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मोदी, योगी, आर एस एस, सनातन और भारत : एक विश्लेषण

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आदित्य जैन. 2012 में बीजेपी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रही थी । सुषमा स्वराज , आडवाणी , नितिन गडकरी आदि मोदी का घोर विरोध कर रहे थे । फिर भी मोदी को भारतीय जनता और जेटली समूह सपोर्ट कर रहे थे । फिर भारत के संपूर्ण संत समाज ने 2012 में पतंजलि योगपीठ के एक सम्मेलन में नरेंद्र मोदी को भारत का भावी प्रधानमंत्री घोषित कर दिया था ।

स्वामी रामदेव ने कहा था कि मोदी नहीं , तो बीजेपी नहीं। तब जाकर मोदी को बीजेपी ने पीएम उम्मीदवार के रूप में स्वीकार किया था । उसी प्रकार आज भी मोदी और अमित शाह को याद रखना चाहिए कि योगी को दरकिनार करके आप न सिर्फ यूपी में हारेंगे , बल्कि 2024 में भी पूर्ण बहुमत से नहीं जीत पाएंगे । योगी नहीं तो यूपी में पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी नहीं। 

भारतीय जनता पार्टी यह ठीक तरह से समझ ले कि सनातन के प्रतिनिधि और गोरख परंपरा के जीवंत प्रतिरूप योगी आदित्यनाथ जी संपूर्ण भारतीय जनमानस के हृदय में निवास करते हैं । योगी आदित्यनाथ की अवहेलना करके बीजेपी अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारेगी । भारत में नाथ परंपरा के जीवंत रूप योगी आदित्यनाथ की रक्षा स्वयं गोरखनाथ करते हैं। ऐसा विश्वास लोगों में है ।

अगर योगी की अनदेखी बीजेपी ने की तो बीजेपी यूपी की राजनीति से भी मात खाएगी और देश की राजनीति से भी, और कहीं अगर योगी का समर्थन अन्य अनेक आध्यात्मिक और धार्मिक संगठनों सहित देश के संत समाज ने कर दिया तो बीजेपी को पहले की तरह ही घुटने टेकने पड़ेंगे , जैसे बीजेपी के सांगठनिक नेतृत्व को नरेंद्र मोदी जी को न चाहने के बावजूद भी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना पड़ा था ।

खैर बाद में, पूरे संगठन ने जोर लगाकर नरेंद्र मोदी और बीजेपी को जिताने के लिए कार्य किया था। इसलिए मोदी , अमित शाह और उनके सलाहकारों को देश के मन को अभी से भांप लेना चाहिए। बीजेपी , योगी जी को साथ में लेकर चले, इसी में सबका हित है ।  वर्तमान में योगी आदित्यनाथ ही राजनीति में ऐसे व्यक्तित्व हैं , जो पंच मक्कारों के गिरोह का तोड़ रखते हैं ।

अन्य बीजेपी नेता चाहकर भी इन मक्कारों का सामना खुलकर नहीं कर पाते हैं । वर्तमान समय में मार्क्स , माओ , मीडिया , मिशनरी , लेनिन , कन्फ्यूसियस , छद्म नारीवाद आदि का बहुत ही जहरीला मिश्रण विचारधारा के रूप में युवाओं को परोसा जा रहा है । युवाओं को सतही तौर पर लगता है कि वह कोई स्वादिष्ट व पौष्टिक दूध पी रहे हैं , लेकिन उसकी तलहटी पर जहर मिला हुआ है ।

जब तक दूध ख़तम होगा अर्थात् जब तक जवानी ख़तम होगी , आप जहर से बर्बाद हो चुके होंगे। आज योगी गोरखनाथ के चरित्र की आवश्यकता है , जो इन वामपंथियों , कामपंथियों, जेहादियों और बाध्य धर्मांतरण षड्यंत्रकारियों की विचारधारा की सच्चाई सबके सामने रख सके । इस हेतु गोरखनाथ के प्रतिनिधि के रूप में योगी आदित्यनाथ ही भारतीय जनता के पास हैं। यूं तो आर एस एस से योगी जी को सपोर्ट मिलता है , लेकिन फिर भी कुछ मतिभ्रम आर एस एस को हो रहा है, ऐसा अन्य आलोचकों का मानना है ।

कुछ जानकार कह रहें हैं कि देश भक्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का शत्रु बोध समाप्त होता जा रहा है । आदरणीय मोहन भागवत जी हेडगेवार और गोलवलकर जी के दर्शन को भूल रहे हैं। सनातनियों के हितों को भूलते जा रहे हैं। बंगाल में हिन्दुओं की हत्या पर चुप ; उड़ीसा की पुरी मंदिर के जमीन को हड़पने पर चुप ; तथाकथित उदारवादियों से आर एस एस को प्रामाणिकता का ठप्पा क्यों चाहिए ? नरेंद्र मोदी जी भी आंख मूंद लिए हैं।

शायद किसी मुगालते में हैं कि हिंदुओ को तो काटने के लिए ही बनाया गया है और बी जे पी के अलावा सनातनियों के पास कोई विकल्प नहीं है । लेकिन उपर्युक्त बात को पूरी तरह से मैं ठीक नहीं मानता हूं । माननीय प्रधानमंत्री जी की नीयत बहुत साफ है और उनका एकमात्र एजेंडा देश हित ही है। इस देश हित की प्राप्ति कैसे हो , इसकी दृष्टि भिन्न हो सकती है। इसी प्रकार भागवत जी भी राष्ट्र की उन्नति का ही एकमात्र ध्येय रखते हैं , इस पर कोई संदेह नहीं कर सकता है। इन सारी दुविधाओं के बीच एक भारतीय सनातनी क्या करे ?


प्रत्येक भारतीय सनातनी को स्वामी विवेकानंद , महर्षि अरविन्द , गोलवलकर जी , वीर सावरकर और बाल गंगाधर तिलक जी की रचनाओं को पढ़ना चाहिए । भारत क्या था , क्या है और क्या बनने की आशंका या संभावना रखता है ; आपको इसकी स्पष्ट दृष्टि मिल जाएगी । सनातनी के लिए न तो मोदी जी महत्वपूर्ण हैं और न योगी आदित्यनाथ जी । महत्वपूर्ण है तो भारत भूमि और सनातन की परंपरा ! जो सनातन के साथ है , सनातनी उसके साथ है । सनातनी कौन है ? इसका संबंध हिन्दू या मुस्लिम होने से नहीं है ।

यदि आप भारत भूमि का अपनी मां मानते हैं। भारत को पुण्य भूमि मानते हैं। भारत को अपनी पूर्वजों की भूमि मानते हैं। भारतीय इतिहास , परंपरा , दर्शन , साहित्य , संस्कृति का सम्मान करते हैं तो आप सनातनी हैं। मोदी , योगी , भागवत जी से सनातनी का संबंध सनातन संस्कृति के जुड़ाव से है। यदि कोई नेता सनातन के साथ नहीं है तो सनातनी आपके साथ नहीं है । इसलिए प्रत्येक सनातनी को यह ध्यान में रखना चाहिए कि सनातनी होने का अर्थ क्या है और हम सनातनी किसके वंशज हैं !

हम परशुराम के वंश के है। शस्त्र चलाना जानते हैं। हम कृष्ण के वंशज हैं। कूटनीति भी जानते हैं। हम दधीचि के वंश के हैं। अपनी हड्डी गलाना भी जानते हैं। हम दयानंद के वंशज है। योगी स्वामी रामदेव बनना भी जानते हैं। चाहे कोई जेहादी हो या मिशनरी हो या कुतर्की वामपंथी हो या हिंसक माओवादी ; एक सीमा के अत्याचारों के बाद महाभारत के कौरवों सा तुम्हारा विनाश होकर रहेगा । इसीलिए कृपया सनातनियों के सोए हुए , जख्म खाए हुए चीतों पर तीर , पत्थर और गोली से वार ना करें। क्योंकि यदि ये जाग गए तो जैसे सुभाष चन्द्र बोस से डरकर अंग्रेज़ यहां से भागे थे , वैसे ही तुम सब हिंसकों को भागना पड़ेगा और इस बार तुम्हारी जेहादी वामी नस्ल भी नहीं बचेगी । इसलिए बीजेपी , आर एस एस एवं अन्य संगठनों को चाहिए कि वे सब योगी आदित्यनाथ जी को साथ में लेकर ही कोई राजनीतिक निर्णय करें । इसी में पार्टी का , राष्ट्र का और सनातनियों का हित है ।

।। जय हिन्द । जय भारत । जय सनातन । जय नाथ योग परंपरा ।।

( लेखक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग के गोल्ड मेडलिस्ट छात्र हैं । कई राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में अपने शोध पत्रों का वाचन भी कर चुके हैं। विश्व विख्यात संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के युवा आचार्य हैं। भारत सरकार द्वारा इन्हे योग शिक्षक के रूप में भी मान्यता मिली है। भारतीय दर्शन, इतिहास, संस्कृति, साहित्य, कविता, कहानियों तथा विभिन्न पुस्तकों को पढ़ने में इनकी विशेष रुचि है और यूट्यूब में पुस्तकों की समीक्षा भी करते हैं । )

लेखक आदित्य जैन
सीनियर रिसर्च फेलो
यूजीसी प्रयागराज
7985924709


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