प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी क्षमता के स्रोत का खोला राज, हिमालय से मिली सीख को कभी खुद से अलग नहीं किया !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने अनछुए पहलुओं से पर्दा उठा दिया है। जो लोग आज तक उनकी क्षमता के स्रोत तथा हिमालय में बिताए अपने दो वर्षों के राज से अनभिज्ञ थे उनके सामने भी सारा राज खोल दिया है। उन्होंने मशहूर फेसबुक पेज द ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे को साक्षात्कार देने के दौरान युवाओं और अपने साथियों को एक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि किसी को रोशनी खोजने के लिए बाहर झांकने की जरूरत नहीं है क्योंकि सभी के अपने भीतर ही रोशनी होती है, बस जरूरत है तो अपने अंदर झांकने की और उसे पहचानने की। इस साक्षात्कार में मोदी ने बचपन से लेकर अपनी क्षमता तक के बारे में बताया है।

अपने साक्षात्कार के दौरान उन्होंने देश के युवाओं से स्वयं के बारे में सोचने और आत्मनिरीक्षण करने का आग्रह किया है। इसके लिए उन्होंने अपना उदाहरण दिया है कि किस प्रकार वे दिवाली के समय पांच दिनों के लिए उन जंगलों में चला जाया करते थे जहां स्वच्छ पानी के अलावा कोई मनुष्य नहीं होता था। उन्होंने कहा कि इस बारे में अधिकांश लोग नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि उस समय न तो रेडियो होता था न अखबार। उस दौरान न टिवी था न इटरनेट। उस निर्जन समय से जो मुझे ताकत मिली वह आज तक मुझे अपने जीवन तथा दूसरे अनुभवों को संतुलित करने में मदद करती है। उस समय अक्सल लोग पूछा करते थे कि आप किनसे मिलने जा रहे हैं? तो जवाब देता था ‘मैं खुद से मिलने जा रहा हूं’। इसी अनुभव के आधार पर युवाओं को अपनी निजी व्यस्तता से समय निकाल कर आत्मनिरीक्षण करने का सुझाव देता हूं। क्योंकि निर्जनता और अकेलापन आपको अपनी धारणा बदल देगा और खुद को समझने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐसा करने से आने वाले समय में लाभ होगा। उन्होंने कहा कि आप सब असाधारण हैं। आपको रोशनी के लिए बाहर झांकने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह पहले से ही आपके अंदर विराजमान है।

इस साक्षात्कार में उन्होंने हिमालय में बिताए दो साल से लेकर आरएसएस के प्रति झुकाव के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि हिमालय से वापस लौटने के बाद ही वह अपना ध्येय समझ लिया था। उन्होंने कहा कि दूसरों की सेवा करना ही अपना ध्येय बना लिया था। थोड़े दिन बाद ही वह अहमदाबाद चले गए। किसी बड़े शहर में रहने का उनका यह पहला अनुभव था। अहमदाबाद में रहने के दौरान वे कभी कभार अपने चाचा को कैंटीन चलाने में मदद करते रहे। इसके बाद आखिरकार वे आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। इस दौरान उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के संपर्क में आने और उनसे बाचतीत करने के साथ विस्तृत कार्य करने का मौका मिला। उन्होंने सबके साथ मिलकर आरएसएस के कार्यालय की सफाई से लेकर अपने सहयोगियों के लिए खाना बनाने से लेकर बर्तन साफ करने तक का काम प्रसन्न भाव से किया।

उन्होंने कहा कि हिमालय में समय व्यतीत करने के दौरान उन्हें जो शांति मिली उसे कभी खोया नहीं। उसी शांति की बदौलत वे आज तक अनुशासित होकर अपने ध्येय को पूरा करने में संलग्न हैं।

URL : PM Modi never separated his learning of Himalayas from himself!

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