मोदी सरकार के कारण रामजन्मभूमि न्यास को मिल सकता है राम मंदिर बनाने के लिए 42 एकड़ जमीन!

राजीव सिन्हा:अयोध्या मामले में सरकार का नया दांव! केंद्र सरकार ने अयोध्या के विवादित स्थल को छोड़ अन्य जमीनों को मालिकों को वापस करने की मांगी इजाजत।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित भूमि पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में हो रही देरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक नया दांव खेला है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित भूमि(.३१३ एकड़) को छोड़कर शेष करीब ६७ एकड़ जमीन उसके मूल भूस्वामी को वापस करने की इजाजत मांगी है। सरकार का कहना है कि विवाद .३१३ एकड़ जमीन पर है बाकी जमीन पर विवाद नहींं है।

सनद रहे कि १९९३ के अयोध्या के कुछ क्षेत्रों केअधिग्रहण संबंधी अधिनियम के तहत अधिगृहित की गई ६७.७०३ एकड़ जमीन का संरक्षक केंद्र सरकार है।
केंद्र सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर मोहम्मद असलम उर्फ भूरे मामले में वर्ष २००३ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव करने की गुहार की गई है। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

केंद्र सरकार ने अपने आवेदन में सुप्रीम कोर्ट का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है कि .०३१३ एकड़ विवादित जमीन के आसपास की अधिगृहित की गई अधिकांश जमीन का असली भूमालिक राम जन्मभूमि न्यास है और न्यास ने अब अपनी जमीन वापस मांगी है। सरकार ने कहा है कि राम जन्म भूमि न्याय ने आवेदन दाखिल कर अधिगृहित की गई ६७.७० एकड़ में से करीब ४२ एकड़ जमीन पर अपना दावा ठोकते हुए वापस देने की गुहार की है।

लिहाजा अब केंद्र सरकार विवादित जगह(.३१३ एकड़) को छोड़कर बाकी जमीन को वह उन मूल भू मालिकों को वापस करना चाहती है, जिनसे वर्ष १९९३ मेंं अधिग्रहण किया गया था। ऐसा करने के लिए ही सरकार ने ३१ मार्च २००३ केउस आदेश में बदलाव करने की गुहार की है जिसमें अधिगृहित की गई ६७.७० एकड़ जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया था। आदेश में कहा गया था कि अधिगृहित की गई जमीन का संरक्षक केंद्र सरकार होगा।

सरकार ने १९९४ में इस्माइल फारुखी केफैसले का हवाला देते हुए मोहम्मद असलम उर्फ भूरे मामले के फैसले में बदलाव करने की गुहार की है। सरकार का कहना है कि फारुखी के फैसले में यह कहा गया था कि अतिरिक्त अधिगृहित की गई जमीन को मूल भूस्वामी को वापस लौटा दिया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि यह उसका दायित्व है कि अनावश्यक अधिगृहित की गई जमीन को उसकेअसली मालिकों को लौटा दिया जाना चाहिए।

सांप्रदायिक सौहार्द और देश केलोगों में भाईचारा बनाए रखने को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष १९९३ में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थाल केआसपास के करीब ६७.७ एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। वर्ष १९९३ के अयोध्या अधिनियम की प्रस्तावना यह थी कि उस जगह को पर्यटकों के लिए विकसित किया जाए। उस जगह पर पुस्तकालय, संग्रहालय सहित पर्यटकों की सुविधाओं के लिए कई चीजें बनाने की योजना थी।

इसकेबाद भूरे ने सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर कर कहा था कि अधिगृहित की गई जमीन पर पूजा हो रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ३१ मार्च २००३ को दिए अपने फैसले में कहा था कि अधिग्रहण व्यापक संदर्भ में था। फैसले में कहा गया था कि विवादित और गैर विवादित जमीन को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। ऐसे में अधिगृहित की गई जमीन पर तब तक यथास्थिति बनी रहेगी जब तक विवादित भूमि को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला नहीं आ जाता।

केंद्र सरकार ने अपने आवेदन में कहा कि विवादित जमीन(.३१३ एकड़) को छोड़ अन्य जमीन पर परीक्षण की जरूरत नहीं है। मुख्य मामले में ३० सितंबर २०१० को इलाहाबाद का फैसला आया था और इस फैसले में विवादित जगह को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। इसकेबाद हिन्दू व मुस्लिम पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट केआदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सरकार का कहना है कि मुख्य मामले में केंद्र सरकार पक्षकार नहींं है और .३१३ एकड़ केअलावा अन्य जगह पर विवाद नहींं है। लिहाजा उसे गैर विवादित जगहों को उनकेमालिकों को वापस करने की इजाजत दी जाए।

साभार: राजीव सिन्हा, अमर उजाला।

URL: Ramjanmabhoomi Nyas can get 42 acres of land for making Ram temple!

Keyword:राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित भूमि, राजीव सिन्हा, केंद्र सरकार , Ram Janmabhoomi-Babri Masjid disputed land, Rajeev Sinha, central government,

Join our Telegram Community to ask questions and get latest news updates
आदरणीय पाठकगण,

ज्ञान अनमोल हैं, परंतु उसे आप तक पहुंचाने में लगने वाले समय, शोध, संसाधन और श्रम (S4) का मू्ल्य है। आप मात्र 100₹/माह Subscription Fee देकर इस ज्ञान-यज्ञ में भागीदार बन सकते हैं! धन्यवाद!  

Select Subscription Plan

OR

Make One-time Subscription Payment

Select Subscription Plan

OR

Make One-time Subscription Payment



Bank Details:
KAPOT MEDIA NETWORK LLP
HDFC Current A/C- 07082000002469 & IFSC: HDFC0000708  
Branch: GR.FL, DCM Building 16, Barakhamba Road, New Delhi- 110001
SWIFT CODE (BIC) : HDFCINBB
Paytm/UPI/Google Pay/ पे / Pay Zap/AmazonPay के लिए - 9312665127
WhatsApp के लिए मोबाइल नं- 9540911078

You may also like...

Write a Comment