जाते-जाते ‘रामभक्त’ पर कृपा कर गए रमणा. षडयंत्र भांप अंतिम समय में कपिल सिब्बल मुकदमे से हुए अलग.

ओम प्रकाश सिंह. सत्ता पाने के संघर्ष, सत्ता मिलने के बाद बंद नहीं होते। यही राजनीति का विद्रूप है कि वह इस संघर्ष के संग्राम में अपनों के लिए भी अनुदार हो जाती है। सत्ता के संग्राम में साजिशें बनती बिगड़ती रहती हैं। सत्ता के सिंहासन के लिए अपने ही, अपने के लिए, अपनों को साजिश का शिकार बनाते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी नित नई साजिशें रची जा रही हैं। हेट स्पीच के पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कल योगी आदित्यनाथ को क्लीन चिट दे दिया।

यह खबर सिर्फ इतनी नहीं है कि गोरक्षपीठाधीश्वर व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ हेट स्पीच प्रकरण याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने पोषणीय नहीं माना बल्कि यह रामकृपा थी कि रमन्ना के न्याय से रामदूत योगी के खिलाफ एक बड़ी साजिश भी नाकाम हो गई। सुप्रीम कोर्ट में एकाएक व लगातार मामले की सुनवाई, कपिल सिब्बल जैसे मंहगे वकील का मुकदमे में आना,राज्य सरकार के वकीलों के पैनल में कुछ नए नामों का शामिल होना, ये सब एक बड़ी राजनीतिक साजिश का इशारा करते हैं।

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परवेज परवाज बनाम उत्तर प्रदेश सरकार का हाई प्रोफाइल यह मामला सत्ताइस जनवरी 2007 को गोरखपुर में हिंदू युवा वाहिनी की एक बैठक का है। जिसे योगी आदित्यनाथ ने भी संबोधित किया था। उसी दिन गोरखपुर में दंगा भड़क गया और दो लोगों की मौत हो गई थी।इस मामले में यह कहा गया था कि भड़काऊ भाषण के कारण ही गोरखपुर में दंगा भड़का था। इसके बाद, योगी आदित्यनाथ समेत कुछ लोगों पर धारा 153, 153ए, 153बी, 295, 295बी, 147, 143, 395, 436, 435, 302, 427, 452 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे की तीव्र गति के साथ योगी आदित्यनाथ के विपक्ष की तरफ से कपिल सिब्बल जैसे मंहगे वकील का खड़ा होना कई सवाल खड़े करता है। हांलाकि कपिल सिब्बल ने सुनवाई के अंतिम दिन अपने आप को मुकदमे से अलग कर लिया। माना जा रहा है कि कपिल सिब्बल ने मुकदमे की आड़ में हो रहे षडयंत्र को सूंघ लिया था। यही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से जो वकीलों का पैनल था उसमें कुछ नए नाम शामिल कर दिए जाते हैं। पैनल में शामिल नाम चौंकाने वाले हैं। भाजपा अयोध्या के मीडिया प्रभारी डाक्टर रजनीश सिंह कहते हैं कि कुछ लोगों की साजिश के चलते मामले को तूल देने का घिनौना प्रयास किया गया, क्योंकि साजिशकर्ताओं को ये बात पता थी की योगी आदित्यनाथ नैतिक मूल्यों का अपने जीवन में अनुसरण करते हैं।

यूं तो पूरा मामला हेट स्पीच का दर्शाया जा रहा था लेकिन उसके अंदर जो गंभीर धाराएं लगी हुई थी, साजिशकर्ताओं की निगाह उसी पर थी। कोशिश यह थी कि न्यायालय इन धाराओं का संज्ञान ले ले और फिर यूपी में राजनीतिक खेला, खेला जाए। यदि न्यायालय इन धाराओं का संज्ञान लेता तो योगी आदित्यनाथ को तत्काल मुख्यमंत्री पद से तो हाथ धोना ही पड़ता, साथ में पूरे राजनीतिक जीवन पर दाग लगने से प्रधानमंत्री की दौड़ से भी रुखसती हो जाती।

योगी आदित्यनाथ का बढ़ता हुआ राजनीतिक कद विपक्ष से ज्यादा ‘अपनों’ को खल रहा है। अपनों नहीं बल्कि अपने दम पर 2022 विधानसभा की बंपर जीत भाजपा की झोली में डालने वाले योगी आदित्यनाथ को सरकार चलाने के साथ अपनों को भी साधना पड़ रहा है। कोरोना जैसी महामारी में कुशल प्रबंधन के साथ वैश्विक पत्रिका टाइम्स मैगजीन के मुखपृष्ठ पर छपने से योगी की वैश्विक पटल पर सकारात्मक छवि बनी।

हिंदुत्व के बाद योगी की राष्ट्रवादी छवि भी अपनों के दिल के दर्द का कारण बनती जा रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सबसे ज्यादा सांसद यहीं से जाने हैं। योगी का जादू चला तो स्वाभाविक रूप से संख्या बल के आधार पर योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री के लिए अपना दावा ठोकेंगे। प्रधानमंत्री की रेस में शामिल होने की खबरें ही योगी के खिलाफ अपनों को गैर बनाती हैं। इन्हीं अपनों ने गोरखपुर मामले में जोर तो लगाया लेकिन रामकृपा से रमन्ना के न्याय ने रामभक्त योगी को बेदाग साबित कर दिया।

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