नेपाली मुसलिम संगठन ने कहा, हिंदू राष्ट्र के अंतर्गत इसलाम ज्यादा सुरक्षित है!

सेकुलरों को नेपाल में रहने वाले मुसलमानों से सीख लेनी चाहिए। जो सेकुलर भारत में हिंदू के नाम पर मुसलमानों को डरा कर उसके वोट बैंक पर राज करना चाहते हैं, उनका भांडा नेपाल के मुसलमान फोड़ने जा रहे हैं। नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान को मुसलमानों से मिल रहे समर्थन के बारे में बताने से पहले नेपाल और भारत के सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंध जानना जरूरी है। नेपाल और भारत का संबंध न केवल सांस्कृतिक रूप से मजबूत है बल्कि भौगोलिक परिवेश भी कमोवेश एक जैसा है। भारत के साथ सदियों से नेपाल का संबंध बेटी-रोटी का रहा है, इसलिए राजनीतिक परिवेश भी कमोवेश एक जैसा ही रहा है।

मुख्य बिंदु

* सेकुलर राष्ट्र के अंतर्गत इसलाम को सुरक्षित नहीं मान रहे नेपाल के मुसलमान

* सेकुलर संविधान की अपेक्षा हिंदू राष्ट्र में ज्यादा सुरक्षित महसूस करते है मुसलमान

गौरतलब है कि नेपाल में फिर से हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने को लेकर एक अभियान चलाया जा रहा है। खास बात है कि इस अभियान का अगर कोई समुदाय सबसे ज्यादा समर्थन कर रहा है तो वह है वहां का मुसलिम समुदाय। नेपाल का मुसलिम समुदाय सेकुलर राष्ट्र नहीं चाहता है बल्कि वह पुराना हिंदू राष्ट्र चाहता है।

वहां के मुसलमानों का कहना है कि नेपाल में सेकुलर संविधान के तहत नहीं बल्कि हिंदू राष्ट्र के अंतर्गत इसलाम ज्यादा सुरक्षित है। नेपाल के राप्ति मुसलिम सोसाइटी के चेयरमैन अमजद अली का कहना है कि अगर इसलाम को सुरक्षित रखना है तो हमें नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाने के लिए अपना मुंह खोलना होगा क्योंकि हिंदू राष्ट्र के तहत ही हमारा मजहब सुरक्षित रह सकता है। अमजद अली नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग के लिए प्रदर्शन कार्यक्रम से भी जुड़े हैं।

सीपीएन-यूएमएल सीए की सदस्य अनारकली मिया ने कहा है कि वह अपने अनुभव के आधार पर कह सकती है कि नेपाल में क्रिश्चियनिटी के विस्तार के लिए क्रिश्चियन मिशनरी यहां के लोगों को सेकुलर के नाम पर भ्रमित करने में जुटे हैं। उनका तो यहां तक कहना है कि नेपाल को सेकुलरिज्म स्वीकार ही नहीं करना चाहिए। सेकुलरवाद भविष्य में और संकट पैदा करेगा। इनके अलावा कई नामी मुसलिम नेताओं ने भी स्वीकार किया है कि यहां क्रिश्चियनिटी का प्रभाव बढ़ाया जा रहा है।

नेपालगंज के राष्ट्रवादी मुसलिम मंच के चेयरपर्सन बाबू खान पठान के हवाले से वहां के प्रमुख समाचार पत्र हिमालयन टाइम्स ने कहा है कि नेपाल को सेकुलर राष्ट्र बनाने के पीछे सदियों से चल रही हिंदू-मुसलिम के भाईचारे को तोड़ने की मंशा थी। इसलिए नेपाल को एक बार फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित किए जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है, ताकि हर धर्म के लोग सहिष्णुता पूर्वक यहां रह सके। नेपाल के मुसलमानों का स्पष्ट रूप से कहना है कि उन्हें सेकुलर पहचान की आवश्यकता नहीं है हम तो बस नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं। बाबू पठान का तो यहां तक दावा है कि 80 प्रतिशत मुसलमान नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित किए जाने के समर्थन में हैं।

नेपाल के मुसलमान जहां सेकुलरवाद से आजिज आकर हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए अभियान चला रहे हैं, वहीं भारत में मुसलमान सेकुलरवाद का झुनझुना बजा रहे हैं। असल में भारत के मुसलमान एक खास वर्ग के सेकुलरवादियों के चंगुल में फंसे हुए हैं। वे लोग उन्हें हिंदुओं के नाम पर डराकर अपना राजनीतिक हित साधते हैं। और ये लोग डरकर उनके हाथों खेलने को मजबूर हैं। भारत के मुसलमानों को समझना चाहिए कि जो सेकुलरवादी अपने हित के लिए देश का बेड़ा गर्क कर सकते हैं वे वक्त आने पर उनके साथ क्यों नहीं धोखा कर सकते हैं। इसलिए यहां के मुसलमानों को निरर्थक डर से बाहर आकर राष्ट्र निर्माण से जुड़ना चाहिए।

URL: Muslims want to make Nepal a Hindu nation again

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