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एनडीटीवी के प्रबंध संपादक विक्रम चंद्रा ने लंदन में फर्जी कंपनी बनाई, बरखा दत्त व सोनिया सिंह को निदेशक बनाया और 150 मिलियन काले डॉलर को सफेद कर लिया!

NDTV के निदेशक व कार्यकारी उपाध्यक्ष केवीएल नारायण राव ने इनकम टैक्स विभाग के पूछताछ में यह स्वीकार किया है कि उनका चैनल बोगस कंपनी का प्रयोग करते हुए विदेशों से अवैध तरीके से धन का लेन-देन कर रही थी। यह एक तरह से हवाला कारोबार और धन शोधन(money laundering) से जुड़ा मामला है, जिसे खुद एनडीटीवी के निदेशक ने अपने हस्तलिखित स्वीकारनामे में इनकम टैक्स विभाग के समक्ष स्वीकार किया है। इनकम टैक्स विभाग ने इसमें साफ-साफ एफडीआई के नियमों का उल्लंघन पाया है। 54 पेज के इनकम टैक्स के दस्तावेजों को सामने लाते हुए इसका खुलासा एक अंग्रेजी वेबसाइट https://www.pgurus.com ने किया है, जिसे पत्र लिखकर एनडीटीवी धमकाने का प्रयास भी कर चुका है, लेकिन pgurus ने प्रणव राय द्वारा पत्रकारिता की आड़ में खड़े किए गए अवैध साम्राज्य को पूरी तरह से नंगा कर दिया है!

pgurus.com के अनुसार, इनकम टैक्स विभाग द्वारा एनडीटीवी को भेजे गए 54 पेज के नोटिस से एनडीटीवी की समूची धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। एनडीटीवी ने नीदरलैंड, साइमन आइलैंड, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में कई बोगस कंपनियों का जाल फैलाया और सभी भारतीय नियमों और कानूनों को धता बताते हुए 150 मिलियन डॉलर का अवैध निवेश हासिल कर लिया। इस 54 पेज के दस्तावेज में 33 पेज तो एनडीटीवी के निदेशक राव की स्वीकारोक्ति है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि एनडीटीवी मनीलॉउंड्रिंग में लिप्त था। यह साफ साफ prevention of money laundering act के अधीन एक आपराधिक मामला है, जिसमें एनडीटीवी और उसके मालिक प्रणव राय पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें तीन से सात साल की सजा का प्रावधान है। अर्थात् प्रणव राय और अभिव्यक्ति की आजादी का नारा पीटने वाले उनके चैनल एनडीटीवी पर आपराधिक मामले में संलिप्त होने का आरोप है! इससे यह भी साबित होता है कि यह चैनल अपने आपराधिक कारोबार को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की आड़ में छुपाने के लिए पत्रकारिता का ध्ंधा कर रही है!

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एनडीटीवी के निदेशक केवीएल नारायण राव का यह बयान सेक्शन- 131 के तहत 23 जुलाई, 2015 में रिकॉर्ड किया गया था। यह पूरा दस्तावेज pgurus.com ने अपने वेब में लगाया है, जिसे पाठक लिंक ओपन कर पढ़ सकते हैं। दस्तावेज के अनुसार एनडीटीवी ने वाया नीदरलैंड यूएस की कंपनी जीई ग्रुप से 150 मिलियन डॉलर का निवेश हासिल किया। इस दस्तावेज के 17 से 21 नंबर पेज तक राव के बयान यह दर्शाते हैं कि एनडीटीवी किस तरह से अवैध धनशोधन के कारोबार में लिप्त थी। राव ने इसमें एनडीटीवी के प्रबंध संपादक विक्रम चंद्रा पर आरोप लगाया है कि विक्रम चंद्रा ने मनी लाउंड्रिंग के लिए लंदन में एक बोगस कंपनी बनाया, जिसमें एनडीटीवी की पत्रकार बरखा दत्त एवं हाई प्रोफाइल एंकर व कांग्रेस के नेता व पूर्व गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह की पत्नी सोनिया सिंह को निदेशक बनाया और इसके लिए धनशोधन का काला कारोबार किया। केवीएल नारायण राव ने यह स्वीकार किया है कि पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते एनडीटीवी ने धनशोधन के लिए पूरी दुनिया में बोगस कंपनी खड़ी की। ज्ञात हो कि यह आरोप पहले लग चुका है कि पी.चिदंबरम का करीब 5000 करोड़ रुपए का काला धन एनडीटीवी में लग चुका है। आरोप यह भी है कि चिदंबरम का यह धन भी हवाला के मार्फत ही एनडीटीवी में पहुंचा।

इनकम टैक्स विभाग ने माना है कि राव की स्वीकारोक्ति के बाद एनडीटीवी के बड़े शेयर धारक प्रणव राय व उनकी पत्नी राधिका राय के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध हैं, जिसमें कम से कम तीन साल और अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। पीगुरु ने यह सवाल उठाया है कि जब इतना पर्याप्त सबूत उपलब्ध है तो फिर सरकारी एजेंसी अभी तक एनडीटीवी पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?

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साभारः https://www.pgurus.com

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