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लंदन के ईवीएम हैक के आयोजक ने कहा, हमारे पास कोई सबूत नहीं है कि भारत में ईवीएम हैक हुई !

लंदन में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा कल आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कराए गए फेक खुलासे की फॉरेन प्रेस एसोसिएशन ने हवा निकाल दी। ज्ञात हो कि ईवीएम डिजाइन करने का दावा करने वाले सैयद शूजा इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान ईवीएम हैक होने का खुलासा किया था। इसके साथ ही उसने दावा किया था कि वह उसे हैक कर सकता है। लेकिन आज फॉरेन प्रेस एसोसिएशन उसके दावे को गलत बताया है। उसने शूजा के सारे दावे को सख्ती से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसने अपने दावे के अनुरूप एक भी प्रमाण सामने नहीं रखा है। फॉरेन प्रेस एसोसिएशन ने तो यहां तक कहा है कि ऐसे झूठे और मक्कार लोगों के लिए उसे मंच उपलब्ध नहीं कराना चाहिए था।

इस मामले में जहां परत-दर-परत झूठ सामने आने लगा है वहीं ईवीएम का दुष्प्रचार करने वालों को सबक सिखाने के लिए चुनाव आयोग ने दिल्ली पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी है। चुनाव आयोग ने पहले ही इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही थी। उधर उस झूठ फैलाने वाले प्रेस कान्फ्रेंस में मौजूद कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर यह बात कुबूल की है कि उसे इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रमुख आशीष राय ने बुलाया था। आशीष राय उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और उनके दोस्त हैं। इस मामले में जो सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है वह यह कि ईवीएम हैक करने का दावा करने वाला सैयद शूजा कभी ईवीएम बनाने वाली कंपनी ईसीआईएल में काम किया ही नहीं है। यह खुलासा स्वयं इसीआईएल ने किया है। उन्होंने कहा है कि सैयद शूजा कभी ईवीएम टीम में काम नहीं किया है। इसके साथ ही सैयद शूजा की डिग्री फर्जी होने की बात सामने आई है। जिस शादान कॉलेज से उसने डिग्री हांसिल करने की बात कही है उसी कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा है कि सैयद शूजा नाम का कोई छात्र उनके कॉलेज में कभी था ही नहीं।

फॉरेन प्रेस एसोसिएन ने इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएश के कार्यक्रम में सैयद शूजा के हर बयान को खारिज कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि इस नकाबपोश वक्ता के आरोप में कोई सच्चाई नहीं है। फॉरेन प्रेस एसोसिएशन के बयान को रिट्वीट करते हुए एक विदेशी पत्रकार डेबोराह बोनेटी ने लिखा है कि सैयद शूजा ने अपने बयान को सही साबित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं पेश किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन को ऐसे झूठे इंसान के लिए मंच उपलब्ध नहीं कराना चाहिए था।

 

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एक तरफ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विश्वसनीयता विश्व स्तर पर बढ़ रही है वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस है जो विदेश की धरती से देश के लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के लिए साजिश करने में जुटी है। कांग्रेस ने अपने पिट्ठुओं के माध्यम से अमेरिका में एक प्रेस कॉन्फेंस कर एक बार फिर ईवीएम पर सवाल उठवाया है। जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैयद शुजा ने साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान ईवीएम हैक करने का दावा किया है उसका आयोजन इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (यूरोप) के प्रमुख आशीष राय ने किया था। आशीष राय पुराने कांग्रेसी हैं और उसका कपिल सिब्बल और राहुल गांधी के साथ पुराना और गहरा रिश्ता रहा है। ध्यान रहे कि यही वह प्रॉक्सी संगठन है जिसने पिछले साल अगस्त में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया था, उस कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी के साथ सैम पित्रोदा मौजूद थे। राहुल गांधी के आयोजकों से बात करने तथा दूसरे कार्यक्रम में कांग्रेस के कपिल सिब्बल के मौजूद रहने से साफ है कि कांग्रेस देश और उसकी संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश कर रही है। इस तथाकथित खुलासे से यह भी साबित हो गया है कि कांग्रेस 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी निश्चित हार का बहाना ढूंढना शुरू कर चुकी है।

कांग्रेस के इस नए खेल का पर्दाफाश करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि जब राफेल पर कांग्रेस का झूठ पकड़ा गया, जब 15 उद्योगपतियों के सारे ऋण माफ करने वाला झूठ पकड़ा गया, तब उसने ईवीएम हैकिंग पर उससे भी बड़ा झूठ बोलना शुरू कर दिया है। इससे साफ होता है कांग्रेस के पास चुनाव में जाने के लिए भाजपा के खिलाफ कोई मुद्दा है ही नहीं। इसलिए वह हमेशा एक झूठ का मुद्दा बनाने में जुट जाती है।

वहीं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता है यह बात भारतीय चुनाव आयोग के दावे से साबित हो चुकी है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है भारत विरोधी शक्तियों ने कांग्रेस के दिमाग को हैक कर लिया है।

जिस इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने सैयद शुजा के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया है उसके बारे में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के पूर्व अध्यक्ष रास बिहारी का कहना है कि इस नाम से कोई एसोसिएशन संबद्ध ही नहीं है। दूसरी बात उन्होंने कही कि इसका जो कार्यालय है वह कांग्रेस के नेताओं की तस्वीर से भरा पड़ा है। इससे साफ है कि यह कांग्रेस द्वारा संचालित कोई प्रॉक्सी संगठन है जिसे कांग्रेस अपने हित में उपयोग करती रहती है ।

अगर आफ सैयद शुजा के प्रेस कॉन्फ्रेंस को ध्यान से देखें तो पता चल जाएगा कि देश के साथ भाजपा को को बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने कितनी बड़ी साजिश की है। उन्होंने दावा किया है कि 2014 लोकसभा चुनाव के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात तथा यूपी में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान ईवीएम को हैक किया गया था। ध्यान रहे कि इन राज्यों में भाजपा की जीत हुई थी। कहने का मतलब साफ है कि जहां भाजपा जीती वहां तो ईवीएम हैक की गई लेकिन जहां भाजपा हारी वहा ईवीएम हैक नहीं हुई।

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इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन नाम के प्रॉक्सी संगठन ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस कब किया? ध्यान रहे कि इससे ठीक दो दिन पहले ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता क्रे ब्रिगेड मैदान में विरोधी दलों की एक रैली आयोजित की थी। इस रैली में सभी ने एक सुर में ईवीएम पर सवाल उठाते हुए देश को पीछे ढकेलने के लिए बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी। इस तथाकथित महागठबंधन की बात को विश्व स्तर पर उठाने के लिए इस मसले को और गरमाने का प्रयास किया गया।

 

इवीएम पर कांग्रेस की साजिश की भाजपा के रविशंकर प्रसाद ने निकाली हवा

अमेरिका में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की मौजूदगी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सैयद शुजा के ईवीएम पर तथाकथित खुलासे की भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद तथा केंद्रीय कानून मंत्री ने हवा निकाल दी। आज उन्होंने प्रेस कॉन्फेंस कर कांग्रेस पर देश के 90 करोड़ मतदाता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हम पहले कहते थे कि राहुल गांधी होम वर्क नहीं करते, लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह विश्वास हो गया है कि पूरी कांग्रेस होम वर्क नहीं करती। कांग्रेस ने 2014 में ईवीएम हैक होने का आरोप लगा रही है, उसे बोलने से पहले सोचना चाहिए कि उस समय केंद्र में भाजपा की सरकार नहीं थी। उस समय यूपीए की सरकार थी।

सवाल उठता है कि कांग्रेस के समय में ईवीएम ठीक थी, जब किसी राज्य में भाजपा की हार होती है तो उस समय ईवीएम ठीक रहती है, लेकिन जैसे ही भाजपा जीतती है ईवीएम खराब हो जाती है। 2007 में यूपी में मायावती की सरकार बनी थी, 2012 में अखिलेश की सरकार बनी थी। पश्चिम बंगाल में दो-दो बार ममता बनर्जी की सरकार बनी थी। 2015 में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार बनी थी। उसकी जीत तो प्रतिशत के हिसाब से यूपी में भाजपा की जीत से भी बड़ी थी। उस समय तो किसी ने ईवीएम पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया। गितिका स्वामी ने सवाल उठाया है कि ईवीएम हैक 2014 में हुई थी लेकिन तब तो उसे साबित नहीं किया गया. अब जब मोदी सरकार के पौने पांच साल गुजर गए और अगला लोकसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने बीते हैं तब इसका खुलासा किया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि यह  कांग्रेस पार्टी के दिमाग का खुरापात है।

उन्होंने कहा कि जो लोग ईवीएम का विरोध कर रहे हैं उन्होंने अपने राज्य में बैलट पेपर से कराए चुनाव के दौरान क्या नंगा नाच किया है उसे भी दुनिया ने देखी है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में हुए पंचायच चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे काउंटिंग होने के समय तक वोटिंग कराई गई है। तो क्या कांग्रेस और विरोधी दल इसी प्रकार सरेआम लूट के लिए बैलट पेपर से चुनाव कराना चाहते हैं?

जो सैयद शुजा ने आज ईवीएम हैक करने का दावा किया है वह उस समय कहां था जब तीन दिनों तक चुनाव आयोग ने ईवीएम हैक करने की चुनौती दी थी। ध्यान रहे कि 2017 में ईवीएम हैक होने का मसला सामने आया था। उस समय चुनाव आयोग ने तीन दिनों तक कंस्टीट्यूशन क्लब में आकर ईवीएम हैक करने की चुनौती दी थी। लेकिन किसी भी पार्टी ने चुनौती स्वीकार नहीं की थी। सवाल उठता है कि उस समय कांग्रेस पार्टी अपने सैयद शूजा को कहां छिपा रखी थी?

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इतना ही नहीं ईवीएम हैक करने के मामले में न्यायभूमि व अन्य ने मिलकर चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ ने न केवल उस याचिका को निरस्त कर दिया था बल्कि याचिकाकर्ता को लताड़ भी लगाई थी।

रविशंकर प्रसाद ने इस मामले को गंभीरता लेते हुए सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का यह कैंब्रिज एनालिटिका पार्ट-2 तो नहीं? क्योंकि अब यह आईने की तरह साफ है कि उन्होंने कैंब्रिज एनालिटिका के साथ सौदा कर भारतीयों के डाटा का सौदा किया था। जिसके लिए उसे माफी तक मांगनी पड़ी थी। उन्होंने यह भी बताया है कि उस मामले की जांच करने की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी गई है?

ईवीएम के दुष्प्रचार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करेगा चुनाव आयोग

ईवीएम हैक करने का मामला दुबारा सामने आने के बाद भी चुनाव आयोग अपने स्टैंड पर कायम है। चुनाव आयोग ने कहा है कि ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता है। इस सैयद शूजा के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने अपना बयान जारी किया है। अपने इस नए बयान में चुनाव आयोग ने अपना पुराना स्टैंड दोहराया है। उनका कहना है कि ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता है। इस बार चुनाव आयोग ने अपने जारी बयान में यह वादा किया है कि इस प्रकार के दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चुनाव आयोग  ने अपने वादे के अनुरूप ईवीएम के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एफआईआर भी दर्ज करा दी है।

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