मोदी सरकार ने वामपंथी ट्विटर पर चलाया डंडा !



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ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के खिलाफ नागरिक अधिकारों की अवहेलना के मामले में मिली शिकायत के आधार पर सूचना एवं प्रौद्योगिकी मामले के संसदीय समिति ने समन जारी कर 11 फरवरी को पेश होने को कहा है। यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी के सदस्यों ने ट्विटर और फेसबुक पर कांग्रेस और वामपंथी विचाराधारा के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए रविवार को  नागरिक अधिकार की सुरक्षा के समर्थन में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्विटर और फेसबुक ने व्यवस्थित रूप से ऐसे व्यक्तियों की ‘बोलने की आजादी’ पर रोक लगाने की कोशिश की है जो गैर-वामपंथी विचारधारा के होते हैं। ट्विटर और फेसबुक ने ऐसे हैंडल को निलंबित करके, उनको ट्रेंड लिस्ट में पहुंचने से भी रोका है।

लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर ने अपने ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी है कि सूचना प्रौद्योगिकी मामले को देखने वाली संसदीय समिति इस मामले की जांच करेगी। उन्होंने लिखा है कि सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन न्यूज मीडिया प्लेटफॉर्म पर नागरिक अधिकार सुरक्षा मामले में मेटी तथा ट्वीटर अपना पक्ष रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले पर लोगों से अपना विचार रखने के लिए ट्वीट करने को कहा है।

इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि संसदीय समिति ने ट्विटर इंडिया को सोशल और ऑनलाइन न्यूज प्लेटफार्म पर नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा मसले पर समन जारी कर उन्हें 11 फरवरी को पेश होने का कहा है। संसदीय समिति ने इस मामले में मेटी को भी हाजिर होने को कहा है।

वहीं इस मामले में एक ज्ञापन भी भेजा गया है। यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी ट्विटर के खिलाफ अपने प्रदर्शन को लेकर एक ज्ञापन भेजा है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में ट्विटर और फेसबुक ने बहुत ही पक्षपातपूर्ण तरीके से ऐसे लोगों की ‘बोलने की आजादी’ पर रोक लगाने की कोशिश की है जो गैर-वामपंथी विचारधारा के होते हैं। ट्विटर के इस पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी के सदस्यों का कहना है कि चुनावी साल में किसी एक पार्टी के पक्ष में ऐसी पक्षपाती साजिश से चुनाव प्रभावित हो सकता है। गौर हो कि ट्विटर की इस तानाशाही रवैये के विरोध में यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी के सदस्यों ने ट्विटर के दफ्तर के बाहर नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वामपंथी विचारधारा वाले और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अपमानजनक, अभद्र और धमकी वाले ट्वीट की अनदेखी कर रहा है। यहां तक कि प्रोपेगेंडा चलाने और फेक न्यूज फैलाने वाले ऐसे हैंडलर्स का एकाउंट भी वैरिफाइड कर रहा है। उनका कहना है कि चुनावी साल में इस प्रकार किसी एक पार्टी का पक्ष लेना भारतीय लोकतंत्र के फ्री एंड फेयर इलेक्शन के विचार के खिलाफ है।

यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी के सदस्यों ने ट्विटर के खिलाफ चलाए विरोध अभियान में साथ देने वालों की कृतज्ञता जताई है।

 

URL : Parliamentary committee summons twitter and meity on ban!

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