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राफेल डील, विरोधियों थोड़ा जान लो इसकी खूबी, फिर मोदी सरकार को घेरना!

विरोध करना बुरी बात नहीं होती, बुरी बात होती है बगैर जानकारी विरोध करना। राफेलडील पर जो लोग विरोध कर रहे हैं उन्हें न तो समझौते की प्रक्रिया की जानकारी है न ही राफेललड़ाकू विमान की अभूतपूर्व क्षमता तथा उसकी उपयोगिता की। ये बात किसी और ने नहीं बल्कि वायु सेना के उप प्रमुख एसबी देव ने कही है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि जो लोग राफेलडील का विरोध कर रहे हैं या सवाल उठा रहे हैं उन्हें इस लड़ाकू विमान तथा इसके लिए हुए समझौते के बारे में कोई जानकारी नही हैं। जिस राफेल लड़ाकू विमान का हमारी वायु सेना बेसब्री से इंतजार कर रही है, उसे ही रोकने के लिए मनोहर लाल शर्मा नाम के एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। जरा सोचिए हमारी सेना को कमजोर करने के लिए किस स्तर तक साजिश रची जा रही है? इस मामले में सवाल तो कांग्रेस पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी उठता है। राफेल डील को कांग्रेस पार्टी की यूपीए सरकार ने ही शुरू किया था। आखिर क्या वजह है कि उसी डील को तुलनात्मक दृष्टि से बेहतर दाम में तय करने वाली मोदी सरकार की राहुल गांधी आलोचना क्यों कर रहे हैं?

मुख्य बिंदु

* भारतीय वायु सेना के उपप्रमुख एसबी देव ने राफेल को एक बेहतरीन लड़ाकू विमान और इसकी क्षमता को अभूतपूर्व बताया है

* जिस राफेल लड़ाकू विमान का हमारी वायु सेना बेसब्री से इंतजार कर रही है उसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है

याचिका स्वीकार की जानी चाहिए?

राफेलडील के खिलाफ मनोहर लाल शर्मा की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर ली है और इसपर अगले सप्ताह सुनवाई भी होगी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच इसकी सुनवाई भी करेगी। इस बेंच में जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा जस्टिस खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ होंगे। लेकिन सवाल उठता है कि क्या जिस वकील ने राफेल डील के खिलाफ याचिका दी है, उसे इस समझौते और विमान के बारे में पूरी जानकारी है? जैसे वायु सेना के उप-प्रमुख एसबी देव ने कहा कि इसका विरोध करने वालों को बास्तविक जानकारी नहीं है, ऐसे में किसी अज्ञानी व्यक्ति की याचिका स्वीकार की जानी चाहिए? वो भी तब जब वायु सेना इस विमान की बेसब्री से इंतजार कर रही है?

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विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान पर भारी पड़ेंगे हम

विशेषज्ञों के मुताबिक राफेललड़ाकू विमान आ जाने के बाद हमारी सामरिक क्षमता काफी बढ़ जाएगी। इस डील के बाद जहां हम पाकिस्तान पर भारी पड़ेंगे वहीं चीन भी हमसे युद्ध करने से पहले सौ बार सोचेगा। क्योंकि इस लड़ाकू विमान की क्षमता अदभुत है। एशिया टाइम्स के रक्षा विश्लेषक इमैनुएल स्कीमिया का कहना है कि परमाणु हथियारों से लैस राफेलविमान हवा से हवा में 150 किलोमीटर तक मिसाइल दाग सकता है और हवा से ज़मीन तक इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर है। उनका कहना है कि राफेल की क्षमता पाकिस्तान की एफ़-16 लड़ाकू विमान से कहीं ज्यादा है। वहीं आईडीएसए के विशेषज्ञों का कहना है कि ‘पाकिस्तान के पास अभी जितने लड़ाकू विमान है, वह चाहे जे-17, एफ़-16 या मिराज हो, इन सबसे राफेल लड़ाकू विमान की टेक्नोलॉजी काफी एडवांस है। इन विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि भारत को महज 36 राफेल लड़ाकू विमान नहीं बल्कि इससे कहीं ज्यादा की जरूरत है। रक्षा विश्लेषक राहुल वेदी का कहना है कि राफेल विमान आ जाने से भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ेगी। तभी तो हमारी वायु सेना इसका बेसब्री से इंतजार कर रही है। वेदी का कहना है कि इसकी संख्या बहुत कम है। उनका मानना है कि 36 राफेल विमान तो अंबाला और पश्चिम बंगाल के हासीमारा स्क्वाड्रन में ही खप जाएंगे।

क्यों बेहतरीन है राफेल लड़ाकू विमान?

रफेल डील का विरोध करने वालों के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर भारत को यह लड़ाकू विमान क्यों चाहिए? भारतीय वायु सेना को राफेल लड़ाकू विमान इसलिए चाहिए क्योंकि जहां इसकी क्षमता अभूतपूर्व है वहीं इसका टार्गेट भी अचूक है। इस बारे में पूर्व रक्षा मंत्री तथा गोवा के वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का कहना है कि इस विमान का निशाना अचूक है। खास बात है कि यह विमान हर दिशा में निगरानी रखने में सक्षम है। यह ऊपर-नीचे, अगल-बगल हर तरफ निगरानी रख सकता है। इस विमान के पायलट को सिर्फ अपने दुश्मन को देखने भर की देरी होगी, दुश्मन को देखते ही बटन दबाना होगा शेष काम उसमें लगा कंप्यूटर खुद-बखुद दुश्मन को मिटाने का काम कर लेगा। वैसे भी लड़ाकू विमान के विशेषज्ञों का कहना है किसी भी लड़ाकू विमान के लिए उसकी विजीविलिटी महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में पर्रिकर ने कहा है कि इस विमान की दृश्यता 360 डिग्री है। वैसे भी कोई लड़ाकू विमान कितना ताक़तवर है यह उसकी सेंसर क्षमता और हथियार पर निर्भर करता है। कोई लड़ाकू विमान कितनी दूरी से देख सकता है और कितनी दूर तक मार कर सकता है। उसकी ताकत इसी पर निर्भर करती है। इस मामले में राफेलविमान आधुनिक लड़ाकू विमान है।

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भारतीय सेना के धीमी आधुनिकीकरण के लिए कौन जिम्मेदार

स्वतंत्रता के बाद जो देश अपने पड़ोसी देशों से पांच बार युद्ध लड़ चुका हो उस देश की सेना का आधुनिकीकरण की प्रक्रिया 72 साल बाद भी चल ही रही हो आखिर उसके लिए जिम्मेदार कौन है? राफेलडील का विरोध करने वालों को यह भी सोचना चाहिए। जो राहुल गांधी आज राफेलडील पर मोदी सरकार को घेरने में जुटे हैं उनकी जिम्मेदारी तो सबसे ज्यादा बनती है। क्योंकि उन्हीं की पार्टी की सरकार अधिकांश समय तक देश पर शासन किया है। कई रक्षा विश्लेषकों का कहना कि भारत की सेना के आधुनिकीकरण की रफ़्तार काफ़ी धीमी है। उनका कहना है कि हमारे देश के कई लड़ाकू विमान 1970 और 1980 के दशक के हैं। 25-30 साल के बाद पहली बार टेक्नोलॉजी के स्तर ने इतनी लंबी छलांग लगाई गई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हमे राफेल लड़ाकू विमान की काफी जरूरत थी, जिसे मोदी सरकार ने समझा और फिर उसे पूरा करने के लिए कदम बढ़ाया है। ऐसे में विरोध करने से पहले चाहे वो राहुल गांधी हो या फिर मनोहर लाल शर्मा जैसा वकील हो, देश की जरूरतों, लड़ाकू विमानों की अहमियतों तथा उसके बारे में समझौते की प्रक्रिया के बारे में जानकारी हांसिल कर लें फिर विरोध करें।

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URL: Rafael Deal opponents know about its reputation, then surround the Modi government

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