान, गुरु गोरख नाथ मंदिर ट्रस्ट गोरखपुर के ट्रस्टी तथा ट्रस्ट द्वारा संचालित महाराणा प्रताप सिंह शिक्षा परिषद् के 15 वषों तक लगातार अध्यक्ष भी रहे है।

कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान का उनके पड़ोस की मकान संख्या 646 सेक्टर 29 नोएडा में रहने वाले हरीश चन्द्र से विगत 3 वर्षो से हरीश चन्द्र के द्वारा किये गए अवैध कब्जे एवं निर्माण को लेकर विवाद चला आ रहा था! हरीश चन्द्र वर्तमान में ADM मुजफ्फरनगर तथा पूर्व में नोएडा अथारिटी में Dy CEO रह चुका है। अवैध कब्जे एवं निर्माण को लेकर कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने नोएडा अथारिटी में कई बार शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन हरीश चन्द्र ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर कोई कार्यवाही नहीं होने दी।

कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान की पत्नी एवं बच्चे विदेश में है और घर में सहायक राजीव के साथ अकेले रह रहे हैं। विगत 14 अगस्त को कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान सामने के पार्क में बैठकर आगरा जाने के लिए कैब का इन्तजार कर रहे थे। उसी दौरान हरीश चन्द्र ने अपनी पत्नी उषा चन्द्र, सरकारी गनर रोहित नागर व अन्य स्टाफ के साथ पार्क में पहुंचकर कर्नल साहब से दुर्व्यवहार किया, मारपीट की तथा 100 डायल कर पुलिस को बुलाकर अपने रसूख का इस्तेमाल कर कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान को गिरफ्तार करा दिया! जिसकी सारी घटना CCTV में कैद है।

सेक्टर 20 थाने की पुलिस उनको सेक्टर 20 थाने ले गयी तथा उनका मोबाइल छीनकर उनको किसी से भी बात नहीं करने दी गयी! सेक्टर 20 के SHO मनीष सक्सेना व CO-1 अनिल कुमार ने खुद सारी झूठी धाराएँ लगाकर तहरीर स्वयं लिखवाई! बाद में सेक्टर 20 थाने की पुलिस कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान के घर गयी तथा घर से उनके घरेलू सहायक ‘राजीव’ व फ़ौज में भर्ती को इच्छुक दो अभियार्थी विजय एवं त्रिपाठी जो कि उनसे मिलने गोरखपुर से आये हुये थे और जिनका दूर से दूर तक इस घटना से कोई भी सरोकार नहीं था। इन तीनो पर भी SC,ST एक्ट व अपहरण, छेड़छाड़ अन्य जघन्य धाराएँ लगाकर कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान के साथ जेल भेज दिया।

बंधुओ इस घटना से हम सभी पूर्व सैनिक स्तब्ध है और हम उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी से मांग करते है

1. सम्पूर्ण घटना की न्यायिक जांच कराई जाये

2. कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान, उनके घरेलू सहायक राजीव व अन्य विजय त्रिपाठी पर लगाई गयी SC & ST एक्ट व अपहरण, छेड़छाड़ अन्य सारी झूठी धराये हटाई जाएँ तथा तुरंत रिहा किया जाए

3. हरीश चन्द्र एवं उनकी पत्नी उषा चन्द्र, सरकारी गनर रोहित नागर व अन्य स्टाफ को कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान के साथ मारपीट के आरोप में मुकदमा दर्ज कर तुरंत गिरफ्तार किया जाए

4. हरीश चन्द्र ADM मुजफ्फ़र नगर घटना के समय नोएडा में क्या कर रहे थे जबकी उनकी ड्यूटी मुजफ्फरनगर में थी इसकी गहन जांच की जाए

5. हरीश चन्द्र के द्वारा किया गया कराया गए अवैध निर्माण को ध्यस्त कराया जाए

6. हरीश चन्द्र के खिलाफ महंगे सेक्टर में फ्लैट खरीदने व कराये गए महंगे निर्माण को लेकर आय से अधिक संपत्ति की जांच की जाए

7. सेक्टर 20 थाने के थानेदार मनीष सक्सेना, CO-1 अनिल कुमार तथा संलिप्त पुलिस की CCTV की फुटेज व अन्य सबूत होने होने बाबजूद बगैर जांच किये तथा बिना कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान का पक्ष सुने, दबाब में आकर एकतरफ़ा कार्यवाही करने, झूठी धाराएं लगाने, दुर्व्यवहार करने, हथकड़ी लगाकर गिरफ्तार करने, 76 वर्ष के भूतपूर्व सैन्य-अधिकारी को सरेआम अपमानित करने, प्रताड़ित करने के आरोप में नौकरी से बर्खास्त किया जाए

समस्त भूतपूर्व सैनिक एवं अधिकारी

इंडिया स्पीक्स की टिप्पणी

चुभेगा, लेकिन सोचिए!

नोएडा के एक पूर्व सैन्य अधिकारी पर SC/ST एक्ट का झूठा आरोप एक पूर्व नौकरशाह ने लगाया और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके ले गयी। लेकिन उस झूठे अधिकारी की पोल इलाके में लगे CCTV की फुटेज ने खोल दी।

बुजुर्ग अधिकारी अभी भी जेल में हैं। सीसीटीवी फुटेज India Speaks Daily के यूट्यूब चैनल पर डालने के बाद उन पर से SC/ST एक्ट की धाराएं हटा ली गयी हैं। उम्मीद है कल उनकी जमानत भी हो जाए।

लेकिन याद रखिए एक भी दल, एक भी राजनेता, एक भी सांसद इस एक्ट के विरोध में नहीं उतरा। अलबत्ता राहुल गांधी, मायावती, अखिलेश, लालू, सीताराम येचुरी, ममता, रामविलास, जेएनयू के टुकड़े-टुकड़े गैंग, तथाकथित दलित एक्टिविस्ट, लुटियन पत्रकार-सभी ने आंदोलन कर मोदी सरकार पर दबाव बनाया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल कर इसे फिर से बहाल करे।

मोदी सरकार ने वेट किया, लेकिन इस एक्ट से पीड़ित, और आज सोशल मीडिया पर शोर मचाने वाले समाज से कोई भी संगठन या व्यक्ति सड़क पर नहीं उतरा, किसी ने तथाकथित दलित आंदोलन की तरह आंदोलन का रास्ता अख्तियार नहीं किया, फिर सरकार कब तक आपके सड़क पर उतरने की प्रतीक्षा करती? उस पर दलित विरोधी का ठप्पा लगता चला जा रहा था। 9 अगस्त को देश भर में आंदोलन की धमकी दी गयी थी।

सरकार को मौन और मुखर समाज में से किसी एक को चुनना था! मां भी तब तक दूध नहीं पिलाती, जब तक कि बच्चा रोए न! और यह तो वोट से चुनी जाने वाली सरकार है! उसने मुखर समाज के दबाव में रास्ता चुना। मौन समाज एक्ट बदले जाने तक मौन ही रहा! उसके बाद भी फेसबुकिया चेतना जगी, सड़क पर उतरने का साहस तब भी नहीं हुआ।

सरकार जन-दबाव, संख्या बल और धारणा के आधार पर चलती है। सवर्ण समाज की संख्या तो कम है ही, वह जन-दबाव का रास्ता भी भूल चुका है। साथ ही, सर्वण भी पीड़ित होते हैं, यह धारणा भी इतने सालों बाद वह स्थापित नहीं कर सका है। उस पर शोषक की धारणा चस्पां कर दी गयी है, जबकि वह इस एक्ट के कारण आज सर्वाधिक पीड़ितों में शामिल है!

याद रखिए, जो समाज सरकार के भरोसे बैठती है, वह शनै:-शनै: मरती चली जाती है। जो समाज सरकार को दबाव में ले आती है, वह परिवर्तन का चालक बन जाती है। यही सच है। इसलिए मोदी सरकार को कोसने की जगह खुद के समाज के ठेकेदार, संगठन, नेता, सांसद को घेरिए और पूछिए कि उसने इस एक्ट के विरोध में संसद से सड़क तक आवाज क्यों नहीं उठाई?

पूछिए, क्योंकि रास्ता पूछने पर ही निकलेगा, हाथ पर हाथ धर कर बैठने और रात-दिन मोदी सरकार को कोसने से कुछ नहीं होगा। सरकार तब सुनेगी जब आपके प्रतिनिधि बोलेंगे। अपने प्रतिनिधियों से पूछिए। और खुद से भी पूछिए कि कभी अपने कार्यकाल, अपनी दुकान से एक दिन की भी छुट्टी ली है आपने SC/ST एक्ट के विरोध में सड़क पर उतरने करने के लिए?

#IndiaSpeaksDaily की टीम को खुशी है कि उसने कम से कम एक बुजुर्ग सैन्य अधिकारी को इस झूठे एक्ट से बाहर निकालने में एक गिलहरी की भूमिका अदा की है। आप क्या कर रहे हैं, सिवाए अन-गाइडेड मिसाइल की तरह अपनी भड़ास निकालने के? चुभेगा, लेकिन सोचिए!

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