मिस्टर अखिलेश, हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई कर रही है सीबीआई, न कि मोदी सरकार के कहने पर !

आज-कल राजनीतिक दलों में एक प्रचलन सा बन गया है कि मामला चाहे जो भी ठिकरा केंद्र की मोदी सरकार पर फोड़ दो। यह काम केंद्र की मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। अब उत्तर प्रदेश के खनन घोटाले का मामला ही ले लीजिए, जैसे ही इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ी उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसका ठिकरा मोदी सरकार पर फोड़ दिया। आरोप लगाया कि बसपा के साथ गठबंधन होने के कारण मोदी सरकार इस प्रकार की कार्रवाई कर रही है। जानबूझ कर मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए इस प्रकार के बयान दिए जा रहे है। जबकि अखिलेश यादव भी भलीभांति जानते हैं कि इसमें मोदी सरकार का कोई हाथ नहीं है। अखिलेश यादव को जानना चाहिए कि खनन घोटाले का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। इस मामले में जो भी कार्रवाई हो रही है वह सब हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही है। क्योंकि इसका सारा जवाब सीबीआई को हाईकोर्ट को देना पड़ेगा।

मालूम हो कि यूपी में बालू खनन घोटाला मामले में सोमवार को सीबीआई ने खुलासा किया है कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ई टेंडरिंग प्रकिया का उल्लंघन कर 14 फाइलों को स्वीकृत दी थी। जबकि आठ फाइलों की स्वीकृति पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति ने दी थी। सीबीआई के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये सारी फाइलें हमीरपुर खनन घोटाले से जुड़ी हैं। अब जब घोटाले के दस्तावेज सीबीआई जांच अधिकारियों के हाथ लग गए हैं तो अब इनने पूछताछ होनी तय है।

गौरतलब है कि कि सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर ही 28 जुलाई 2016 को खनन घोटाले के संबंध में मामला दर्ज कर आरंभिक जांच शुरू की थी। खनन की प्रक्रिया में अनियमितता बरतने तथा कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के लिए इसकी जांच शुरू हुई थी। गौर हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 जनवरी 2013 को आदेश जारी करते हुए पहले दी गई लीज रद्द करने तथा नई लीज ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत जारी करने को कहा था। लेकिन खनन मंत्रालय संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा उनसे पहले खनन मंत्रालय संभाल रहे पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति ने जानबूझ कर कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए मनमाने तरीके से लीज जारी कर दिए। जबकि इन सारी फाइलों को ई-टेंडरिंग के माध्यम से फाइनल होना चाहिए था। क्योंकि कोर्ट का यही आदेश था।

अखिलेश ही क्यों, कांग्रेस के गांधी परिवार हों या बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव हो, हर कोई अपनी गलती का ठिकरा मोदी सरकार पर फोड़ना का प्रचलन सा बना लिया है। कांग्रेस भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के कर चोरी के मामले में यही कहती है कि मोदी सरकार उन्हें फंसा रही है। जबकि उनका मामला आईटी विभाग से जुड़ा है और व्यक्तिगत शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ मामला चल रहा है। ऐसे ही बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपना बंग्ला खाली करने का ठिकरा वहां के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी तथा केंद्र की मोदी सरकार पर फोड़ रहे हैं। आज-कल वह अपना बंग्ला खाली कराने को मुद्दा बनाने में जुटे हैं। बंग्ला खाली कराने का मामला प्रशासनिक मामला है। सरकार ने उन्हें उनके कद के हिसाब से घर एलॉट किया है, लेकिन वे है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बगल वाले बंग्ला में रहना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने सरकार के आदेश को कोर्ट में भी चुनौती दी थी। लेकिन कोर्ट ने बंग्ला न खाली करने की उनकी अर्जी को खारिज कर दिया है।

URL : Mr. Akhilesh, CBI is acting on the order of the High Court, not Modi Govt!

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