राहुल गांधी क्या देश से कांग्रेस सल्तनत कीआखिरी कील उखाड़ने के लिए सिद्धू को खालिस्तानी आतंकी संग गलबहिंया करा, पंजाब को आतंकवाद की आग में फिर ढ़केलना चाहते हैं..

जब लगातार देश से कांग्रेस का विकेट गिरता जा रहा था पंजाब के कैप्टन ने कांग्रेस की डूबती नैया थाम लिया। देश को आजादी दिलाने का गुमान पालने वाली कांग्रेस पार्टी के शासन का पताखा अब दूर तलक सिर्फ पंजाब में दिखता है। वैसे दो अन्य बेहद छोटे राज्यों, मिजोरम और पुडिचेरी में अभी पार्टी का शासन है। किंतु पंजाब को कांग्रेस की आखिरी कील माना जाता है। यहां से कांग्रेस की सत्ता खत्म होने का मतलब है कि देश से कांग्रेस का सफाया! तो क्या सिद्धु का इस्तेमाल कर राहुल गांधी पंजाब से भी कांग्रेस का वजूद खत्म कर देना चाहते हैं ! यह सिर्फ इसलिए क्योंकि जब पंजाब में कांग्रेस जीत तो गई तो मीडिया ने इसे कांग्रेस की नहीं कैप्टन अमरेंदर सिंह की जीत बताया। क्या राहुल गांधी को इसी बात की टीस है जिसका बदला वे कैप्टन से लेकर पार्टी का वजूद खत्म करना चाहते हैं? सिद्धू बस इसके लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं !

पूरे पंजाब को पता लेकिन राज्य के बड़बोले मंत्री नवजोत सिद्धू को नहीं पता कि उनका कैप्टन कौन है ! पंजाब की जनता द्वारा चुने गए राज्य के कैप्टन, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंदर सिंह ने उन्हें करतारपुर जाने से मना किया था। अपने मुख्यमंत्री के आदेश को नजरअंदाज कर वे पाकिस्तान गए। पिछली बार जब वे अपने मुख्यमंत्री के मना करने के बावजूद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में गए तो पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजबा संग गलबहिंया कर आए। देश में उनकी खूब आलोचना हुई। राज्य के मुख्यमंत्री अमरेंदर सिंह ने भी इस पर आपत्ति की। यह कह कर कि मैं सेना का कैप्टन रहा हूं। मुझे पता है सेना का दर्द। कोई भारतीय अपने उस दुश्मन के सेना नायक से गले कैसे मिल सकता है जो हमारे सैनिको पर पीठ पीछे हमला करता है । पंजाब के मुख्यमंत्री के इस सलाह के मायने उनके कैबिनेट के साथी के लिए ही नहीं थे। क्योंकि उसके सिर पर जिसका हाथ था सिद्धू को उसी की अकड़ थी शायद।

यही कारण है कि अबकि बार जब राज्य के मुख्यमंत्री ने उन्हें करतारपुर जाने से मना किया तो वे सिरे से खारिज करते हुए पाकिस्तान गए और वहां खालिस्तानी आतंकी से मिल कर चले आए। इसकी घोर निंदा देश के अंदर हुई। वापसी पर जब उन से पूछा गया कि वे पाकिस्तान क्यों गए, जब कैप्टन ने उन्हें मना किया! जवाब में सिद्धु ने कहा कौन कैप्टन?मेरे कैप्टन तो राहुल गांधी हैं। उन्होने मुझे कहा जाने को फिर हमे कोई कैसे मना कर सकता है? फिर वे अपने मसखरेपन के अंदाज में कहा अच्छा तो आप कैप्टन अमरेंदर सिंह के बारे में बात कर रहे हैं। सिद्धु यहीं नहीं रुके उन्होने कहा उन्हें मना करने वाले थूक कर चाट रहे हैं। हिंदी समझने वाला कोई अदना सा बालक भी समझ सकता है कि सिद्धु ये किसके लिए बोल रहे थे। अपने मुख्यमंत्री को उसके कैबिनेट का सदस्य ही अपमानित कर रहा है। उस मुख्यमंत्री का जिसने पार्टी के दम पर नही अपनी लोकप्रियता के बल पर पंजाब में कांग्रेस को जीत दिलाई।

 

राजनीति की समझ रखने वाले हर किसी को पता है जिस कांग्रेस की सत्ता देश के हर राज्य से बारी बारी से खत्म हो रही है वहां कैप्टन अमरिंदर सिंह ही हैं जिनने पंजाब का चुनाव अपने दम पर जिताया था। राहुल को न चाहते हुए भी उन्हें पंजाब का कैप्टन बनाना पड़ा था। इसीलिए ना न तो सिद्धू के कैप्टन राहुल गांधी पंजाब के कैप्टन अमरेंदर सिंह को पसंद करते हैं न ही कैप्टन अमरेंदर राहुल गांधी को। पंजाब कैबिनेट के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू जिस तरह से अपने राज्य के मुख्यमंत्री को अपमानित करते हुए पाकिस्तान के अंदर उसके सेना प्रमुख से गलबहिंया कर खालिस्तानी आतंकी से गलबहिंया करने के पाप के बाद भी ठसक दिखा रहे हैं वो कांग्रेस पार्टी के लिए ही नहीं देश के लिए भी खतरनाक है। क्योंकि पंजाब खालिस्तानी सोच वाले देश विरोधी खून खराबे को भुगत चुका है। पंजाब के कैप्टन अमरेंदर सिंह से बदला लेने के लिए देश विरोधी ताकत संग राज्य के ही एक मंत्री का इस्तेमाल किया जाना कांग्रेस के लिए ही नहीं देश के लिए खतरनाक है। अपने ही पार्टी के मुख्यमंत्री अमरेंदर सिंह से कांग्रेस आलाकमान का ये नफरत जनता की चुनी सरकार को खालिस्तानी अलगावादी सोच के हवाले करना पंजाब में एक आत्मघाती खेल खेलने जैसा है। सिद्धू जैसे मसखरे को इसके लिए बस इस्तेमाल किया जा रहा है। इसीलिए वे पत्रकारों के सवाल पूछे जाने पर कि क्या वो पाकिस्तान कैप्टन से पूछ कर गए थे, उनका जवाब था कौन कैप्टन? अच्छा वो कैप्टन अमरिंदर सिंह, वो तो आर्मी के कैप्टन थे, मेरे कैप्टन तो राहुल गांधी हैं! वो पंजाब के मंत्री हैं तो तय सी बात है कि उनके कैप्टन तो अमरेंदर सिंह ही हुए जिन्होने उन्हें करतारपुर जाने से मना किया था। सिद्धू दुश्मन देश पाकिस्तान में तालियां बटोरे जाने के नशे में सब कुछ भूल रहे हैं कि वो कौन हैं और क्या उनकी जिम्मेदारी है ! पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा यह कहना कि वे पाकिस्तान में भी चुनाव जीत सकते हैं उन्हें लगा होगा भारत विरोधियों के सहयोग के बिना पाकिस्तान में चुनाव जीत नहीं सकते तो भारत के लिए भी वे इसी दांव को सही मानने लगे। खालिस्तानी आतंकी गोपाल सिंह चावला से गलबहिंया शायद इसीलिए करने लगे।

मसखरी और तालियों के शौक़ीन नवजोत सिद्धू को देश विरोधी हरकतों वाले इस इस खेल में भरपूर मीडिया अटेन्शन मिल रहा है। लेकिन पंजाब मंत्रीमंडल के कैबिनेटे मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजिंदर सिंह बाजबा ने नवजोत सिंह सिद्धू पर निशान साधते हुए उन्हें पंजाब कैबिनेट ने इस्तीफा देने की सलाह दी है। बाजवा ने शनिवार को कहा कि यह बात बिल्कुल साफ है कि पंजाब में हमारे लीडर, हमारी पार्टी के लीडर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ही हैं, लेकिन अगर सिद्धू उन्हें अपना नेता नहीं मानते या खुद को उनसे बड़ा मानते हैं तो उन्हें कैबिनेट से इस्तीफा दे देना चाहिए।

बाजवा ने कहा कि राहुल गांधी सिद्धू को जो भी जिम्मेदारी सौंपे उसे उन्हें निभाना चाहिए। लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि पंजाब में कांग्रेस और सरकार के लीडर कैप्टन अमरिंदर सिंह ही हैं और रहेंगे।’ बाजबा का कहना है कि जिस तरह के एटीट्यूड और बॉडी लैंग्वेज के साथ नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को अपना कैप्टन न मानने की बात कही है, वैसे में उन्हें कैबिनेट को छोड़ देना चाहिए। पंजाब के कैप्टन सिद्धू के बड़बोलेपन पर तो अभी चुप हैं लेकिन बाजबा के बोल साफ हैं कि पंजाब में कांग्रेस के लिए सब ठीक नहीं है। कांग्रेस जो लड़ाई अपने ही मुख्यमंत्री को नष्ट करने के लिए खेलना चाह रहा है वह खतरनाक है। बहुत मुश्किल से पंजाब आतंकवाद से मुक्त हुआ है। बार बार पंजाब को आतंकवाद से मुक्ति के पी एस गिल नहीं मिल सकता। जम्मू कश्मीर को आज तक कोई के पी एस गिल नहीं मिल सका। उसकी कीमत हम सब जानते हैं।

 

 

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