सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के लाइव प्रसारण करने की राह पर मोदी सरकार!

पारदर्शी तरीके से काम करने की जहां तक बात है इसको लेकर मोदी सरकार शुरू से ही सक्रिय रही है। उन्होंने अपनी हर योजना में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। पारदर्शिता के प्रति मोदी की सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को जीवंत प्रसारण करने पर विचार करना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि क्या सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई को लाइव प्रसारित किया जा सकता है कि नहीं?

मुख्य बिंदु

* काम में पारदर्शिता को प्राथमिकता देने को प्रतिबद्ध मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट पूछी उसकी राय

* राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर के एक विधि छात्र ने दायर की थी इस संदर्भ में एक याचिका

यहां सवाल उठता है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक खुद सक्रियता क्यों नहीं दिखाई? जब लोक सभा और राज्य सभा जैसी नीति और विधि निर्मात्री संस्था के कार्यों का जीवंत प्रसारण हो सकता है तो भी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का क्यों नहीं? सरकार के हर कार्यकारी मामले में हस्तक्षेप करने वाला सुप्रीम कोर्ट अपने मामले में क्यों मौन रहा? कारण साफ है अभी तक कांग्रेस ऐसा नहीं चाहती थी। अब ये बात किसी से छिपी नहीं रही कि सुप्रीम कोर्ट के कई जज आज भी कांग्रेस के प्रति अपनी वफादारी दिखाते रहे हैं। पारदर्शी तरीके से कोई काम नहीं करने का तो कांग्रेस का इतिहास ही रहा है। इसलिए अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की लाइव प्रसारण के बारे में अभी तक विचार ही नहीं किया।

अब जब मोदी सरकार ने इसकी पहल की है तो निश्चित रूप से वह इसे अंजाम तक भी पहुंचाएगी। लेकिन सवाल खड़ा होता है कि सुप्रीम कोर्ट स्वयं इस मामले में क्या चाहता है। वैसे मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा न्यायमूर्ति एएम खानविकर तथा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली खंड पीठ ने इस मामले में पक्षकार को अटॉर्नी जनरल को अपनी सलाह देने को कहा है। ताकि वे इस सलाह के आधार पर कोर्ट की कार्यवाही के लाइव प्रसारण के लिए बेहतर दिशानिर्देश तैयार कर सकें।

इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट से पूछे सवाल के तहत अटॉर्नी जनरल ने बताया था कि इसमें सुप्रीम कोर्ट को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यह पहली बार भारत में ही नहीं हो रहा है। विश्व के कई देशों में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के लाइव प्रसारण की व्यवस्था है। पारदर्शिता को प्राथमिकता बनाने के तहत ही पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और ट्रिब्युनल समेत हर जगह ऑडियो सहित सीसीटीवी कैमरा लगाने की मंजूरी दे दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का लाइव प्रसारण करने के संदर्भ में लॉ के ही एक छात्र ने याचिका दायर की थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के परिसर में ही लाइव प्रसारण करने के लिए अलग से एक रूम बनवाने तथा वहां लॉ इंटर्न को प्रवेश देने का अनुरोध किया था। यह याचिका राष्ट्री विधि विश्वविद्यालय जोधपुर के एक छात्र नेशनल स्वप्निल त्रिपाठी ने दायर की थी

URL: modi government tells SC to think about live streaming of its proceedings

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