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सोनिया गांधी जिस आतंकवादी के मरने पर रोई थी, उसे मारने वाले जांबाज को अब राममंदिर बचाने के लिए मोदी सरकार ने किया पुरस्कृत!

बटला हाउस एनकाउंटर को देशवासी कभी नहीं भूल पाएंगे क्योंकि राजधानी के मुस्लिम बहुल इलाके में हुए इस कार्रवाई के बाद मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने वाली तथाकथित सेकुलर नेता कांग्रेस पार्टी की सर्वेसर्वा सोनिया गांधी और उनकी चांडाल चौकड़ी ने इस एनकाउंटर को फर्जी बता दिया था जबकि इस घटना में दिल्ली पुलिस के जांबाज़ अधिकारी मोहनचंद शर्मा शहीद हो गए थे।

पूर्व में अशोक चक्र से सम्मानित मोहन चंद शर्मा को इस बार गैलंट्री अवार्ड मिला है और उन्हें यह सम्मान कुख्यात आतंकी मौलाना मसूद अजहर के गुर्गे सैफुल्ला उर्फ कारी को मार गिराने के चलते दिया गया है। यह वही आतंकी था जो अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद राम लला के मंदिर को नेस्तनाबूद करने के लिए पाकिस्तान से भेजा गया था।

दरअसल 10-11 अगस्त 2007 को स्पेशल सेल की टीम ने खुफिया जानकारी मिलने के बाद जम्मू में एक घर को घेरा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी को आत्मसमर्पण के लिए कहा था, लेकिन आतंकी बाहर नहीं निकला। घर के भीतर से ही आतंकी सैफुल्ला उर्फ कारी पुलिस टीम पर गोली चलाते हुए वहां से भाग निकालना चाहा। उस समय आतंकी द्वारा चलाया गया एक गोली एसआई देवेंद्र सिंह को लगी थी और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया गया लेकिन मोर्चे पर डटे मोहन चंद शर्मा और उनकी टीम लगातार जवाबी कार्रवाई करती रही।

लगभग आधे घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद जैश ए मोहम्मद का आतंकी सैफुल्ला मौके पर मारा गया था। वहीं उसका साथी जफर गोली लगने से घायल हुआ था। दिल्ली पुलिस की जांच में पता चला कि दोनों ही पाकिस्तानी आतंकी थे और दोनों का संपर्क जैश के मुखिया मौलाना मसूद अजहर से था। 2005 में अयोध्या के अस्थायी मंदिर पर इस आतंकी ने फिदायीन हमला किया था। सैफुल्ला को जब साल 2007 में एनकाउंटर में ढेर कर दिया था तब यह मामला कोर्ट में चला गया।

पिछले साल कोर्ट ने सैफुल्ला की मुठभेड़ को सही करार दिया। जिसके बाद भारत सरकार ने अब जाकर मोहन चंद शर्मा समेत एनकाउंटर करने वाली पूरी पुलिस टीम को गैलेंट्री अवार्ड से नवाज़ा है।

उस समय जांच में पाया गया था कि साल 2005 में अयोध्या राम जन्मभूमि के समीप जैश -ए -मोहम्मद के कुछ आतंकियों ने फिदायीन हमले को अंजाम दिया था। स्पेशल सेल की टीम ने इस फिदायीन आतंकी सैफुल्ला को एनकाउंटर करने के बाद आतंकियों के पास से 63 लाख रुपये की नकदी , 5 किलोग्राग RDX, 12 हैंड ग्रेनेड , 10 इलेक्टॉनिक डेटोनेटर , 8 मोबाइल फोन, कई चाईनीज हथियार, एक सैटेलाइट फोन, जम्मू-कश्मीर के नाम से फर्जी पहचान पत्र और तीन गुप्त मैट्रिक्‍स कोड बरामद किए थे।

मारे गए आतंकी सैफुल्ला की योजना दोबारा फिदायीन हमला करके रामलला मंदिर को पूरी तरह विध्वंस करना था। सैफुल्ला जैश ए मोहम्मद जम्मू व कश्मीर डिवीजन का कमांडर था।

दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को गैलेंटरी अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने के बाद पुलिस महकमे में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। क्योंकि इस जांबाज और निर्भीक पुलिस इंस्पेक्टर को आज भी दिल्ली पुलिस के कर्मी भूले नहीं हैं। उसकी वजह यह है कि जब राजधानी में लगातार सीरियल ब्लास्ट हो रहे थे तो उस समय इसी जांबाज इंस्पेक्टर ने अपने प्राणों की आहुति देकर दिल्ली शहर की रक्षा की थी।

दरअसल 13 सितंबर 2008 को दिल्ली के करोल बाग, कनाट प्लेस, इंडिया गेट और ग्रेटर कैलाश में हुए सीरियल बम ब्लास्ट से 26 लोग मारे गए थे, जबकि 133 लोग जख्मी हुए थे। पुलिस ने जांच में पाया कि इस तरह की सीरियल बम ब्लास्ट को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया है। इस तरह की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस की आतंक विरोधी दस्ता स्पेशल सेल इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े आतंकियों की धरपकड़ में जुट गई।

करीब छह दिन बाद ही 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल को सूचना मिली कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पांच आतंकी बाटला हाउस के एक फ्लैट में किराए पर मकान लेकर छुपे हुए हैं। इसके बाद पुलिस टीम उन आतंकियों को पकड़ने के लिए अलर्ट हो गई। सुबह आठ बजे के करीब इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने स्पेशल सेल के लोधी कॉलोनी ऑफिस में मौजूद एसआई राहुल कुमार सिंह को फोन कर बताया था कि इंडियन मुजाहिद्दीन का आतंकी आतिफ बटला हाउस के एल-18 मकान में अपने साथियों के साथ रह रहा है और वह भी उसे पकड़ने के लिए टीम लेकर बाटला हाउस पहुंच जाए।

इस सूचना पर राहुल सिंह अपने साथियों एसआई रविंद्र त्यागी, एसआई राकेश मलिक, हवलदार बलवंत, सतेंद्र विनोद गौतम आदि पुलिसकर्मियों को लेकर मौके पर रवाना हुए। इस टीम के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा का बेटा उस समय डेंगू से पीड़ित था। इस वजह से मोहन चंद शर्मा ने पहले तो अपने बेटे को द्वारका स्थित घर से एक अस्पताल में छोड़ा और फौरन ही बाटला हाउस के लिए रवाना हो गए।

अब्बासी चौक के पास वह अपने टीम के बाकी साथियों से मिले और सभी लोग उस फ्लैट के लिए रवाना गए। जहां आतंकियों के छुपे होने की सूचना मिली थी। उस वक्त पुलिस टीम को यह नहीं पता था कि बाटला हाउस में बिल्डिंग नंबर एल-18 में फ्लैट नंबर 108 में सीरियल बम ब्लास्ट के जिम्मेदार आतंकवादी रह रहे थे। यह टीम उस फ्लैट में मौजूद लोगों को पकड़ कर पूछताछ के लिए ले जाने आई थी, लेकिन इस दौरान जैसे ही पुलिस टीम उस मकान तक पहुंची, आतंकियोंं ने अचानक गोली चलाना शुरु कर दिया और जवाबी कार्रवाई किए जाने के दौरान  इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को तीन गोलियां लग गईं। उन्होंने बुलेट-प्रूफ जैकेट भी नहीं पहना था। जख्मी इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को एम्स लाया गया। जहां उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई।

बाद में मोहन चंद शर्मा की टीम ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दो आतंकियों को मार गिराया जबकि दो अन्य को जिंदा पकड़ लिया था। इनमें से एक आतंकी मौके से फरार भी हो गया, जिसे बाद में धर दबोचा गया था।

इस एनकाउंटर को लेकर कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण की नीच सियासत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। सोनिया गांधी और दिग्विजय सिंह से लेकर उनकी पार्टी के कई बड़े नेताओं ने मुस्लिम तुष्टिकरण करने के लिए इस एनकाउंटर को फर्जी बता दिया था। यहां तक कि कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद ने तो एक चुनाव प्रचार के दौरान यह भी कहा था कि जब उन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीरें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को दिखाईं तो वह फफक-फफक कर रो पड़ी थी।

आज इस पर तंज कसते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिक्रिया दी है कि कमरे में आंसू बहाने वाले और एनकाउंटर को फेक बताकर शहादत का अपमान करने वाले चाहें तो अब मोहन चंद शर्मा को बधाई देकर बरसाती राष्ट्रभक्त बन सकते हैं।

राष्ट्रभक्त और अपने ड्यूटी के प्रति हमेशा तत्पर रहने वाले मोहन चंद शर्मा मोहन शर्मा साल 1989 में दिल्ली पुलिस में बतौर सब-इंस्पेक्टर भर्ती हुए थे। अपनी मेहनत के बल पर महज छह साल में ही आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर वह इंस्पेक्टर बन गए। अपनी 21 साल की नौकरी के दौरान शर्मा ने 60 आतंकियों को मौत के घाट उतारा था और उन्होंने 200 से ज्यादा खतरनाक आतंकियों और अपराधियों को गिरफ्तार भी किया। उन्हें 2009 में अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि शहीद मोहन चंद शर्मा दिल्ली पुलिस के स्पेशल-सेल के सबसे ज्यादा काबिल और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे। उनकी सूझबूझ और सर्विलांस की क्षमता गजब की थी। टीम में कोई भी बड़ा ऑपरेशन उनके बिना संभव नहीं था। लालकिला कांड, संसद-हमला और दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाकों में शामिल आतंकवादियों को पकड़ने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन पर जॉन अब्राहम अभिनीत फिल्म ‘बटला हाउस’ भी बन चुकी है जिसमें अभिनेता रविकिशन ने उनकी भूमिका निभाई थी।

मूल तौर पर उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले मोहन चंद शर्मा को अतुल्य बलिदान के लिए 26 जनवरी, 2009 को मरणोपरांत अशोक-चक्र प्रदान किया गया। इससे पहले उनकी जांबाजी के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक, वीरता पुरस्कार समेत 150 पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। आपको बता दूं कि शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को मिले इस गैलेंट्री अवार्ड के साथ ही उनका नाम देश में सबसे ज्यादा गैलेन्ट्री पदक पाने वाले पुलिस अधिकारी की लिस्‍ट में शुमार हो गया है। मोहन चंद शर्मा के नाम अभी तक 9 वीरता पुरस्कार दर्ज थे और इस पदक के साथ ही उनकी संख्या 10 हो गई। उनके बाद स्पेशल सेल में ही डीसीपी पद पर कार्यरत संजीव कुमार यादव का स्थान है, जिनको आठ बार वीरता पदक प्राप्त हो चुके हैं। शहीद मोहन चंद शर्मा दिल्ली पुलिस के इकलौते ऐसे पुलिस अधिकारी भी हैं, जिनको अशोक चक्र से नवाजा जा चुका है।

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Archana Kumari

Archana Kumari

राजधानी दिल्ली में लंबे समय तक अपराध संवाददाता के रूप में कार्य का अनुभव। अर्चना विभिन्न समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल में काम कर चुकी हैं। फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता।

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