जवाहरलाल नेहरू ने सुरक्षा परिषद में चीन की कैसे की थी लाॅबिंग, पढ़िए सीआईए के एक अधिकारी का खुलासा!

कल चौथी बार चीन ने सुरक्षा परिषद में पाकिस्तानी आतंकवादी व जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर के पक्ष में वीटो का इस्तेमाल कर भारत द्वारा उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की कोशिशों को रोक दिया। भारत को अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस आदि सभी देशों ने समर्थन दिया था, लेकिन चीन ने वीटो का प्रयोग किया। चीन को यह वीटो का पावर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अंतरराष्ट्रीय लाॅबिंग के जरिए दिलवाया था। यह पावर पहले राष्ट्रवादी चीन के पास था, लेकिन जब माओ के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने चीन पर कब्जा कर लिया तो यह पावर ताइवान को स्थानांतरित होना था, क्योंकि वहां की राष्ट्रवादी सरकार के प्रमुख च्यांग काई शेक वहीं चले गये थे और वहां से सरकार चला रहे थे। लेकिन नेहरू की लाॅबिंग के कारण यह कम्युनिस्ट चीन को हस्तांतरित हो गया, जिसका खामियाजा आज भी लगातार भारत भुगत रहा है।

पूरे मामले को संदीप देव की पुस्तक ‘कहानी कम्युनिस्टों की’ में आप पढ़ सकते हैं। इसी किताब में एक सीआईए अधिकारी का खुलासा है कि किस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति के समक्ष जवाहरलाल नेहरू ने चीन को सुरक्षा परिषद की सदस्यता दिलाने के लिए मिन्नतें की थी, उसे पढ़िए। यह पढ़ना जरूरी इसलिए है कि वर्तमान हमारे उसी अतीत की गलतियों के कारण प्रभावित हो रहा है। और हां, पाकिस्तान का निर्माण और कश्मीर की समस्या किस तरह से जवाहरलाल नेहरू की देन है, इसके बारें में आप कहानी कम्युनिस्टों की के साथ संदीप देव की प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित दूसरी पुस्तक ‘हमारे गुरुजी’ भी पढ़ सकते हैं।

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति आइजनहाॅवर के नोट्स से पत चलता है कि सुरक्षा परिषद में चीन की स्थायी सदस्यता के लिए पंडित नेहरू ने उनसे व्यक्तिगत रूप से आग्रह किया था, वहीं तिब्बत पर चीनी हमले के विरोध में में उनसे एक शब्द भी नहीं कहा था, जबकि दलाई लामा ने नेहरू से आग्रह किया था कि जब वह अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलें तो चीन द्वारा तिब्बतियों के दमन की बात उठाएं। सीआईए के पूर्व अधिकारी ब्रूस राइडेल लिखते हैं,

पंडित नेहरू ने आइजनहाॅवर (तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति) पर दबाव डालने की कोशिश की कि वह सुरक्षा परिषद में कम्युनिस्ट चीन की सदस्यता के लिए सहयोग प्रदान करें जो कि द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद राष्ट्रवादी चीन को 1945 में दिया गया था। कम्युनिस्ट चीन को उस पांच सदस्यीय सुरक्षा परिषद की सदस्यता दिलाएं, जिन्हें वीटो का अधिकार है और जिनके बिना कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं होता है। नेहरू ने आइजनहाॅवर से कहा कि जो सरकार (चीनी कम्युनिस्ट) 60 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करती हो उसे अभी हो या बाद में, सुरक्षा परिषद में जगह तो देनी ही होगी। प्रधानमंत्री नेहरू ने इस तरह की किसी भी संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि भविष्य में चीन भारत पर हमला कर सकता है (1962 में नेहरू का यह विश्वास भी ढह गया)। नेहरू ने आखिर में राष्ट्रपति आइजनहाॅवर से कहा, भारत शीत युद्ध में निरपेक्ष रहना चाहता है और चीन के साथ मित्रातापूर्ण रिश्ता बनाने का प्रयास कर रहा है। आइजनहाॅवर के मस्तिष्क में कोरिया युद्ध में चीनी हस्तक्षेप की याद ताजा थी, इसलिए उन्होंने यूएन में चीन के प्रवेश की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया। लेकिन आइजनहाॅवर के नोट्स में एक भी रिकाॅर्ड ऐसा नहीं मिला, जिसमें प्रधानमंत्री नेहरू ने चीन के द्वारा तिब्बत पर कब्जे के संबंध में दलाई लामा द्वारा उठाए गए मुद्दे को उनके समक्ष रखा हो।

कहानी कम्युनिस्टों की-संदीप देव की पुस्तक से साभार। संदीप देव ने यह तथ्य सीआईए अधिकारी ब्रूस राइडेल की पुस्तक जेएफकेज फाॅरगाॅटन क्राइसिसः तिब्बत, द सीआईए एंड द सिन्यो-इंडियन वार से लिया है।

चीन ने पिछले तीन साल में चार बार बचाया है मसूद अजहर को-

  • मार्च-2016 में
  • अक्टूबर-2016 में
  • अगस्त-2017 में
  • मार्च-2019 में
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