अब चिट फंड के जरिए आम आदमी का पैसा नहीं लूट सकेंगी कंपनी, मोदी सरकार ने कसी लगाम!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक बार फिर पुरान कानून में संशोधन कर जनहित में फैसला लिया है। मोदी सरकार ने शारदा और रोज वैली जैसी फर्जी चिट फंड कंपनियों पर लगाम कसने के लिए अनरेगुलेटेड डिपॉजित स्कीम्स प्रतिबंध बिल में संशोधन करने की मंजूरी दे दी है। इस संशोधन से किसी भी निवेशकों का पैसा न तो फंसेगा न ही डूबेगा। इस संशोधन के तहत गैर पंजीकृत डिपॉजिट स्कीम वाली कंपनियां न केवल अवैध मानी जाएंगी बल्कि निवेशकों के पैसे फंसने की सूरत में उसकी संपत्ति बेचकर पैसे लौटाए जाएंगे। यह जानकारी केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसले के बारे में बताते हुए दी है।

गौरतलब हो कि शारदा चिट फंड के 40 हजार करोड़ रुपए घोटाले की जांच से डरकर ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इतना बड़ा बखेरा खड़ा किया था। शारदा चिट फंड घोटाले को लेकर सीबीआई और ममता बनर्जी सरकार के बीच संघर्ष के बीच मोदी सरकार की कैबिनेट ने चिट फंड (पोंजी) स्कीम पर लगाम कसने के उद्देश्य से यह बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध बिल, 2018 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सभी गैर पंजीकृत डिपॉजिट स्कीम अवैध मानी जाएगी। साथ ही इसके संचालकों संपत्ति जब्त करने के भी प्रावधान किए गए हैं।

कैबिनेट में लिए गए फैसले के बारे में जानकारी देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि अब फ्री-लांसिंग नहीं होगी और गैर पंजीकृत स्कीम चलाने वालों की संपत्ति बेच कर निवेशकों का पैसा वापस कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बिल के तहत यदि कोई व्यक्ति ऐसी स्कीम का विज्ञापन जारी करेगा तथा लोगों को आकर्षित करने के लिए किसी बड़ी हस्ती को ब्रांड अम्बैसडर बनाएगा, तब भी कार्रवाई की जाएगी।

प्रसाद ने बताया कि सरकार ऐसी कंपनियों का ऑनलाइन डेटाबेस बनाएगी। मालूम हो कि साल 2015 से 2018 तक सीबीआई ने चिंट फंड के मामले में कुल 166 केस दर्ज किए हैं। इसमें सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सामने आए हैं। प्रसाद ने कहा कि इन दिनों पश्चिम बंगाल का जो मामला चर्चा में है वह भाजपा सरकार के आने से पहले का है। जो कांग्रेस और वाम दल आज ममता बनर्जी के साथ खड़े दिखते हैं वही लोग उस समय सीबीआई जांच की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे।

आपको बता दें कि वर्तमान में 9 रेगुलेटर विभिन्न डिपॉजिट स्कीम की निगरानी करते हैं. जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी), कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें शामिल हैं।
रविशंकर प्रसाद ने बिल के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि इस बिल में तीन प्रकार के अपराधों और उनकी सजा निहित है। इसके तहत अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स को चलाना (विज्ञापन देना, प्रमोट और ऑपरेट करना या उसके लिए धनराशि लेना) अपराध माना जाएगा। इसके साथ रेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम में धोखे से डीफॉल्ट करना, और जान-बूझकर झूठे तथ्य देकर अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम में निवेश करने के लिए डिपॉजिटर्स को गलत तरीके से उकसाना शामिल है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की सियासत में भूचाल लाने वाले शारदा और रोज वैली चिट फंड घोटाला साल 2013 में सामने आया था। दरअसल, इन दोनों कंपनियों ने लाखों निवेशकों से दशकों तक हजारों करोड़ रुपये वसूले, जिसके बदले में उन्हें बड़ी रकम वापस देने का वादा किया.लेकिन जब धन लौटाने की बारी आई तो भुगतान में खामियां होने लगी, और लाखों निवेशकों का पैसा डूब गया।

URL : Modi cabinet amended the unregulated deposit schemes bill !

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