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JNU की प्रयोगशाला से निकला है पीएम को मारने की साजिश रचने वाला रोना विल्सन!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तरह मारने का खुलासा जिस चिट्ठी से हुई है वह चिट्ठी जेएनयू के पूर्व छात्र रहे रोना विल्सन के घर से मिली है। रोना विल्सन अभी भीमा कोरेगांव आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने और पूरे देश में उत्पात मचाने के लिए नक्सली आतंकवादियों से मिलकर साजिश के आरोप में पुलिस हिरासत में है। नक्सली आतंकियों के साथ साठगांठ कर दलितों के नाम पर देश भर में हिंसा करने की साजिश रचने के आरोप में पुणे पुलिस ने दो दिन पहले ही रोना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। छापे के दौरान जेएनयू के पूर्व छात्र रहे रोना विल्सन के ही घर से पुणे पुलिस को वह चिट्ठी मिली है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने के प्लॉट रचने का खुलासा हुआ है।

मुख्य बिंदु

* देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए जीएन साईबाबा निकट सहयोग रहे है रोना

* गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम जैसे कानून के खिलाफ अभियान चलाने में भी सक्रिय रहे हैं विल्सन

जेएनयू में पढ़े इस पूर्व छात्र रोना ने तथ्य और तर्क का रास्ता छोड़कर नक्सलियों के विचार को मूर्तरूप देने में जुट गया था। सबको मालूम है कि नक्सलियों का मूल विचार ही हिंसा है। वैसे भी मार्क्सवादी के विचार सुविधावादी लोकतांत्रिक मूल्य आधारित रही है वे सच्चे लोकतंत्र के हिमायती कभी रहे ही नहीं, जिसमें विरोधी विचारों के समावेश की बात है। तभी तो रोना ने तथ्य और तर्क जब उसके खिलाफ हो गए तो उन्होंने हिंसा अख्तियार करने का रास्ता चुना। वैसे भी नक्सली का लक्ष्य लोकतांत्रिक मूल्य के सहारे दिल जीतना नहीं बल्कि सर कलम कर सत्ता हासिल करना है।

जेएनयू तो शुरू से ही नक्सली मार्क्सवादियों का गढ़ रहा है। विगत कुछ सालों में तो यह विश्वविद्यालय देशद्रोहियों और आतंकियों का प्रयोगशाला भी बन गया है। तभी तो वहां देश के खिलाफ उमर खालिद और कन्हैया जैसे छात्र देश के टुकड़ करने के नारे लगाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने के खुलासे से तो यह भी साबित हो गया है, इसी विश्वविद्यालय में देश को अस्थिर करने के लिए प्रधानमंत्री की हत्या करने की साजिश रचने की ट्रेनिंग मिली होगी।

पुणे पुलिस को प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचने वाली जो चिट्ठी हाथ लगी है उससे पता चलता है कि देश में बन रही भाजपा की सरकार से माओवादी कितने निराश हैं। उन्हें अपने वजूद पर संकट दिखाई देने लगा है। इसके लिए वे अगर किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार मानते हैं तो वे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। उस पत्र में साफ है कि इतने विरोध तथा बिहार और दिल्ली में करारी हार के बावजूद मोदी ने देश के 15 राज्यों में सफलता पूर्वक भाजपा की सरकार स्थापित कर दिया है। अगर भाजपा की आगे बढ़ने की गति यही रही तो फिर नक्सलियों का सफाया होना तय है। अपने वजूद को बचाये रखने के लिए ही रोना विल्सन ने नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रच डाला।

बताया गया है कि कुछ किसानों और वरिष्ठ नक्सली नेताओं ने ठोस कदम के साथ मोदी राज को खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। उनके इस प्रस्ताव में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की तरह ही देश में एक और घटना को अंजाम देने की बात कही गई थी। हालांकि पत्र में यह स्वीकार किया गया है यह कदम आत्मघाती भी साबित हो सकता है, साथ में यह भी बताया है कि पार्टी के अस्तित्व के लिए यह जरूरी भी है। पत्र में इस योजना के लिए 8 करोड़ रूपये नकद के साथ एम-4 बंदूक की वार्षिक आपूर्ति करने की भी बात कही गई है।

नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने के आरोपी रोना विल्सन मूल रूप से केरल के हैं लेकिन अभी दिल्ली स्थित कमिटी फॉर रिलीज ऑफ पोलिटिकल प्रिजनर्स के लोक संपर्क सचिव हैं। विल्सन शुरू से ही गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम तथा सशस्त्र सैनिक (विशेष ताकत) अधिनियम जैसे काननू के खिलाफ अभियान चलाने में काफी सक्रिय रहे हैं। आरोप है कि मार्च 2017 में आजीवन कारावास की सजा मिलने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जीएन साईबाबा के निकट सहयोगी रहा है। नक्सलियों और राष्टविरोधी गतिविधियों से जुड़े लोगों के माध्यम से देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले में साईबाबा को दोषी पाए जाने के कारण ही गठचिरौली सेशन कोर्ट ने उसे आजीवन कैद की सजा सुनाई है। इससे स्पष्ट है कि रोना विल्सन का लिंक शुरू से ही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों से रहा है।

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