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खुद मीडिया के शरणागत माई लार्ड मीडिया में जाने वाले को भेजेंगे जेल!

अब सुप्रीम कोर्ट को यह पसंद नहीं की NRC मामले पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मीडिया के पास जाकर बयान दे। जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ी फटकार लगाते हुए NCR को-ऑर्डिनेटर और रजिस्टार जनरल को अगाह किया है कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए। देश के सबसे बडे न्यायिक तंत्र को अपने व्यक्तिगत हित में, मनमाफिक केस पाने की चाहत लिए मीडिया के सामने हाथ जोड़ने वाले मीलॉड अब NCR के अधिकारी को मीडिया के सामने जाने को लेकर अगाह करते हुए जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं!

जस्टिस रंजन गोगई याद हैं आपको? जी हां ये वही गोगोई हैं जिन्होने चार वरिष्ठतम जजों संग मिल कर प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था जिसके बाद देश की न्यायपालिका को लेकर लोगों की आस्था दरकने लगी थी! भारतीय न्यापालिका के इतिहास में पहली बार हुआ था! इससे पहले सिटिंग जज मीडिया से सुप्रीम कोर्ट के किसी भी मामले में कभी कोई बात नही करते थे। लेकिन ‘मनमाफिक’ मामले अपने कोर्ट में सुनने की चाहत मात्र लिए वे प्रेस के पास चले गए। गोगई की अगुआई में प्रेस के सामने आए जजों की लाचारी ने देश के सर्व शक्तिशाली न्यायिक तंत्र को रीढहीन साबित कर दिया। जब धरती पर इंसाफ का सबसे बड़ा देवता इस कदर लाचार हो तो आम आदमी उस से इंसाफ की उम्मीद कैसे करे!

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने NRC स्टेट को-ऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेश को मीडिया में दिए बयान को लेकर जम कर फटकार लगाई है। जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने इस बात पर नाराजगी जतायी कि इनलोगों ने एक अखबार को इंटरव्यू दे दिया था जिसमें बताया कि वेरिफिकेशन किस प्रकार होगा, कौन दस्तावेज जरूरी होंगें। रजिस्ट्रार ने तो बस इतना ही कहा था कि जिनका नाम NRC ड्राफ्ट में छूट गया है उन सबको अपनी नागरिकता साबित करने का पर्याप्त मौका मिलेगा! इतनी सी बात के लिए जस्टिस गोगोई की बेंच ने इनलोगों को कोर्ट की अवमानना के लिए जेल भेजने की चेतावनी तक दे डाली और भविष्य में उन्हें मीडिया से दूर रहने के लिए भी कहा।

कोर्ट के अंदर तो आम लोगों की सांस फूल जाती है क्योंकि उसकी साख ही कुछ ऐसी है लेकिन न्यायिक के देवता जब खुद नैतिक बातों पर अमल न करें तो उन से पूछा जाना चाहिए, माई लार्ड, आप चाहें तो NRC के अधिकारी को जेल भेज सकते हैं! उन्होने तो मीडिया के सामने बयान उस भ्रम को खत्म करने के लिए दिया कि जो इस देश के नागरिक हैं और उनकी नागरिकता जाने का खतरा है। प्रेस में उनके बयान से लोगों की चिंता कुछ कम हुई होगी। लेकिन आपके प्रेस में जाने से तो पूरे देश की चिंता बढ़ गयी थी! न्यायपालिका ख़तरे में आ गयी थी! माई लार्ड, लोकतात्रिक व्यवस्था में एक सलाह तो आपको भी है कि आदेश वही अमल में होगा न जिसका आप पालन करेगें?

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गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायर्ड हो जाएंगे। भारत के मुख्यन्यायधीश की रेस में यही जस्टिस गोगई सबसे आगे हैं। मतलब सब कुछ ठीक रहा तो 2 अक्टूबर के बाद सुप्रीम कोर्ट में मास्टर ऑफ द रोस्टर वही होंगे। अब इसकी संभावना कम है कि राममंदिर पर फैसला 2 अक्टूबर से पहले आए। ऐसे में जस्टिस गोगोई तय करेंगे कि राममंदिर मामले को भविष्य में और कितने दिनों तक लटकाया जा सके।

URL: NRC: SC severely reprimands Assam coordinator, registrar for speaking to media

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