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मोदी सरकार के चार साल: माओवाद से निपटने के लिए प्रभावित 44 जिलों में सरकार बढ़ाएगी सड़क संपर्क!

केंद्र की मोदी सरकार अब पूरे देश में मूलभूत ढांचों को मजबूत करने पर बल देना शुरू कर दिया है। सरकार ने अगने साल तक अपने इस लक्ष्य को पूरा करने का संकल्प लिया है। हिंदुस्तान टाइम्मस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार ने अगले साल तक पूरे देश में डेढ़ लाख करोड़ रुपये की 200 सड़क परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मोदी सरकार 2019 के आम चुनाव से पहले ही इन्फ्रस्ट्रक्चर क्षेत्र को ही देश की जनता के सामने अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहती है।

मुख्य बिंदु

अगले साल तक पूरे देश में आधारभूत संरचनाओं को मजबूत कर देगी केंद्र सरकार

माओवादी प्रभावित देश के 44 जिलों में सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने दिए हैं 11,000 करोड़

सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री ने अगले साल तक ज्यादा निवेश वाली परियोजनाओं और सामरिक द़ृष्टि से अत्यधिक जुड़ाव वाली 50 परियोजनाओं के उद्घाटन करने की योजना तैयार कर ली है। मंत्रालय के ही एक अधिकारी का कहना है कि इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तहत चल रही 416 परियोजनाओं की सूची से एक खाका भी तैयार कर लिया है। 3.26 लाख करोड़ लागत वाली ये सारी परियोजनाएं पूरी होने वाली हैं। इतनी परियोजनाओं को मंजूरी मिलने का प्रभाव भी दूरगामी होगा। इससे न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा बल्कि इससे रोजगार के बेशुमार अवसर पैदा होंगे। वैसे भी इन चार सालों में आधारभूत संरचनाओं का कायाकल्प हुआ है और इससे कई प्राकर की सुविधाएं मिली हैं।

केंद्र सरकार की इन परियोजनाओं से जो राज्य सबसे ज्यादा लाभान्वित हुए हैं उनमें से पहले स्थान पर है महाराष्ट्र। यहां 52 निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए 38,029 करोड़ रुपये निवेश किया गया है। 37,926 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन 45 परियोजनाओं के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है। तीसरे स्थान पर गुजरात है जहां 24,928 करोड़ की लागत से 27 परियोजनाएं निर्मानाधीन है। राजस्थान चौथे नंबर पर है जहां 21,292 करोड़ की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। पांचवे नंबर पर मध्य प्रदेश है यहां 16,245 करोड़ रुपये की लागत से 26 परियोजनाएं चल रही हैं। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इन विकास परियोजनाओं में से अधिकांश अपने अंतिम चरण में है यानि की पूरी होने वाली है। उनका कहना है कि साल 2019 के मार्च तक 200 विकास परियोजनाओं को देश को समर्पित कर दिया जाएगा। इनमें से अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है।

2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के सत्ता में आने से पहले तक देश का आधारभूत ढांचा भूमि अधिग्रहण से लेकर पॉलिसी पैरेलेसिस तक जैसी कई समस्याओं से त्रस्त था। लेकिन जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं तब से जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजक्ट्स में अदभुत बदलाव आया है। सता में आते ही मोदी सरकार ने सड़क निर्माण को प्राथमिक क्षेत्र में रखा। उन्होंने पहले की 9 किमी की तुलना में प्रतिदिन 45 किमी सड़क निर्माण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर दिया। ,

केंद्र सरकार ने भारतमाला परियोजना जैसे महत्वपूर्ण योजनाओं में निवेश करने का फैसला किया है। इसके लिए साल 2022 की समयसीमा भी तय कर दी है। कहने का तात्पर्य यह है कि इतने दिनों में 24,800 किमी को जोड़ना है। इससे जहां असंख्य नौकरियों के अवसर मिलेगे वहीं सीमेंट और लोहे जैसे कच्चे माल की मांग भी बढ़ेगी। भारतमाला के साथ ही सरकार ने सागरमाला जैसी परियोजना में भी निवेश किया है। सरकार तटीय आर्थिक क्षेत्र का विकास कर देश में समुद्री व्यापार को बढ़ावा देना चाहती है। विकास के आधार माने जाने वाले आधारभूत ढाचों को मजबूत करने पर पहले की किसी भी सरकार ने इतना ध्यान नहीं दिया। लेकिन मोदी सरकार ने आते ही इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिक क्षेत्र में रखकर अपना इरादा जता दिया।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नॉर्थ-ईस्ट स्टेट्स पर भी इससे पहले किसी सरकार ने शायद ही इतना ध्यान दिया हो, लेकिन मोदी सरकार ने भी इसे प्राथमिकता दी है। उन्होंने इन इलाकों में कहीं से भी मूलभूत ढांचो को मजबूत करने के लिए बहुत अधिक निवेश किया है। पिछले साल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रह्मपुत्र नदी पर 9 किमी. का सबसे लंबा पुल का उद्धाटन किया। मोदी के ही निर्देश पर भारतीय रेल ने इस इलाके के सभी सातों राज्यों की राजधानी शहर को आपस में जोड़ने की योजना तैयार की है। रेलवे ने इसके 40,000 करोड़ रुपये निवेश करने का फैसला लिया है। हम सबको मालूम होना चाहिए कि उत्तर पूर्व के सभी राज्य देश के लिए न केवल सामरिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

भारतीय रेल की सफलता न सिर्फ उत्तर-पूर्व राज्यों तक सीमित है बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण हिथेर्टो जैसे एकांत क्षेत्र तक रेलवे पहुंचने में सफल रही है। रेलवे ने तो माओवादी प्रभावित छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा जैसे इलाकों में भी अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया है। केंद्र सरकार ने माओवादी प्रभावित 44 जिलों को सड़कों से जोड़ने के लिए 11.000 करोड़ रुपये का फंड दिया है। ऐसे में मोदी सरकार का यह नारा सब का साथ सब का विकास कोई अतिशयोक्ति नहीं हैं।

URL: modi government will complete 200 road projects by 2019

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