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रास्ते पर नमाज, क्या अपनी भीड़ से डराना चाहते हो?

इस देश में सच्ची और सही बात को भी धर्म के चश्मे से देखना शुरू हो जाता है और फिर उसी पर राजनीति भी शुरू हो जाती है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सार्वजनिक स्थानों और खुले में नमाज नहीं पढ़ने के साथ मसजिद और ईदगाह में नमाज पढ़ने की सलाह देने पर भी लोगों ने राजनीति शुरू कर दी है।

मुख्य बिंदु

* हर अच्छी और सच्ची बात को भी धर्म के चश्मे से देखने की हो गई है आदत
* नमाज पढ़ने के बहाने सार्वजनिक जमीन कब्जाने की रहती है सभी की मंशा

दरअसल कुछ दिनों पहले ही गुरुग्राम में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकिर स्थानीय कुछ संगठनों ने एतराज जताया। उनका कहना था कि इससे रास्ते में अवरोध पैदा होने की वजह से दुर्घटनाओं में वृद्धि होती है वहीं दूसरी ओर कुछ लोग सार्वजनिक जगहों पर कब्जा जमाने के लिए भी नमाज पढ़ने का हथकंडा अपनाते हैं। इसी मामले को लेकर खट्टर ने अपने बयान में कहा कि मसजिद और ईदगाह में ही नमाज पढ़े जाएं। अगर जगह की कमी हो तो अपने व्यक्तिगत जगहों पर ही नमाज पढ़े जाएं। क्योंकि प्रदेश में कानून को व्यवस्थित करना हमारा कर्तव्य है। इसके साथ ही नमाज से होने वाले अवरोध को हटाना भी हमारा फर्ज है।

लेकिन लोगों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयानों को तूल देना शुरू कर दिया है। अब तो इस पर जमकर राजनीति भी की जा रही है। जबकि सच्चाई तो यही है कि सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने से अवरोधा पैदा होता है और इससे दुर्घटनाएं होती है। वैसे भी इस मामले पर राजनीति वही करते हैं जिन्हें धर्म का थोड़ा भी ज्ञान नहीं है। अगर ज्ञान होता तो इस प्रकार की बात ही नहीं करते कि नमाज के लिए जमनी की व्यवस्था करना और उसे सुचारू रूप से निपटाने का काम भी सरकार का है।

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क्योंकि धर्म के अनुसार जरूरी नहीं कि नमाज मसजिद या ईदगाह में ही पढ़ी जाए। ये भी जरूरी नहीं कि नमाज सार्वजनिक स्थानों पर एकत्रित होकर ही पढ़ी जाए। नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है शर्त बस इतना कि वह जगह पाक हो और नमाज अदा करने वाले भी पाक हो। सवाल उठता है कि जमीन की पाकीजगी की बात तो हर कोई करता है लेकिन बंदा पाक है कि नहीं इसकी बात कोई नहीं करता। जबकि गुरुग्राम में हुए विवाद से यह स्पष्ट हो चुका है कि सार्वजनिक जगहों पर नमाज अदा करने की मंशा जमीन को कब्जाना होता है। सवाल उठता है कि जब नियत ही में खोट हो तो फिर नमाज अदा करने से क्या फायदा? इसलिए किसी गंभीर विवाद को जन्म देने से पहले ही सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

मुसलिम समुदाय के भी जानकार लोगों का यही कहना है कि नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है। बशर्तें दोनों पाक हों। इसके लिए समूह बनाने की भी जरूरत नहीं है। आप अकेले में भी किसी पवित्र जगह को नमाज के लिए चुन सकते हैं। इसलिए प्राय: शुक्रवार को हमलोग सड़क से लेकर पार्क तक में व्यक्तिगत रूप से नमाज अदा करते देख सकते हैं। लेकिन ये लोग तो कभी दावा नहीं करते कि यहां नमाज अदा किया है तो यह जगह अब हमारी हो गई। लेकिन अधिकांश सार्वजनिक जगहों पर कब्जा जमाने का धर्म एक जरिया बन जाता है। इसलिए जमीन विवाद भी पैदा हो जाता है। अगर इस मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश की जनता को पहले चेता दिया है तो यह एक दूरदर्शी कदम है।

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