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प्रिय पाठकों, मित्रों, व सहयोगियों!

उम्मीद है indiaspeaksdaily.com की खबरों से आप संतुष्ट होंगे। India Speaks Daily ने बेहद कम समय में हिंदी भाषा में अपने पाठकों को विश्वसनीय पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई है, ताकि भारतीय शास्त्रार्थ परंपरा की राह पर चलते हुए देश में झूठे विमर्श के बल पर विकसित हो चुके बौद्धिक आतंकवाद को हम ध्वस्त कर सकें।

हमारी इस पहल का मकसद ही है, वामपंथी पत्रकारों व बुद्धिजीवियों द्वारा फैलाए जा रहे ‘फेक न्यूज’ को सामने लाना, ‘फेक नरेशन’ को तथ्यगत तरीके से एक्सपोज करना और भारतीय ज्ञान परंपरा यानी इंडोलॉजी को जन-जन तक पहुंचाना। इंडोलॉजी में हमारा साहित्य, हमारी संस्कृति, हमारा इतिहास, हमारे जीवन मूल्य, हमारा धर्म-यानी हमारी संपूर्ण सभ्यता समाहित है।

भारत झूठे विमर्श का खामियाजा सदियों से भुगत रहा है, और यह प्रयास आज भी जारी है। मसीह, मोहम्मद, मार्क्स, मैकाले और माओवावादियों ने झूठे तथ्य और तर्क से बार-बार ‘राष्ट्र’ के चिंतन पर प्रहार किया है और यह साबित करने का प्रयास किया है कि भारत न कभी एक राष्ट्र था, न एक राष्ट्र है और न ही भविष्य में कभी एक राष्ट्र हो सकता है, जबकि ऋग्वेद में साफ-साफ राष्ट्र की व्याख्या प्रस्तुत की गई है।

इन ‘पंच-मक्कारवादियों’ (M5) का मकसद ही भारतीयों के विश्वास को तोड़ना रहा है ताकि भारतीयों में अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति गर्व का भाव ही पैदा न हो सके। ऐसे में देश को तोड़ना बेहद आसान हो जाता है है और यही इनका प्रयास है। भारत में जाति, संप्रदाय, भाषा, प्रांत आदि के झगड़े पैदा कर विभाजन की गहरी रेखा खींचने में इन्हीं ‘पंच-मकारवादियों’ का योगदान रहा है।

आदि शंकर से पूर्व ऐसे धर्मद्रोहियों को ‘पंच-मकारवादी’ कहा जाता है, आधुनिक काल में हमने इसे ‘पंच-मक्कार’ की संज्ञा दी है। आज के संदर्भ में इन ‘पंच-मक्कारवादियों’ (M5) को आप इस तरह समझिए- मसीहवाद यानी कन्वर्जन व विखंडन, मोहम्मदवाद यानी कट्टरता,अलगाव व आतंक, मार्क्सवाद यानी बौद्धिक पाखंड व फरेब, माओवाद यानी विद्रोह, नक्सलवाद व भारत को तोड़ने का प्रयास एवं मैकालेवाद यानी अंग्रेजीयत व अभिजातवर्गीय मानसिकता का प्रकटीकरण व भारतीय संस्कृति के प्रति हेयदृष्टि का बोध।

यह  ‘पंच-मक्कार’  मिलकर ‘पांचवें स्तंभ’ का निर्माण करते हैं, जिनका मकसद हर हाल में देशद्रोही गतिविधियों को बढ़ावा देना और देश को अशांत व अस्थिर किए रखना है ताकि मौका पड़ने पर इसे छिन्न-भिन्न किया जा सके। इसमें शैक्षणिक, मीडिया एवं स्वयंसेवी (NGOs) संस्थानों और इससे बड़े पैमाने पर संबंधित प्रोफेसरों, पत्रकारों (खासकर अंग्रेजी पत्रकारों), साहित्यकारों, कलाकारों, फिल्मकारों, न्यायविदों और एक्टिविस्टों की बड़ी भूमिका है।

इन ‘पंच-मक्कारवादियों’ (M5) को जब तक वेब पोर्टल पर प्रति दिन तथ्यगत पोस्ट के जरिए हम तथ्य और तर्क के सहारे ध्वस्त नहीं करेंगे, वर्ष में कम से कम दो पुस्तकों का लेखन व प्रकाशन नहीं करेंगे और भारतीय ज्ञान परंपरा को जब तक बोलचाल की भाषा में जन-जन तक नहीं ले जाएंगे, तब तक हमारी आने वाली पीढ़ी यूं ही गुमराह होती रहेगी, जैसे आजतक हम सब होते रहे हैं। सीधे शब्दों में कहें तो हमें ‘फर्जी विमर्श’ (Fake narratives) की जगह भारतीय विमर्श (Indigenous narratives) को बढ़ावा देना और लोगों में उसकी समझ विकसित करना होगा।

2 अप्रैल 2018 से India Speaks Daily के लिए राष्ट्रीयता की सोच से भरे कुछ युवाओं को जोड़कर उपरोक्त उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हमने काम करना शुरु किया है। कई स्वतंत्र लेखकों व पत्रकारों को भी जोड़ा है। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस सोच के कायल हैं कि ‘नौकरी लेने वाले नहीं, देने वाले बनिए।’ हमने छोटे स्तर पर ही सही, इसकी शुरुआत कर दी है।

आपके द्वारा दान/ सदस्यता के रूप में दी गई रकम का उपयोग हम इंडिया स्पीक्स के संचालन, वेब इंप्रूवमेंट, सर्वर मेंटिनेंस, कार्यालय किराया व खर्चे, भारतीय ज्ञान परंपरा व शास्त्रों को लेकर शोध, पुस्तकों की खरीद, साथ काम करने वालों का वेतन, स्वतंत्र लेखकों व पत्रकारों को मेहनताना आदि पर खर्च कर रहे हैं। डोनेशन/सदस्यता की रकम अभी ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान है। हर महीने करीब तीन लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन दान और सदस्यता से 30 से 40 हजार रुपये प्रति महीने से अधिक नहीं आ पा रहा है। राष्ट्रवादी पत्रकारिता करने वालों के प्रति लोगों की उदासीनता सबसे बड़ी विडंबना है, जबकि देशतोड़क वामपंथी विचारधारा के वेब में करोड़ों की फंडिंग हो रही है! तभी तो आज हर देश विरोधी तथाकथित बड़ा पत्रकार दो-तीन बड़े वेब की छतरी के नीचे जमा होकर फेक न्यूज और फेक विमर्श की फैक्टरी चला रहे हैं।

आपके सहयोग के लिए हम आपका धन्यवाद करते हैं, लेकिन अभी तो एक-दो मित्र मिलकर अपनी-अपनी बचत से ही इसे चलाने का प्रयास कर रहे हैं!  यदि इसी तरह राष्ट्रवादियों की उदासीनता हावी रही तो भविष्य में हमें इंडिया स्पीक्स को बंद करना पड़ सकता है, जबकि 2019 का समर हमारे सामने है। यदि हजार-दो हजार लोग भी हर महीने अपनी बचत में से निकाल कर एक छोटी रकम इंडिया स्पीक्स डेली को चलाने के लिए दान /सदस्यता के रूप में दें तो उत्साहवद्धर्क शुरुआत हो सकती है और हम सुचारू रूप से एक बड़ी टीम बनाकर युद्धस्तर पर काम कर सकते हैं।

पत्रकारिता, लेखन, कला, साहित्य, इतिहास, सिनेमा के क्षेत्र में छद्म रूप धारण कर बैठे ‘पंच-मक्कारवादियों’ बुद्धिजीवियों के खिलाफ बौद्धिक लड़ाई में आपका योगदान महत्वपूर्ण है। इसलिए कृपया शास्त्रार्थ की इस भारतीय परंपरा में हमें सहयोग कर सहभागी बनें। और हां, हमारा फाउंडेशन 80G, 12 A और FCRA जैसे प्रावधानों को भी पूरा करती है। इसलिए आप आयकर में इसका उल्लेख कर अपना इनकम टैक्स भी बचा सकते हैं। आप यदि कोई कंपनी चलाते हैं तो हमें अपने CSR फंड से भी सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

हम और हमारी टीम आपसे सहायता की अपेक्षा रखते हुए विश्वास दिलाते हैं कि छल, छद्म और देशद्रोह को बढ़ाने के प्रयास में जुटे बौद्धिक आतंकवादियों से सहमे जन-जन को तथ्य और तर्क से शास्त्रार्थ के लिए सक्षम बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमारा टैग लाइन है- War Against Fake News, Fake Narration and Fake perception. राष्ट्रवादी साथियों से आह्वान है कि आइए राष्ट्रवादी पत्रकारिता व लेखन के जरिए हम दशकों से चल रहे ‘फेक विमर्श'(fake narratives) को ध्वस्त करें और राष्ट्र की मुख्यधारा के विमर्श (Indigenous narratives) को पुनः जिंदा कर स्वर्णिम भारत के स्वप्न को साकार करें! वंदेमातरम! जय हिंद! जय भारत!

India Speaks daily: War against Fake news, Fake narration & Fake perception.

धन्यवाद!

संदीप देव
संस्थापक संपादक
इंडिया स्पीक्स डेली

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