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योग गुरु बाबा रामदेव के नाम एक खुला पत्र!

कुशुमलता केडिया। पूज्य महाराज जी के श्री चरणों में सादर प्रणाम। महाराज जी, मेरा विनम्र निवेदन है कि इस धारावाहिक के अगले सभी एपिसोड की सब किश्तें एक बार रामेश्वर मिश्र पंकज जी को बुलाकर दिखा लें, वे इन बारीकियों को समझते हैं, कला और संस्कृति के समीक्षक हैं और भारत शासन में संस्कृति परामर्शदाता भी रहे तथा अभी भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद के उस समिति के सदस्य हैं जो विदेश भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों के आवेदन पर विचार कर निर्णय लेती है।

आपसे सीधे बात करने का प्रयास सफल न होने पर यह सामाजिक माध्यम से सन्देश दे रही हूँ।

अपना निज अनुभव बता रही हूँ। वाटर फिल्म की शूटिंग काशी में हुयी और सब ब्राह्मणों तथा धर्म निष्ठ जनों ने विरोध शुरू किया तो फिल्म वालों ने पंडित विद्यानिवास मिश्र जी और महंत वीरभद्र मिश्र जी को समझा दिया कि यह तो समाज के एक दोष विधवा प्रथा पर है जो दूर हो तो समाज सबल होगा। दोनों समाजनिष्ठ, धर्मनिष्ठ थे और सहजता से मान गए। तब पूज्य श्री शेषाद्रि जी के कहने पर श्री कृष्ण गोपाल जी ने, जो उन दिनों काशी प्रान्त प्रचारक थे फिल्म की स्क्रिप्ट जो निर्माताओं ने उनसे अनुमोदन के लिए उन्हें दी थी, मुझे भेजी। मैं पूरा पढ़ गयी और लगा कि ठीक तो है यह कुप्रथा तो मिटनी ही चाहिए ।

संयोग वश उसी दिन पंकज जी दिल्ली से काशी पहुंचे और मैंने स्क्रिप्ट उन्हें भी देख लेने कहा ताकि और पुष्टि हो जाये क्योंकि वे तो समाज की कुप्रथाओं के प्रचंड विरोधी हैं ।उन्होंने कई घंटे ध्यान से पढ़ १०० से अधिक जगह निशांन लगाकर मुझे देते हुए कहा कि यह तो भयंकर फिल्म है, इसे तत्काल रोकना चाहिए। कोई अन्य समाज तो इन कमीनों को जिन्दा जला देता जो यह फिल्म बना रहे हैं पर हम ऐसा नहीं कर सकते परन्तु प्रचंड विरोध आवश्यक है।

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तब मैंने पूछा क्योंकि मुझे तो वह ठीक ही लगी थी।

तब एक एक चिन्हित अंश समझा कर दिखाया कि यह तो झूठ और विद्वेष से बनी हिन्दू धर्म की विरोधी फिल्म है और यह स्पष्ट आह्वान कर रही है नायक के द्वारा कि “ऐ हिन्दुओ, क्रिश्चियन हो जाओ क्योंकि वही सच्चा प्रकाश है’ उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माता देशद्रोही हैं और धर्मद्रोही हैं पर यहाँ अभी ऐसा अजीब शासन है कि उसे हिन्दू धर्म अंधकार से भरा ही दिखता है तो इसका एक ही उपाय है प्रचंड विरोध क्योंकि धर्म-अधर्म तो ये शासक प्रशासक मानते नहीं। ये केवल लॉ और आर्डर की भाषा समझते हैं पंकज जी की बात मैंने शेषाद्रि जी को बताई तो उन्होंने कहा, वे ठीक कह रहे हैं, इसका प्रचंड विरोध काशी के जन करें। पंकज जी ने विद्यानिवास जी से कहा तो उन्होंने उनकी बात सुनकर जो वे वक्तव्य वाटर के लिये समर्थन के लिए देने जा रहे थे! उसे तुरंत रोक लिया। महंत जी भी उनकी बात से गंभीर हो गए ।

अतः ऐसी बारीकी वे ही पकड़ पाते हैं इसलिए महाराज जी एक बार उन्हें स्क्रिप्ट दिखा लें।

महाराज जी आपकी महिमा समाज में यही है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लूट रोकी और भारतीयता की ज्योति जलाई। अब इस धारावाहिक के जरिये यदि आप हिन्दू समाज, धर्म और ब्राह्मणों के विरुद्ध Multi Nationals के हाथ खेलते और भारत के विरुद्ध नियोजित दुष्प्रचार द्वारा राष्ट्र को तोड़ने के लिए सक्रिय शक्तियों की कठपुतली बनते दिखे तो इस से आपका सुयश तो छिनेगा ही साथ ही साथ देश का बड़ा अहित होगा।

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आपको मैं देश की विभूति और अवतारी पुरुष मानती रही हूँ परन्तु अगर आपका अवतरण प्रयोजन पूर्ण हो गया (आयुर्वेद और योग प्रसार से) तो एक ठांव शांत ध्यान समाधि कीजिये जैसे भगवान् परशुराम भगवान श्री राम के आने पर चल दिए थे। अब आप हठ वश देश के दुश्मनों के हाथ की कठपुतली मत बनिये! यह आपको बहुत छोटा बना देगा। जबकि आप बहुत बड़े हैं महाराज जी! ब्राह्मणों और सन्यासियों के प्रति हिन्दू समाज की श्रद्धा ने ही आपको इतनी ऊँचाई तक पहुंचाया है। अब आप जिस डाल पर बैठे हैं उसी पर कुल्हाड़ी चला रहे हैं यह क्या हो गया आपको महाराज जी?

यदि ब्राह्मणों और सन्यासियों के प्रति हिन्दू समाज मे श्रद्धा नहीं रही होती तों ये ही बहु-राष्ट्रीय कम्पनियाँ आपको विकृत व्यक्ति प्रचारित कर हवा में कब का उड़ा देतीं! कहाँ फंस गए महाराज जी? जागिये! आवश्यक समझें तो चर्चा कर सकते हैं यों तो आप अत्यंत बुद्धिमान हैं। क्या कहूँ? विवशता में यह सन्देश दे रही हूँ!
सादर चरण-वंदन!

नोट: लेखिका इतिहासकार हैं।

साभार: फेसबुक।

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