राफेल डील मे़ रॉबर्ट वाड्रा के जिस सहयोगी का नाम आया है, वह संजय भंडारी कौन है?

अपने सहयोगी व्यवसायी को बचाने का आरोप लगाकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी सरकार पर हमला करते रहे हैं। लेकिन उनकी अपनी यूपीए सरकार किस प्रकार हवाला कांड से लेकर बेनामी संपत्ति तथा अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला मामले में नामजद आरोपी की काली दुनिया को लोगों की नजरों से बचाकर रखा है उसका जीता जागता उदाहरण है संजय भंडारी। दिल्ली के दरियागंज से होमियोपैथ की दवाओं का आयात-निर्यात के कारोबार से शुरुआत करने वाले संजय भंडारी आज डिफेंस डील करने वाली ऑफसेट इंडिया सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनी के मालिक हैं।

ध्यान रहे कि यूपीए सरकार के दौरान हुए पहले राफेल डील में ऑफसेट सौदा पर उसी कंपनी के साथ समझौता हुआ था। इसी कंपनी के बारे में कहा जाता है कि इसमे सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का भी हिस्सा है। तभी तो संजय भंडारी और राबर्ट वाड्रा के बीच गहरे संबंध लोगों के सामने आए हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि संजय भंडारी ही ब्रिटेन में राबर्ट वाड्रा के कई घरों के बेनामी मालिक है। इनकी काली दुनिया कभी भी लोगों के सामने नहीं आती अगर आयकर विभाग के अधिकारी दिल्ली के कुछ हवाला संचालकों के घर छापे नहीं मारते। इस साल के शुरू में आईटी विभाग द्वारा मारे गए छापे के दौरान एक कंपनी के नाम 116 करोड़ रुपये के लेन-देन का सुराग मिला। जब उस कंपनी की जांच की गई तो उसका एक सिरा संजय भंडारी से जुड़ता मिला और फिर उसकी काली दुनिया लोगों के सामने आ गई।

संजय भंडारी के पास कितनी संपत्ति है यह आज उन्हें भी पता नहीं है। यह किसी और आकलन नहीं बल्कि उन्होंने खुद ही आईटी विभाग को बताया है। जब आईटी विभाग ने उनसे ब्रिटेन में राबर्ट वाड्रा से जुड़ी बेनामी संपत्ति के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने खुद ही कहा है कि मुझे देखना होगा कि असल में यह प्रॉपर्टी किसके नाम है? उनका लाइफ स्टाइल ही फाइव स्टार वाला नहीं है बल्कि उनके संबंध भी बड़े-बड़े लोगों के साथ है। शीला दीक्षित , कई अन्य पूर्व केंद्रीय मंत्रियों से लेकर कांग्रेस नेताओं के उनका उठना बैठना है।

ये अलग बात है कि जब से अगस्ता वेस्टेलैंड हेलिकॉप्टर मामले में उनका नाम आया है तब से सब कन्नी काटने लगे हैं। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में आलीशान बंगला तथा डिफेंस कॉलोनी जैसी पॉश कालोनी में शानदार ऑफिस इस बात की तस्दीक करती है कि उनकी पहुंच कितनी ऊंची है? जहां तक उनके काम की बात है तो वे इसके बारे में अपने साया को भी बताने से डरते हैं। अपने काम को लेकर उन्होंने ड्राइवर तक को हिदायत दे रखी है कि उसके बारे में किसी से कभी कोई बात न करे! लेकिन जब कोई एक बार ईडी और आईटी के चंगुल में फंस जाता है तो उसका कोई राज राज नहीं रह पाता है। इसलिए अब संजय भंडारी की काली दुनिया और उनकी अकूत संपत्ति ही नहीं बल्कि उनकी काली करतूत भी लोगों के सामने आने लगी है।

संजय भंडारी के बारे में कहा जाता है कि वे आईटी एक्सपर्ट हैं। इतने कि व्हाट्सएप जैसे एप के कोड भी क्रैक कर सकते हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे सॉफ्टवेयर तक बना सकते हैं। जब आईटी विभाग ने उनके दफ्तर में छापेमारी की तो छापे से पहले ही भंडारी ने अपने कंप्यूटर का सारा डेटा ही उड़ा दिया। उन्होंने अपने फोन के सिम कार्ड को ही तोड़ दिया। फिर भी उनका डेटा सुरक्षित रहा। लेकिन आईटी विभाग के जासूस उनसे दो कदम आगे निकले। उनकी इस हरकत से पहले सारा डेटा कॉपी हो चुका था, जो आज दस्तावेज के रूप में रक्षा मंत्रालय के पास है।

छापे के दौरान उनके घर और दफ्तर से ऐसे दस्तावेज हाथ लगे हैं जो रक्षामंत्रालय के गुप्त दस्तावेज माने जाते हैं। जब ये सारे दस्तावेज गृह मंत्रालय को भेजा गया तो गृहमंत्रालय ने उसकी जांच के लिए रक्षा मंत्रालय को ट्रांसफर कर दिया ताकि ये पता चल सके कि कहीं यह कोई गुप्त दस्तावेज तो नहीं जो देश की सुरक्षा से जुड़ा हो। छापे के दौरान उनके घर से यूएई तथा लंदन में उनकी प्रापर्टी के दस्तावेज भी हाथ लगे। इसी प्रापर्टी के बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि दस्तावेज देखने के बाद ही पता चल पाएगा कि यह प्रॉपर्टी मेरे नाम है। उनके घर से मिले दस्तावेज के तहत ही राबर्ट वाड्रा के साथ उनके गहरे संबंधों का खुलासा हुआ। दोनों के बीच ईमेल से हुए संवाद के सैकड़ो सबूत मिले हैं। इसी सबूत के आधार पर जब ईडी और आईटी विभाग के अधिकारियों ने राबर्ट वाड्रा और उसके सेक्रेटरी से बात की तो दोनों ने यूएई तथा लंदन में उन प्रॉपर्टी को अपना बताने से ही इनकार कर दिया था। इस खुलासे के बाद यह साफ हो जाता है कि भंडारी और बाड्रा के बीच गहरे संबंध ही नहीं बल्कि व्यावसायिक और राजनीतिक संबंध भी हैं।

नफे सिंह नाम के एक शख्स ने तो रक्षा मंत्रालय के महत्वपूर्ण दस्तावेज चुराने का गंभीर आरोप लगाया है। गौर हो कि भंडारी पर जिस दस्तावेज को चुराने का आरोप लगाया गया वह फाइल कोई और नहीं थी बल्कि 126 लड़ाकू विमान की खरीदारी से जुड़ी फाइल थी। और वह फाइल काफी समय तक मंत्रालय से गुम रही। बाद में मामला उठने पर वह फाइल एक दिन रोड पर पड़ी मिली। इतना ही नहीं संजय भंडारी पर एफ-16 तथा एफ-18 डील में शामिल प्रतिभागियों से सांठगांठ होने का आरोप है। इडी और आईटी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो फाइल कभी रक्षा मंत्रालय के दफ्तर से बाहर नहीं जानी चाहिए थी वह फाइल संजय भंडारी के डिफेंस कॉलोनी स्थित उसके दफ्तर से छापेमारी के दौरान मिली थी।

यूपीए सरकार के दौरान जिस फ्रकार संजय भंडारी की पहुंच गृह मंत्रालय से लेकर रक्षा मंत्रालय तक बेधड़क थी उसे देखते हुए उनके खिलाफ गंभीर जांच की जरूरत है। इससे तो साफ है कि इतनी ऊंची पहुंच किसी आम आदमी का होना मुश्किल है। जिस प्रकार संजय भंडारी का राबर्ट वाड्रा के साथ संबंध, तथा यूपीए सरकार के दौरान हुई राफेल डील में ऑफेसेट सौदा के तहत उनकी कंपनी ओआईएस की साझेदारी सामने आई है। इससे साफ हो जाता है कि यह खेल काफी ऊँचे स्तर पर खेला गया था। तभी तो इतनी ऊंची हस्ती बन जाने के बावजूद संजय भंडारी कभी लाइम लाइट में नहीं आए। असल में उन्हें लाइम लाइट में आने नहीं दिया गया और उन्हें अपनी काली दुनिया का बेताज बादशाह बनने दिया, लेकिन उसका रिमोट अपने ही हाथ में रखा। लेकिन अब जब सारे रहस्य धीरे-धीरे खुलने लगे है। अब तो इस मामले में कोई बड़ा खुलासा होने का इतंजार है।

URL: Rafale deal controversy- Who is Sanjay Bhandari, associate with Robert Vadra?

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