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तीन हिस्से में बंटने जा रहा है जम्मू-कश्मीर राज्य!

जम्मू-कश्मीर समस्या के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कितने गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे अपने पहले कार्यकाल में इसे जड़मूल से खत्म कर देना चाहते हैं। इसलिए हो सकता है कि प्रधानमंत्री स्वयं ही एक-आध महीने में जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सों में बांटने की घोषणा करें। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रधानमंत्री कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से प्रकाशित खबर के मुताबिक मोदी सरकार जम्मू एवं कश्मीर को बांटकर तीन केंद्र प्रशासित प्रदेश बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। अगर सब कुछ रणनीति के अनुरूप सही चलता रहा तो देश के मानचित्र पर बहुत जल्द ही जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के रूप में नया केंद्र प्रशासित प्रदेश प्रकट हो जाएगा।

वैसे तो जम्मू-कश्मीर की समस्या को जड़मूल से खत्म करना शुरू से ही भाजपा और संघ की प्राथमिकता रही है। तभी तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान की लाख दगाबाजी के बावजूद इस समस्या को खत्म करने का प्रयास किया। माना जाता है कि अगर वाजपेयी को दूसरा टर्म मिला होता यह समस्या भी सुलझ गई होती। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय में उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि मोदी की इस रणनीति के बारे में संघ को भी अवगत करा दिया गया है और वहां से सहमति भी मिल गई। सूत्रों की माने तो मोदी की इस रणनीति को क्रियान्वित करने में स्ययं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल व्यस्त हैं। मोदी सरकार की रणनीति जम्मू एवं कश्मीर को बांटकर जम्मू, कश्मीर तथा लद्दाख को केंद्र प्रशासित क्षेत्र बनाने की है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार से समर्थन वापस लेना तथा सत्यपाल मलिक को जम्मू एवं कश्मीर का राज्यपाल बनाकर भेजना इसी रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बिंदु

* जम्मू एवं कश्मीर को बांट कर तीन केंद्र प्रशासित क्षेत्र बनाने की तैयारी कर रही है मोदी सरकार

* सत्यपाल मलिक क जम्मू एवं कश्मीर का राज्यपाल बनाना केंद्र सरकार की इसी रणनीति का हिस्सा है

जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं भारतीय जनता पार्टी का हस्तक्षेप जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ता रहा है। 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी निर्णायक स्थित में पहुंची, फिर उसके बाद पहली बार पिपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीपी) के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई। कुछ दिन पहले ही पीडीपी प्रमुख एवं प्रदेश की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। और अब मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के लिए नई रणनीति बनाने में जुट गई है। मोदी सरकार की जम्मू-कश्मीर को तीन भागों में बांटने की रणनीति का खुलासा टाइम्स ऑफ इंडिया ने भले ही अभी किया हो लेकिन इंडिया स्पीक्स के प्रधान संपादक संदीप देव ने जम्मू-कश्मीर में BJP-PDP सरकार के गठन के समय ही लिख दिया था कि मोदी सरकार भविष्य में इस राज्य को तीन हिस्से में बांटने की योजना पर पहला कदम बढ़ा चुकी है। उनकी लिखी बात आज अक्षरस: सत्य साबित होने जा रही है।

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मोदी सरकार का मानना है कि जम्मू-कश्मीर को तीन केंद्र प्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर, एक ही समय में कई समस्याओं ने निपटा जा सकता है। वैसे भी भाजपा यह जानती है कि वह अपने दम पर कभी जम्मू-कश्मीर में सरकार नहीं बना सकती है। जम्मू-कश्मीर में सत्ता में आने के लिए कभी महबूबा मुफ्ती की पीडीपी से तो कभी फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फेंस के साथ राजनीतिक गठबंधन करना भाजपा की मजबूरी बनी रहेगी है। इस हालात में भाजपा अनुच्छेद 370 को खत्म करने की कोशिश नहीं कर सकती है। प्रधानमंत्री दफ्तर के एक अधिकारी का कहना है मोदी सरकार 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले इस रणनीति को लागू करने वाली है। बहुत ज्यादा संभावना है कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं अगले कुछ ही महीनों में जम्मू-कश्मीर को तीन केंद्र प्रशासित प्रदेशों में बांटने की घोषणा कर सकते हैं।

यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले जम्मू-कश्मीर को तीन केंद्र प्रशासित प्रदेशों में बांटने की अपनी योजना में सफल हो जाते है तो तो उन्हें लोकसभा चुनावों में न केवल जम्मू,कश्मीर और लद्दाख में इसका लाभ मिलेगा बल्कि पूरे देश में इसका लाभ मिलेगा, और वे एक बार फिर दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापस आ जाएंगे।

भौगोलिक दृष्टि से जम्मू-कश्मीर एक बहुत संवेदनशील राज्य है। चूंकि यह राज्य पाकिस्तान और चीन के नजदीक है, इसलिए इस क्षेत्र में घुसपैठ और आतंकवादी हमले का डर हमेशा होता है। केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य के स्थानीय राजनीतिक दलों के स्वार्थ के कारण कोई बड़ा कदम नहीं उठा पाती है। सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार का मानना है कि यदि एक बार जम्मू, कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जाएंगे तो स्थानीय राजनीतिक दलों का हस्तक्षेप भी काफी हद तक खत्म हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर एक संघ शासित प्रदेश बनने के बाद केंद्र सरकार अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की प्रक्रिया में तेजी ला सकती है।

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वर्तमान में, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, लक्षद्वीप, पुडुचेरी और दिल्ली भारत के सात केंद्र शासित प्रदेश हैं। भारत के अन्य राज्यों में अपनी निर्वाचित सरकारें हैं लेकिन केंद्र शासित प्रदेशों को सीधे केंद्र सरकार द्वारा शासित किया जाता है। भारत के राष्ट्रपति प्रत्येक संघ शासित प्रदेश के लिए सरकारी प्रशासक या उप राज्यपाल को नियुक्त करते हैं। तीन केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर केंद्र सरकार सभी तीन संघ शासित प्रदेशों को प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित कर सकेगी। जम्मू-कश्मीर को तीन केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद क्षेत्रीय राजनीति पूरी तरह से राज्य में खत्म हो जाएगी और क्षेत्र हमेशा के लिए सुरक्षित रहेगा। मोदी सरकार के इस कदम से अलगाववाद का दायरा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

पिछले कई दशकों से लद्दाख को एक संघ शासित प्रदेश बनाने की मांग आ रही है। लद्दाख की सीमा पाकिस्तान और चीन के नजदीक है। लद्दाख के बौद्ध लद्दाख को एक संघ शासित प्रदेश बनाने के लिए लंबे समय से मांग कर रहे हैं। लेह जिला बौद्धों का प्रभुत्व है, जबकि कारगिल में 99 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। 1979 से पहले, लद्दाख एक जिला था लेकिन फिर इसे दो जिलों में बांटा गया था। बौद्ध यहां कहते हैं कि लद्दाख का यह विभाजन सांप्रदायिक आधार पर किया गया था। लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के अध्यक्ष त्सरिंग सिमफेल का कहना है कि जम्मू-कश्मीर राज्य फिर से बनाया जाना चाहिए। नई व्यवस्था के तहत, जम्मू-कश्मीर को अलग राज्य की स्थिति दी जानी चाहिए और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाना चाहिए। जबकि मुसलिम प्रभुत्व वाले कारगिल के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर के साथ लद्दाख भारत का हिस्सा होना चाहिए।

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लद्दाख बौद्ध संघ का कहना है कि यह सांप्रदायिक मांग नहीं है। हम लद्दाख के लिए संघ शासित प्रदेश की स्थिति की मांग करते हैं क्योंकि इसके दो जिलों, लेह और कारगिल को शेख अब्दुल्ला ने सांप्रदायिक आधार पर 1979 में विभाजित किया था। हम इन जिलों को एकजुट करना चाहते हैं क्योंकि सांप्रदायिक सद्भाव स्थापित किया जाएगा। यदि बौद्ध-प्रभुत्व लेह और मुसलिम प्रभुत्व वाले कारगिल एक बन गया। “सिम्फेल के मुताबिक, उनकी मांग न तो राष्ट्रीय है।

जम्मू-कश्मीर के सभी तीन क्षेत्रों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती है, अलग-अलग संस्कृति है, अलग-अलग संप्रदायों के लोग हैं। यहां तक कि भौगोलिक संरचना भी भिन्न है

साभार: खबर सन्दर्भ टाइम्स ऑफ़ इंडिया

URL: Modi Govt Preparing for Partition of Jammu-Kashmir and Making Jammu, Kashmir and Ladakh Union Territory

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