केंद्र सरकार ने जेएनएमएफ को तीन मूर्ति भवन खाली करने का दिया आदेश!

स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल होने का मतलब यह नहीं हैं कि स्वतंत्रता के बाद देश को अपना जागीर समझ लें। सयोंग से कांग्रेस में खासकर नेहरू गांधी परिवार ने देश को अपना जागीर समझ लिया है। अब जब कांग्रेस की सत्ता नहीं रही और आने की संभावना भी नहीं दिखती है तो वह हर उस संपत्ति पर अपना अधिकार करना चाहती है जो नेहरू के सम्मान में सरकारी संपत्ति घोषित है। नेहरू का निवास रहा तीन मूर्ति भवन के साथ भी यही हो रहा है। गांधी परिवार इस पर अपना कानूनी आधिपत्य चाहती है। तभी तो उसने तीन मूर्ति भवन खाली करने से मना कर दिया जिसमें सोनिया गांधी के नेतृत्व में जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड चल रहा है। केंद्र सरकार ने इसे खाली करने का नोटिस जारी किया है लेकिन जेएनएमएफ के सचिव इस मामले में कोर्ट जाने की धमकी दे रहे हैं।

मुख्य बिंदु

* तीन मूर्ति भवन हड़पने का पूरा इतंजाम कर चुका है गांधी परिवार, सोनिया गांधी के नेतृत्व में चल रहा जेएनएमएफ

* अब जब खाली करने को कहा गया है तो जेएनएमएफ के सचिव जेएन दुबे सरकार का आदेश मानने से किया इनकार

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने तीन मूर्ति भवन में चल रहे जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड को तीन मूर्ति भवन खाली करने का नोटिस दे रखा है। लेकिन जेएनएमएफ के सचिव जेएन दुबे उसे खाली करने को तैयार ही नहीं हैं। जबकि नेहरू स्मृति संग्रहालय और पुस्तकालय के निदेशक शक्ति सिन्हा का कहना है कि कि जेएनएमएफ यहां अवैध तरीके से चल रहा है। उनका कहना है कि उसका दस्तावेज भी पूरा नहीं है।

मालूम हो कि जेएनएमएफ के अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। उन्हीं की अध्यक्षता में यह फंड अवैध तरीके से अपना काम तीन मूर्ति भवन में काम कर रहा है। जब सरकार को यह पता चला कि जेएनएमएफ अवैध तरीके से चल रहा है तो आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने 11 सितंबर को उसे तीन मूर्ति भवन खाली करने का नोटिस जारी कर दिया। लेकिन इस संस्था के सचिव जेएन दूबे इसे खाली करने को राजी नहीं हैं। उलटे उन्होंने इस मामले में सरकार को कोर्ट जाने की धमकी दी है। उनका कहना है कि इस मामले में सरकार का आदेश नहीं माना जाएगा।

इससे साफ जाहिर होता है कि गांधी परिवार तीन मूर्ति भवन को अपना जागीर समझ रखा है। इससे यह साबित होता है कि तीन मूर्ति भवन को हड़पने के उद्देश्य से इस संस्था को उसमें स्थापित किया गया था। ताकि लोगों की नजरों में तो यह नेहरू के नाम पर एक संग्रहालय और पुस्तकालय है लेकिन इस पर आधिपत्य कांग्रेस परिवार का बना रहे। जबकि नेहरू स्मृत संग्रहालय और पुस्तकालय एक स्वयत्त संस्था है जिसके लिए सरकार हर साल लाखों रुपये बचट आबंटित करती है। जब सरकार का बजट इस्तेमाल होता है तो आधिपत्य भी तो सरकार ही होगा। लेकिन गांधी परिवार यह नहीं चाहता। वह चाहता है कि सरकारी बजट से चलने वाली इस संस्था पर उसी का आधिपत्य सतत कायम रहे।

तीन मूर्ति पर कांग्रेस समझती है अपना पुश्तैनी अधिकार पढ़िए नीचे

कल तक जो रामजन्म भूमि पर अस्पताल, शौचालय आदि बनाने की बात करते थे वो आज तीन मूर्ति भवन में दूसरे प्रधानमंत्रियों को जगह भी नहीं देना चाहते!

URL: Modi Government ordered JNMF to evacuate teen murti bhavan

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