प्रधानमंत्री मोदी से नफरत करने वाली हाईप्रोफाइल मुसलिम पत्रकार राणा अयूब की हाईप्रोफाइल कहानी-1

दोस्तों, खुद का हाईप्रोफाइल मुसलमान जर्नलिस्ट दोस्तों, खुद का हाईप्रोफाइल मुसलमान जर्नलिस्ट कहने वाली राणा अयूब की ओर से संयुक्त राष्ट्र संघ मोदी सरकार को धमका रहा है! यानी चुनाव आने वाला है। हर शाम 6.30 से फेसबुक लाइव पर राणा अयूब के पूरे मकड़जाल को तोड़ने वाला एक सिरीज कर रहा हूं। facebook.com/IndiaSpeaksDaily को लाइक कर लीजिए। टेक्स्ट और लाइव वीडियो के जरिए इस इंटरनेशनल ‘मोदी-हेट इंडस्ट्रीज’ की सिरीज में आप सभी का सपोर्ट चाहिए…धन्यवाद!

आखिर राणा अयूब के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ मोदी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश क्यों कर रहा है? राणा अयूब अमेरिका के http://foreignpolicy.com में अपने बारे में लिखती है- I am a high-profile Muslim journalist who has persistently called out India’s majoritarian politics. इस मुसलिम पत्रकार का हाईप्रोफाइल कनेक्शन भी देख लीजिए कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद उसकी सुरक्षा के लिए मोदी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, उसका हाईप्रोफाइल कनेक्शन देखिए कि विदेश के हर बड़े अखबार, वेब पोर्टल और न्यूज एजेंसी के पन्नों पर वह कथित रूप से अपनी जान का भय दिखा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आधारहीन गॉसिप उगल रही है! हर अंतरराष्ट्रीय पत्रकार उसकी स्टोरी को ट्वीट और री-ट्वीट कर रहा है!

कभी यह हाईप्रोफाइल जर्नलिस्ट यह कहती है कि उसने मोदी और अमित शाह के खिलाफ ‘गुजरात फाइल’ नामक किताब लिखी है, इसलिए उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है तो कभी वह कहती है कि उसने गुजरात पर जितनी भी रिपोर्ट लिखी है उसकी वजह से धमकियां मिल रही है! राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मोदी-हेट इंडस्ट्रीज द्वारा हाथों-हाथ उठायी गई राणा की स्टोरी बिक रही है और वह हाईप्रोइफल के गुमान में खुद का ब्लू फिल्म बनवाने से लेकर, फोन पर धमकियां मिलने तक की रोज नई कहानियां गढ़ रही हैं।

चलिए इसकी पड़ताल करते हैं कि आखिर उसकी किताब में ऐसा क्या है? लेकिन पहले यह जान लीजिए कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने क्या कहा है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल करने वालों के लिए हाल के वर्षों में माहौल ख़तरनाक हो गया है। इसी साल 24 मई को संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि भारतीय सरकार को राणा अय्यूब की सुरक्षा के लिए इंतज़ाम करने चाहिए।

असल में संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त जेन बिन राद अल-हुसैन भारत और मोदी सरकार का धुर विरोधी है। वे अरब देशों से ताल्लुक रखता है रखते है और कट्टर मुसलमान है। भारत और मोदी सरकार के खिलाफ रोहिंग्या मुसलमानों से लेकर कश्मीर तक और अब राणा अयूब तक यही रिपोर्ट जारी करता और जहर उगलता रहा है। इसके अंदर का मुसलमान सक्रिय है और उसने मुसलमान अयूब के लिए बैटिंग कर भारत को बदनाम करने की कोशिश की है कि वहां कोई पत्रकार सुरक्षित नहीं है! अपने अरब मुल्क और पाकिस्तान में पत्रकारों की दशा पर यह जैद चुप है!

बता दूं कि मोदी सरकार के आने के कुछ समय बाद ही हाई प्रोफाइल मुसलमान पत्रकार राणा अयूब की किताब ‘गुजरात फाइल्स’ प्रकाशित हुई थी, लेकिन आज यदि वह अंतरराष्ट्रीय हाईप बना रही है तो समझ जाइए कि भारत का आम चुनाव नजदीक आने वाला है! ‘Modi-haters’ इंडस्ट्रीज की यह Queen हर चुनाव से पूर्व सक्रिय हो जाती है!

पहले इसने रोना रोया कि चूंकि ‘गुजरात फाइल्स’ में उसने प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को बेनकाब किया है, इसलिए कोई भी प्रकाशक उसे छापने को तैयार नहीं है। इस झूठ को भी हाईप्रोफाइल बनाया गया! झूठ इसलिए कि यदि मोदी और अमित शाह चाहते तो शायद यह किताब हमेशा के लिए बैन हो जाती, जैसे कि इंदिरा गांधी ने उन्हें बेनकाब करती, ओ.पी. मथाई की पुस्तक को तो उनकी बहु सोनिया गांधी की मनमोहन सरकार ने सोनिया गांधी पर लिखी ‘रेड साड़ी’ को बैन किया था! लेकिन मोदी-शाह ने ऐसा कुछ नहीं किया और राणा की यह किताब बड़े आराम से आ गयी! हां इस हाईप्रोफाइल हाईप का असर यह हुआ कि इस किताब के लिए बाजार बन गया और फिर वह घुंघरू तोड़ कर बिकी! राणा ने दावा किया कि उसने खुद इसे प्रकाशित किया है। प्रकाशक के रूप में दिल्ली के मयूर विहार स्थित किसी गुलमोहर किताब का नाम है।

एक नया प्रकाशक इसे इतनी जल्दी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाने और हर स्टॉल पर पहुंचाने में सक्षम भी हो गया? मूल रूप से अंग्रेजी में आई इस किताब का एक साथ और लगातार कई भाषाओं में अनुवाद कराने के भी वह काबिल हो गया? पैटर्न देखिए! जिस राज्य में चुनाव आता है, उस राज्य की भाषा में राणा अयूब की किताब फटाक से आ जाती है? क्या बिना किसी संगठित गिरोहबंदी और बड़े फंड के यह संभव है? राणा अयूब मोदी-शाह हेट से लेखिका, प्रकाशक और अंतरराष्ट्रीय हाईप्रोफाइल मुसलिम पत्रकार-तीनों बन गयी! यह सब केवल संयोग है, या फिर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा? यह मैं पाठकों पर ही छोड़ता हूं।

राणा ने अपनी दिक्कतों का ढिंढोरा पीटा, लेकिन सहूलियत देखिए कि मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई यह किताब, तड़ातड़ हिंदी, कन्नड़ एवं देश की अन्य भाषाओं में अनुवादित होती और छपती चली गयी। मोदी-शाह ने इसे किसी भाषा में कहीं नहीं रोका, जिसे आधार बनाकर राणा ने प्रकाशक न मिलने का वितंडा खड़ा कर सहानुभूति बटोरी थी।

हां, इसका फायदा यह हुआ कि ‘मोदी-हेट इंडस्ट्रीज’ की वह Queen बनती चली गयी और फिर उसका अहंकार इस चरम पर पहुंच गया कि वह लिखने लगी- I am a high-profile Muslim journalist. चलो, इससे एक बात तो तय हो गया कि वह पत्रकार नहीं, मुसलमान पत्रकार है! अर्थात् उसका एक दृष्टिकोण है, जिसमें हिंदू-हेट और राष्ट्रवादी सरकार से नफरत घुला हुआ है। और इसी नफरत की ब्रांडिंग उसने ऐसी की कि संयुक्त राष्ट्र संघ उसके लिए मोदी सरकार को पत्र लिख रहा है, उसके लिए Tweet कर रहा है।

बिजनस स्टैंडर्ड ने तो राणा अयूब के लिए पुलित्जर पुरस्कार की मांग ही कर दी है। यानी अंतरराष्ट्रीय पुलित्जर पुरस्कार देने के लिए लॉबिंग भी जारी है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी विरोध में अरुंधती राय जैसी एक कृत्रिम आवाज पैदा की जा सके! वामपंथ की भाषा में इसे ‘विक्टिम प्ले’ बोलते हैं। मुसलिम पत्रकार राणा अयूब ने वही कार्ड खेला है और खुद के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तैयार कर लिया है। 2019 के आम चुनाव तक अयूब ‘Modi-haters’ इंडस्ट्रीज की अंतरराष्ट्रीय मुसलिम ब्रांड ऐंबेसेडर बन चुकी है।

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URL: Rana Ayyub: A high-profile Muslim journalist-1

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1 Comment

  1. Avatar Arnav Patil says:

    कितना बकवास करोगे तुम? अगर राणा आयुबने मोदी-शाह के खिलाफ अपनी बुक में लिखी हुई बात गलत है तो आयुब पर मानहानी का दावा क्यू नही किया सरकारने? सरकार में जो दो लोग बैठे है वो बेशक दोषी ही है…!

    अपने इस लेख में तुमने आयुब को पाकिस्तान और अन्य अरब देश मदत करने की बात करते हो, ये बात मनगडंत है.. जो व्यक्ती मोदी के खिलाफ बोलता है ऊस व्यक्ती को आप पाकिस्तान से जोड देते हो, ये बात गलत है…!

    राणा अयुब एक इनोसंट पत्रकार है, जो सच लिखती है..

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