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Judge Loya Death Verdict: राहुल गांधी, आपको Fake News Maker जीत नहीं दिला पाएंगे! यह लोकतंत्र है ‘लॉबीतंत्र’ नहीं!

देश की न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश में शामिल गैंग एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हमलावर हो गया है।। जज लोया की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर यह गैंग सोशल प्लेटफार्म ट्विटर से फैसले पर विरोध जता रहे हैं! इस गैंग में शामिल प्रशांत भूषण हो या राजदीप सरदेसाई ने अपने ट्वीटर हैंडल के जरिए सुप्रीम कोर्ट पर हमला करना शुरू कर दिया है।

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न्याय के इतिहास में “काला दिन” बताया है। इस तरह उन्होंने देश की न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाया है। यही लोग हैं जो अक्सर भाजपा पर संविधान बदलने की कोशिश करने का आरोप लगाते हैं। लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट पर प्रश्न खड़ा कर देश के संविधान को चुनौती नहीं दी है? वैसे तो सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही अपने फैसले में इन पर अवमानना की प्रक्रिया चलाने की बात कही है। लेकिन क्या इनके खिलाफ संविधान अवमानना के तहत कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए?

आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने भी अपनी ट्वीट के जरिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर जजों के खिलाफ न्याय कौन करेगा? सवाल ये नहीं है कि उन्हें संविधान की जानकारी नहीं है, लेकिन क्या वे यह सवाल उठाकर एक फेक नैरेटिव स्थापित करने के प्रयास में नहीं लगे हैं? क्या उनके सवाल उनकी बौद्धिक मंशा पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगा रहा?

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने तो ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कही गई बात को ही साबित कर दिया है। सरदेसाई ने लिखा है कि अब यह लड़ाई कोर्ट में नहीं बल्कि राजनीतिक अखाड़े में लड़ी जाएगी। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ही कहा है कि राजनीतिक लड़ाई के तहत ही न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए इस मामले याचिकाएं दायर की गई हैं। अब सवाल उठता है कि क्या राजदीप सरदेसाई अब किसी राजनीतिक पार्टी की तरफ से इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। इस बात का खुलासा कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने ही अपनी ट्वीट में कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट को धमकाने वाले वामपंथी-कांग्रेसी वकीलों की हिम्मत तो देखिए?

जज लोया का परिवार भी कह रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह सही निर्णय दिया है। जज लोया के बेटे ने पहले भी कहा था कि हमारे पिता की मौत प्राकृतिक है, संदिग्ध नहीं। इस पर राजनीति न करें! लेकिन वामी-कांगी लॉबी को तो लोकतंत्र व न्यायतंत्र को बंधक बनाना था, सो याचिकाकर्ताओं में भी लोया के परिवार का नाम नहीं शामिल किया गया कि कहीं वह अदालत में यह न कह दें कि हमें जांच नहीं करानी!

भाजपा ने कहा, यह राहुल गांधी प्रायोजित अभियान था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने परवान नहीं चढ़ने दिया!

नागपुर के ज्वाइंट कमिश्नर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हमारी जांच के अनुरूप ही आया है। शुरू से ही यह एक प्राकृतिक मौत थी, जिसे बेवजह तूल दिया गया।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, यह कोई जनहित याचिका नहीं, कांग्रेस प्रयोजित याचिका थी।

यह भी पढ़ें:
Judge Loya Death Verdict: रवीश कुमार, The wair, प्रशांत भूषण जैसे वामी-कांगी लॉबिस्ट को सुप्रीम कोर्ट ने मारा तमाचा! कहा, अपने राजनीतिक हित साधने के लिए न्यायपालिका को कुछ लोग बदनाम कर रहे हैं!

URL: sc-dismisses-pil-seeking-probe-into-judge-loyas-death-Rahul gandhi lobby unhappy

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