अक्षय कुमार की ‘पैडमैन’ की नकल कर जीत लिया ऑस्कर अवार्ड

एक विदेशी निर्देशिका द्वारा भारत के एक गांव पर बनाई गई शार्ट डाक्यूमेंट्री ‘पीरियड: एंड ऑफ़ सेंटेंस को ऑस्कर अवार्ड से नवाज़ा गया है। भारत में मासिक धर्म को लेकर उपजी समस्याओं पर आधारित ये डाक्यूमेंट्री हापुड़ गांव में फिल्माई गई है। फिल्मों से जुड़े लोगों ने इसकी घनघोर आलोचना करते हुए बताया है कि ये शार्ट डाक्यूमेंट्री अक्षय कुमार की ‘पैडमैन’ की कोरी नकल है। ऑस्कर के लिए इसे चुना जाना हास्यापद है।

 

1957 में  ‘मदर इंडिया’ पहली भारतीय फिल्म के रूप में ऑस्कर अवार्ड्स में भेजी गई थी लेकिन जीत नहीं सकी।  बाद के 49 वर्षों में भारतीय फ़िल्में लगातार  ऑस्कर में भेजी जाती रही लेकिन बड़ा अवार्ड हासिल नहीं कर सकी। इस साल शार्ट डाक्यूमेंट्री ‘पीरियड: एंड ऑफ़ सेंटेंस’ ने ऑस्कर हासिल कर लिया है। क्या ये ऑस्कर भारत की फिल्म मेकिंग को वाकई सम्मान दे सकता है?

हमारी बेहतरीन फिल्मों को ऑस्कर से बाहर कर दिया जाता है लेकिन भारत की गरीबी और अन्य समस्याएं दिखाने वाली फिल्मों को अवार्ड दिया जाता है। पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस’ को चुना ही इसलिए गया है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर महिला स्वास्थ्य को लेकर भारत की आलोचना की जा सके। ‘गोरी सभ्यताओं’ से पुरस्कृत होने पर मीडिया का घुंघरू तोड़ नाच अनवरत जारी है।

 

ऑस्कर अवार्ड्स की मानसिकता ये है कि सलाम बॉम्बे, स्लमडॉग मिलिनियर को अवार्ड के लिए नामांकित किया जाता है क्योंकि इन फिल्मों में भारत की गरीबी दिखाई गई थी। हमारा सशक्त सिनेमा उन्हें हज़म नहीं होता या ये कहे कि वे उसे नज़रअंदाज़ कर देना चाहते हैं। महात्मा गाँधी पर बनी फिल्म ‘गाँधी’ इसलिए चुन ली जाती है क्योंकि इसका निर्देशक कोई भारतीय न होकर एक यूरोपियन था। शुजीत सरकार की ‘अक्टूबर’, और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बेहतरीन फिल्म ‘मंटो’ नकार दी जाती है। वे ऐसा ही सिनेमा देखना चाहते हैं, जिसमे हमारी निर्धनता और लाचारी दिखाई दे और वे उसे पुरस्कृत कर भारत का दुष्प्रचार करें।

 

इस साल के ऑस्कर के लिए भारत की ओर से असमिया भाषा की फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ को विदेशी भाषा के नामांकन में भेजा गया था। यह फिल्म गरीबी में पली बढ़ी लड़की धुनू की कहानी है जो इन परिस्थितियों में भी रॉक बैंड बनाने और किसी दिन अपना गिटार हासिल करने के अपने सपने से पीछे नहीं हटती। एक प्रेरक फिल्म को ऑस्कर नकार देता है और एक शार्ट डाक्यूमेंट्री का चयन करता है जो भारत की ओर से नहीं भेजी गई थी लेकिन विदेशी मंच के लिए इसमें तमाशे का बहुत मसाला था।

 

‘पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस’ की निर्देशिका रायका जेताबकी ईरान से ताल्लुक रखती हैं। इसकी निर्माता मेलिसा बर्टन एक अमेरिकन हैं और डाक्यूमेंट्री भारत पर बनाती हैं। वे एक सक्सेस स्टोरी की आड़ में दिखाना चाहती हैं कि भारत की महिलाएं मासिक धर्म जैसी सामान्य समस्याओं को लेकर जागरूक नहीं हैं। वे ये नहीं बताना चाहती कि भारत की लड़की अब लड़ाकू विमान उड़ाने लगी है। ऑस्कर अवार्ड्स जैसे पुरस्कारों के बहाने भारत को बदनाम करने का षड्यंत्र तो सन 1957 से चला आ रहा है लेकिन भारत अब मुखर होकर ऐसी साजिशों का प्रतिकार करना सीख गया है।

 

URL: A film about menstruation just won an Oscar.

Keywords: Best Short Documentary, Oscar awards, Period: End of Sentence, Rayka Zehtabchi

 

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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